[ ये ख़ुदा है – 50 ]
ख़ुदा ने दुःख भरे अंदाज़ मे अपना किस्सा बयान कियाः अभी पिछले दिनों हमारे साथ बहुत बुरा हुआ, राह चलती एक बारात को हमने जुईन किया, म्यूज़िक की धुन पर जब ज़बरदस्त ठुमके लगाने शुरू किए तो एक बुज़र्ग बाराती ने हम से शनाख्त पूछा और हमने भी कॉलर चढ़ाकर कहाः वल्लाह हम ख़ुदा हैं। तभी एक ज़ोरदार चमाट हमारी गर्दन पर मारा। पूरी रात छत पर बैठे हम यही सोचते रहे कि क्या ज़माना है, आज ख़ुदा ख़ुद बंदे के रूबरू आकर कहता है कि हम ख़ुदा हैं मगर इंसान को यकीन ही नहीं। समझ मे नहीं आरहा कि आख़िर किसकी शकल मे हम ख़ुदा बन कर आएं - भगवान गणेष की सूरत मे या सूफ़ी संत-साधू बाबा के लिबास मे या फिर मुल्ला की तरह सर पर टोपी पहने। हे अक़ल के अंधों ज़रा तुम ही बतादो कि ख़ुदा को आख़िर किस रूप मे देखना चाहोगे।
तालियां और सीटियां - ख़ुदा की इस पचासवीं किश्त पर तुहफ़ों के अंबार लगादिए, दोपहर को इतना दबाकर खालिया कि शाम छेः बजे तक खर्राटे भर रहा था फिर जागा तो खींचकर लम्बी अंगडाईयों के साथ खौफ़नाक अंदाज़ मे मूंह खोले जमाही छोडा। ख़ुदा के जागने पर पूछाः आलिजाह, ऐसा क्या खालिया कि दुनिया से बेख़बर सोते ही रहे? खींचकर दुबारा अंगडाई छोडते ख़ुदा ने फर्मायाः हां भई, तुहफ़ों मे किसी ने अफ़ग़ानी गाय का भुना गोश्त भेजा वाकई बडा टेस्टी था ये दखो हमारे दांतों मे अभी तक गोश्त फंसा हुआ है। ख़ुदा के इस बेहूदा अंदाज़ पर पूछाः ख़ुदारा आपको शर्म नहीं आई, आप भी इनसानों की तरह गोश्त खा गए? ख़ुदा ने हैरांगी ज़ाहिर फर्मायाः इसमे शर्म काहे की, ये गोश्त तो हलाल है मियां। ख़ुदा को बतायाः अरे आप ख़ुदा हैं कि पैजामा, आप अपनी बनाई गाय को ही खा गए - आज गाय को चबाया है अगर कल का दिन भूक लगे तो इंसान को भी खालोगे क्या?? ख़ुदा भी भड़क उठा, अपनी कमर पर हाथ रखे फर्मायाः ओहो हो - तुम इंसान कहां से शरीफ हो, अगर एक जान्वर इनसान पर हमला करे तो उसे दरिंदा कहते हो और तुम इंसान अब तक लाखों जान्वर काट खा गए फिर भी ख़ुद को महान कहते हो - हां जी?? तुम इंसानों की और भी पोल पट्टीयां खोलदें, ख़ुदा से ज़्यादा बहस ना करो वर्ना ख़ुदा ना करे हम ग़ज़ब मे आजाएं।
ख़ुदा के गज़ब पर पूछाः वाह जनाब, ख़ुदा के मूंह से इंसानों जैसी बोली ज्यादा अजीब नहीं लगी - काश अगर ख़ुदा थोडी देर के लिए इंसान बनजाए तो ख़ुदा को अपने ख़ुदा होने पर रोना आए। माना कि तकब्बुर, ग़रूर और हसद करने पर क़ादर हैं, आप बिला वजह इंडोनेशिया पर बरस पडें तो कुछ भी नहीं, ईराक़ मे हर दिन अज़ाब पर आप तालियां पीटते नहीं थकते - आप तूफ़ानों के सौदागर हैं, भूकंपों के दलाल हैं और ग़रीबों के तो जानी दुशमन भी। इंसानों की तरह आप मे भी ख़ामियां ही ख़ामियां हैं। एक ऐसे वक़्त मे ख़ुदा धर्ती पर उतरा जबकि आज दुनिया को ख़ुदा की कोई ज़रूरत ही नहीं। चांद और मंगल ग्रह के बाद अब ब्लाक होल को भी सर करने की तैयारी मे है। ऐसी वैसी हैरत अंगेज़ियां ऐजाद करलीं कि ख़ुदा भी अपनी उंगलियां