[ ये ख़ुदा है - 49 ]
सुबह सुबह ख़ुदा अपने सर पर पगड़ी बांधे आईने के सामने खडे होकर नारे लगाएः हमारी माँगें + पूरी करो। जब उस से पूछा कि ये क्या तमाशा है? ख़ुदा ने बताया चुनाव सर पर हैं और उसी की प्रेकटिस चल रही है। ख़ुदा को समझायाः अरे मियाँ ये नारा तो मज़दूर यूनियन का ट्रेडमार्क है और आपको ढंग से वोट भी मांगना नही आता। ख़ुदा को बताया कि वोट ऐसे मांगते हैं: मेरी माओं बेहनो और भाईयों मुझे वोट दो। ये सुनकर ख़ुदा ने ताजुब से कहाः तौबा तौबा
छी छी - हम तो ख़ुदा हैं ऐसा हम कैसे कह सकते हैं। मालूम है कि आप ख़ुदा ही हैं
मगर वोट मांगने के लिए कुछ ऐसा ही कहना पड़ेगा और तो और गधे को भी बाप बोलना पड़ता है
ख़ुदा से पूछाः वैसे जनाब आप कौनसा चुनाव लडने जा रहे हैं और आपकी पार्टी का नाम क्या है? ख़ुदा ने डुलते हुए शर्मा कर कहाः दरअसल हमें “बेहतरीन हिन्दी चिट्ठा” के चुनाव मे हिस्सा लेना है
तरकश ने एलान क्या है कि 2006 से लिखे जाने वाले हिन्दी चिटठों मे से किसी एक को “बेहतरीन चिट्ठा” का पुरसकार दिया जाएगा। ख़ुदा से पूछाः अरे भाई, आपको तो लिखना पढ़ना आता ही नहीं और ना ही आपका कोई ब्लॉग है तो फिर आप “बेहतरीन हिन्दी चिट्ठा पुरसकार” के लिए इतने ख़ुश क्यों हो रहे हैं? ख़ुदा इकदम झिल्लायाः बस बस
हमारे अंदर ज़्यादा ना झांको। वल्लाह हम लिखना पढ़ना नही जानते मगर ये क्या……. अब तक हम पर 48 किश्तें लिखी जा चुकी हैं और ये 49 वीं किश्त भी हाज़िर है, हिन्दी-उर्दू दोनों भाषाओं मे एकसाथ हमारी टांग खींची जा रही है। जंग हो या फ़साद, राजनीतिक हो या मीडिया, बारात हो या अर्थी यहां तक कि लालू से लेकर ईश्वर्या तक, रेश्मा की ज्वानी से लेकर बाजपाई तक, अमेरिका, जापान, चीन और इंगलिस्तान, अरब और रेगिस्तान, घोड़ा हो या गधा मतलब कि हर ख़बर मे ख़ुदा को चमचा बना कर इस चिट्ठे मे पेश किया जा रहा है। और हम पर किश्तें लिखने वाला ये ब्लॉग इतना निडर और हिम्मत वाला है कि हमारी मां बेहन को भी गिनने मे ज़रा भी हिचकिचाता नहीं मगर मज़े की बात तो ये है की हमारी कोई मां बेहन है ही नहीं
ख़ुदा को ख़ुदा की क़सम, हम ने बहुत से चिट्ठे पढ़े मगर सच्चाई उगलने वाला ये हिन्दी चिट्ठा पहली बार देखा। काश, अगर ये हिन्दी चिट्ठा पुराने ज़मानों ने लिखा होता तो अज इसे एक आध्यात्मिक पुस्तक मानी जाती मगर आजकल तो ऐसी बातों पर दुनिया वालों को विश्वास नही है सिर्फ जितनी भी पुरानी और सड़ी गली बातें थी सब उसी पर विश्वास करते आ रहे हैं। ख़ुदा ने अपने दोनों हाथ फैलाते कहाः आओ ऐ हिन्दी चिट्ठाकारों ख़ुदा पर लिखने वाले इस हिन्दी चिट्ठे को अपना वोट देकर काम्याब बनाओ
और इसके बदले हम तुम्हें स्वर्ग मे आलीशान घर देंगे
जारी
बाक़ी फ़िर कभी
16 comments so far
Leave a reply