सागर को ख़ुदा का वासता
[ ये ख़ुदा है - 48 ]
ख़ुदा को बताया कि आगे ना जाओ वहां खड़्ड़ा है। जवाब दियाः हमें मालूम है कि कहां क्या है और हम इतने भी अंधे नहीं कि खड़्ड़े मे ओंधे गिर पडें। वैसे एक बात बताओ कि वहां खड्डा काहे के लिए खोदा है, कहीं ये हमारी मज़ार का उपघाटन तो नहीं? ख़ुदा को बतायाः गरररर —— आपको हर खड्डा मज़ार की तरह क्यों दिखता है जैसे आपको अपनी ख़ुद की मज़ार चमकाने का बडा शौक़ है। अरे भाई ये खड्डा तो इन्टरनेट के तार बिछाने के लिए खोदा है ना कि आपको दफ़नाने के वासते। ख़ुदा ने हंसते हुए कहाः हा हा हा - तुम इन्सान अच्छा मज़ाक़ करलेते हो और हम भी मज़ाक़ ही फ़र्मा रहे थे, यहां हर दिन हमारी मेहफ़िल मे दुनिया जहां के लफ़ड़े सुनने को मिलते हैं। जब देखो बम धमाके, आतंक और फ़साद, चुनाव, राजनितिक उथल पुथल की ख़बरें वगैरह वगैरह —- अरे भाई हंसने और हंसाने की बात भी हो। देखो आजकल ये ख़बरी चैनल वाले ब्रेकिंग न्यूज़ के साथ लॉफ़्टर शो को भी ब्राडकास्ट करते हैं, शायद वो भी दुनिया भर की ख़बरें सुना सुना कर तंग आचुके। आज से हमारी मेहफ़िल की शुरूआत बाक़ाईदा चुटकुलों के साथ हो और ये हमारा फ़र्मान है। चुटकुलों की पहली मेहफ़िल मे सरदारों पर क़िस्से सुन ख़ुदा अपना पेट पकड़ लोट पोट होने लगा, इतना हंसा कि आंसूँ छलक पड़ेः अब बस भी करो, वल्लाह हमारी आंतों मे गांठ पड़ने को है। ख़ुदा ने फ़र्मायाः वाक़ई ये लतीफ़े बड़े मज़ेदार होते हैं, ज़िन्दगी मे पहली बार हमने खिलखिला कर हंसा। आप सब से बिन्ती है कि सिर्फ़ सरदारों पर ही क्यों? ख़ुदा पर भी लतीफ़े बनाओ और नेकी पाओ। मेहफ़िल से एक बन्दे ने आवाज़ लगायाः ख़ुदा की पनाह हम चुटकुले कैसे बनाएं, ख़ुदा की शान मे गीत और भजन गाया जाता है। ख़ुदा ने बन्दे को अपने पास बुलाया और एक थप्पड़ लगायाः तुम हमारी शान मे क्या भजन गाओगे, जैसे कि ख़ुदा को अपनी शान का पता ही नहीं? और तुम लोग ये भजन गा गा कर जैसे हमें अपनी ख़ुदाइयत याद दिलाते रहते हो - हां? हम पर क़सीदे (भजन) गाने या ना गाने से हमारी शान मे रत्ती भर कमी नहीं होती। ख़ुदा ने अपनी हथेली खुजाते फ़र्मायाः हंसी मज़ाक एक अच्छी बात है और हमारा ये कहना कि सिर्फ़ किसी ख़ास शक़्स (सरदार) पर लतीफ़े गढ़ने से अच्छा है ख़ुदा पर चुटकुले लिखो और पुण्य पाओ। आज हमारा ये फेसला कि ख़ुदा पर चुटकुले पढ़ने को इबादत माना जाएगा और स्वर्ग मे हंसाने वाली हसीनाओं मे उसका बसेरा होगा। जारी
बाक़ी फ़िर कभी
नोटः ऊपर का लेख क़िस्त नम्बर 48 भाई गिरीराज जोशी की फर्माईश पर सागर चंद नाहर के लिए लिखा है। अगर फ़िर भी वो ना हंसे तो —- सागर भाई को ख़ुदा का वासता अब हंस भी दे मेरे भाई
[...] ہندی میں: یہ خدا ہے - 48 [...]