दांतों तले चबाले। आज का इंसान अपनी रोटी आप पाता है जबकी ख़ुदा को रोटी बेलना तक नहीं मालूम। ख़ुदा का ग़रूर है कि उसकी बराब्री करने वाला दूसरा कोई नहीं मगर हालात साफ़ ज़ाहिर हैं इंसान ख़ुदा से कुछ कम नहीं। मौत और ज़िन्दगी सिर्फ ख़ुदा के हाथ मे नहीं, ईराक़ के ताज़ा हालात गवाह हैं कि ये काम अमेरिका भी कर सकता है। अच्छा है कि ख़ुदा ग़ायब ही रहे अगर ज़रा भी हिम्मत करके इंसानों के रूबरू आगया तो कई स्वालों के जवाब देने होंगे।
डेंगें मारना कोई ख़ुदा से सीखे, दुनिया बनाई मगर ख़ाक़ एक साईकल बनाने की हैसियत नहीं। ख़ुदा को अपनी ख़ुदाई पर बडा ग़रूर है फिर भी इंसानों से आंख लडाने की हिम्मत नहीं। हमेशा से ग़ायब रहना जैसे उसका तकय क्लाम है, कभी तो इंसानों के रूबरू आकर बोले। ख़ुद को ख़ुदा कहलवालिया तो सभी इंसान पागल नही कि आप पर ईमान ले आएं, उस ज़माने मे कहां झक मार रहे थे जब गधा गाडियां थीं और आज जगमगाती दुनिया देख बदहवासी मे ज़मीन पर उतर आए। वैसे ख़ुदा के लिए अक़ल हराम है चूंकि सारे काम अपने हुकम से अंजाम देता है। अगर ख़ुदा मे ज़रा भी सूझ बूझ और अक़ल नाम की चीज़ होती तो पुराने ज़मानों मे लोग जाहिल ना होते - उस दौर मे भी आटो रिकशा और मौटर कारें होतीं। आज अक़लमंद इंसानों को देख ख़ुदा भी मुहताज धर्ती पर उतर आया।
पूरे ग़ज़ब मे ख़ुदा चीख़ाः चलबे साले, तेरी मां की —— ख़ुदा को ख़ुदा की कसम, हम तंग आगए इन बक्वास किश्तों से - ख़ुदारा कोई तो इसे समझाओ, अगर यूं ही ख़ुदा पर बक्वास लिखता रहे तो एक दिन इसके अपने इसका सर धड से जुदा करदेंगे। अपनी इन किश्तों मे ख़ुदा की शान व शौकत को मिट्टी मे मिलादिया - हमारा ग़ुस्सा बडा ग़ज़बनाक है अगर यकीन ना आए तो वो पुराने किस्से पढलेना बाज़ार मे हर जगह दस्तयाब हैं। पहली किश्त मे ही ख़ुदा को नीचा दिखा दिया अब इस पचासवीं किश्त मे ख़ुदा से पंगा? धर्ती पर ऐसे भी इंसान थे जिनहोंने ख़ुद को ख़ुदा कहलवाया और ऐसे भी लोग थे जो ख़ुदा पर ऊटपटांग किताबें लिख कर मर गए मगर ये चिट्ठा है कि अपनी बक्वास किश्तों से हमारे दिमाग़ की मां बहन करने पर तुला हुआ है। तौबा तौबा - धर्ती पर आने के बाद हमारी ज़ुबान बेक़ाबू होगई, हम भी मां बेहन की गिन्ने लगे।
वल्लाह, हमने तो सोचा था कि नये वर्ष 2007 के मौक़े पर कुछ अच्छा सा भाषण बोलें मगर इस पचास्वीं किश्त ने हमारा मूड़ आफ़ करदिया। चिंघाड़ते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः अपने आपको देख, अपना हुलिया देख, अपनी आस पास की चीज़ें देख, धर्ती और आसमान को देख फिर पूछ अपने दिल से कि ख़ुदा क्या बला है? तुझ से पहले भी बहुत सारे लोग बक्वास लिख कर मर चुके मगर आज तक तेरी तरह किसी ने ख़ुदा की टांग नहीं खींचा। आख़िर हमने तेरा क्या बिगाडा कि हम से इतना नाराज़ है, ख़ुदा पर इतने घटिया अंदाज़ मे बदकलामी लिखने वाले बता तेरे साथ क्या सलूक किया जाए - तुझे ख़ुदा बनादें या हमेशा के लिए इबरत की निशानी? वल्लाह हम ख़ुद कनफ़्यूज़ हैं कि इतनी हिम्मत और जुर्रात के साथ ख़ुदा पर बक्वास और घटिया किश्तें लिखने पर तेरे साथ किस तरह का बरताऊ किया जाए।
सांस लेकर ख़ुदा ने फर्मायाः सच तो ये है कि इनही किश्तों ने हमें धर्ती पे उतरने पर मजबूर करदिया और इन किश्तों मे हमें हीरो और विलन दोनों रोल निभाने पर मजबूर किया और यही किश्तों कि वजह से पता चला कि हमने इंसान भी बनाया था मगर ख़ुदा पर इतने बेहूदा अंदाज़ मे लिखने वाला पहले कभी नहीं देखा। धर्ती पर ऐसे भी लोग थे जो ख़ुद को ख़ुदा होने का दावा किया था और ऐसे लोग भी गुज़रे जो ख़ुद को ख़ुदा का औतार बताया था मगर ऐसा पहली बार देखा कि कोई चिट्ठाकारी से ख़ुदा को उसकी औक़ात याद दिला रहा है। वल्लाह हम ख़ुद हैरान हैं इन वक्वास किश्तों पर - हम ख़ुदा हैं तो क्या हुआ, हमारे सीने मे भी दिल है, हमारे पास जज़बात हैं और सबर करने की ताकत भी है तभी तो वर्षों से इस दुनिया को अपने सर पर उठा रखा था, तुम इंसानों के नख़रे सहते रहे, हर किसम की बुरे कामों को बर्दाश्त करते रहे मगर जब तुम इंसानों ने धर्म बनाने शुरू किए तो ये हमसे बर्दाश्त नहीं हुआ। दिल तो चाहा कि दुनिया को उठाकर फेंकदें फिर देखा कि लोगों मे वापस इंसानियत लौट आरही है - लोग नई बातें और नई सोच की राहें तलाश रहे हैं। तबसे हमने दुनिया को उंगलियों पर घुमाना शुरू करदिया।
ख़ुदा का भाषण खतम होने पर उसे बतायाः ये किश्तें बक्वास नहीं बल्कि जान बूझ कर ख़ुदा की ख़ुदाई को ल्लकारा है। अपने पैदा करने वाले का ग्रेबान पकड कर पूछना है कि जब पालने की औक़ात नही तो पैदा किया ही क्यों? शक तो ये भी है कि अगर ख़ुदा एक बाप का होता तो आज धर्ती के सारे इंसान एक बात पर क़ायम होते। ख़ुदा की अज़मत पर शक करना किसी की जुर्रत नहीं अगर दिमाग़ से ग़ौर करें तो ख़ुदा सिर्फ एक ताक़त है बाक़ी कुछ नहीं - यही तो इन किश्तों की ख़ासियत है। दुनिया को बताना है कि ख़ुदा आसमानों मे नहीं बल्कि अपनी जेब मे है, हम ख़ुदा की नहीं बल्कि ख़ुदा को हमारी सुन्ना है। इन किश्तों ने ख़ुदा को पागल नहीं बनाया बल्कि उसे सोचने और समझने की सलाहियत दी है। अगर इन किश्तों की वजह से आज ख़ुदा अपनी ज़ुबान ना खोलता तो अगले हज़ारों वर्षों तक भी लोग आंखें होने कि बाव्जूद भी अंधों की तरह जी रहे होते। इन किश्तों के ज़रिये ख़ुदा को बताना है कि इंसान को बनाकर दुनिया मे भेज तो दिया मगर दुबारा पलट कर हमारी तरफ़ देखा तक नहीं।
ये किश्तें लिखने का मक़सद यही है कि ख़ुदा अपनी छिचोरी हरकतें छोड धर्ती पर उतर आए और अपनी आंखों से देखले कि उसका पैदा किया इंसान आज इतना महान होगया कि अपने धर्म को छोड बाक़ी सब धर्मों से सख़्त नफरत करने लगा है। गुज़रे ज़माने के बुज़र्गों ने अपनी अपनी पसंद का जो मज़हबी बीज बोया था उसकी नफ़रत अंगेज़ जडें हम इंसानों को सदियों से लडवा रहीं हैं। ख़ुदा को ख़ुदा मानते हुए भी अपनी मर्ज़ी का धर्म बना गए और ऐसी वैसी हिदायतें छोड गए कि ख़ुदा की पनाह अगर ख़ुदा भी देखले तो शर्म के मारे मुर्गा बन जाए। और आज धर्ती पर इतने सारे धर्म देख कर ख़ुदा मगरमछ के आंसूं बहा रहा है - हम इंसानों को धोका देने वाले हे ख़ुदा ज़रा बता कि तेरा धर्म कौनसा है? यहां हम लोग दिल ही दिल मे ख़ुश हो रहे हैं कि सबसे सही धर्म अपना ही है और बाक़ी सारे धर्म झूठे हैं। हर धर्म मे अजीब अजीब हरकतें अगर तू भी देखे तो खिलखिलाकर अपने दांत गिराले। क्या मालूम कि ख़ुदा बेढंगा हो अगर वो सीधा होता तो आज सभी धर्मों के इंसान एक होते। ये भी सच होसकता है कि ख़ुदा खुद हम इंसानों को धर्मों मे बांट कर हमेशा हमेश के लिए लडवाना चाहता है क्योंकि उसके पास दूसरा कोई इंटरटैन्मंट नहीं।
बर्दाश्त ना करते हुए ख़ुदा ने अपनी हथेली खुजाते हुए फर्मायाः बडे दिनों बाद हमारे अंदर चमाट मारने की आरज़ू जाग रही है ये किश्त हमें भडकाने की कोशिश कर रही है। आज तक कसी ने ख़ुदा पर इतना घटिया लेख नहीं लिखा जो इस किश्त मे लिखा जा रहा है। ख़ुदारा कोई तो इस चिट्ठे के ख़िलाफ़ जलूस निकालो और पथराऊ करो ख़ुदा खर्च उठाएगा। इस किश्त के पढ़ने वालों से गुज़ारिश है कि वो ख़ुदा के हक़ मे दुआ करे ताकि वो अपना गुस्सा पी जाए। गुस्सा पीकर ख़ुदा ने फोरन कहाः साला, तेरी मां की —– ख़ुदा की धर्ती पर खड़ा ख़ुदा को ल्लकार रहा है। क्या शिकायत है, आख़िर तेरा प्राब्लम क्या है? हमने ऐसा क्या करदिया कि पूरी किश्त मे ख़ुदा को नंगा दिखा रहा है। सबकी तरह तुझे भी मां-बाप दिये - आंख नाक कान चूतड सामान सब कुछ तो दिया है। ऐसी क्या बात होगई कि ख़ुदा के ख़िलाफ खुल्लम खुल्ला लिख कर कीचड उछाल रहा है। बाक़ी सारे लोग ख़ुदा पर ईमान रखें या नहीं मगर तेरे इस बक्वास लेख पर सबका ख़ून खवल उठता है, सिर्फ ख़ुदा ही नहीं बल्कि सभी धार्मिक लोगों को आपनी मौत की दावत दे रहा है। ख़ुदा रहीम करीम है मगर ये किश्तें हमें कमीना बनने पर मजबूर कर रहीं हैं।
दांतों से भुना गोश्त निकालते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः देख भई, लोग भाड मे जाएं या अजीब गरीब धर्म कर्म बनाकर सटिया जाएं - इस मे हमारा कोई क़सूर नहीं। तू ने अब तक की सभी किश्तों मे ये जो धार्मिक हतोडे हम पर मारते हुए दलीलें मांगता रहा, हम ख़ुद इन धर्मों और उनके करतूतों से बेख़बर थे। हमने कोई ख़ास धर्म नहीं उतारा और ना ही हमारा कोई धर्म है। वल्लाह हम पैदाइशी लावारिस थे, जन्नत के खेत मे नंगे पडे थे फिर थोडी जवानी आई तो ऐहसास हुआ कि हम ही ख़ुदा हैं। धर्ती पर उतरने के बाद अगर लोगों से हम खुल कर मिलें तो क्या जवाब दें, लोग हमें आफर दें तो कौनसा धर्म इख़तियार करें? हमें तो धर्म के नाम से ही चिड होने लगी है। बस भाई, हम जो भी हैं जैसे भी हैं सही रास्ते पर चल रहे हैं। हमें ना इस्लाम क़बूल करना है और ना ही ईसाई और हिन्दू होना है चाहे जितनी भी रिश्वत मिले, अपना सर कटा देंगे मगर किसी भी धर्म को हरगिज़ नहीं अपनाएंगे। इसी प्लान के मुताबिक़ हम चोरी चोरी धर्ती पर उतर आए।
उफफ —– तुम इंसानों की बिखरी कौमें देख हमने रोना चाहा मगर रो ना पाए और ना ही हमें रोना मालूम है। कितना अच्छा ख़ासा इंसान बनाकर भेजा था, कौन है ज़ालिम जिसने तुम लोगों को धर्मों मे बांट गया ज़रा नाम और चेहरा बतादो हम उसे क़बर खोद कर निकालेंगे। अपने ख़ुदा होने कि कसम हम बाकाईदा ख़ुदा हैं। हे अफसोस, इतनी अच्छी अक़ल और ज़हानत वाला इंसान आख़िर क्योंकर अपनी ज़िन्दगी के खास हिस्से को अंध विश्वासी मे गुज़ार रहा है। देखो तो सही कैसी कैसी अजीब हरकतें कर रहा है, ख़ुदा के नाम पर कोई नारियल तोड रहा है तो कोई सर मुंडवा रहा है - अगरबत्तीयां मोमबत्तीयां दोनों की मां बेहन कर रहा है। हमारे नाम का धंडोरा पीट कर कोई क़व्वाली गा रहा है तो कोई मातम कर रहा है क्या ख़ाक़ इंसानियत की मां —– रहा है। हमने पुराने ज़मानों मे भी इंसानों को अक़ल दी थी मगर उनके पास करने को कुछ नहीं था धडाधड धर्म बना गए मगर आज का इंसान अपनी अक़ल को सही कामों के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
लम्बी जमाही लेने के बाद ख़ुदा ने अपने सामने डिब्बे से केक उठाकर खाया तो चिल्ला उठाः आआख़क़ थूूूू —— ये किसने बगैर चीनी वाला केक भेजा उसकी मां की ——, जैसा कि हम शुगर के मरीज़ हैं
? वल्लाह हम हर किसम की बीमारीयों से पाक हैं। किसी ने ख़ुदा को बगैर शक्कर वाला क्रिसमस केक भेज दिया और ऊपर से पचास्वीं किश्त की वजह से ख़ुदा अपना सर दीवार से पीटना चाहा फिर फर्मायाः ख़ुदारा अब बस भी कर और ये किश्त काफ़ी से ज़्यादा लम्बी होती जा रही है हमारा दिमाग़ और ना चाट। वल्लाह हम बाकाईदा ख़ुदा हैं इसके बावजूद इन किश्तों पर लाजवाब हैं। हम मे किसी चीज़ की कमी नहीं सिवाए गंजेपन की, दुनिया को जो सर पे उठा रखा था फिर दुनिया को गोल घुमाते हमारा हाथ टूटने को है - दिल चाहता है ये घुमाने का काम किसी और को सोंपदें जिस तरह अफगानिस्तान और ईराक़ मे अज़ाब बर्पा करने का काम हमने अमेरिका को सोंपा था ताकि क़्यामत के दिन हम हिसाब किताब से बच सकें।
ईराक़ मे रोज़ रोज़ यूं बेदर्दी से इंसानों का क़तल होजाना वाकई ख़ुदा ने अपनी आंखों से आंसूं निकालने की कोशिश किया और अपने मेज़बान से शिकायत भी नहीं करसकता। ख़ुद अमेरिका ने पाबंदी लगादी कि इस ख़ून ख़राबे के माहोल मे ख़ुदा का ईराक़ मे ज़ाहिर होना ख़तरनाक होसकता है। यहां तक कि सद्दाम की फांसी का live तक देखने नहीं दिया। फांसी पर लटकने से पहले सद्दाम ने जो आख़िरी कलमा पढा “अमेरिका को ख़ुदा मुबारक” हम भी ख़ुदा बनने निकले थे मगर क्या खबर थी कि ख़ुदा को भी ज़िल्लत की मौत मिले। फंदे से लटकते हुए सद्दाम ने आख़िरी बार ख़ुदा को हिकारत भरी नज़रों से घूराः अमेरिका मे स्कून पाने वाले हे ख़ुदा, आप ऐसे देश मे मेहमान बनकर उतरे हो, देख लेना एक दिन वही आपके कंधे पर बैठ कर कान मे मूतेगा। हमारी बद दुआ है कि ईराक़ की ये चिंगारी पूरी दुनिया को जलाकर राख़ करदे जबकि ख़ुदा की भी यही आरज़ो है।
सद्दाम की मौत पर ख़ुदा ने झूम्ते हुए सीटी बजाकर फर्मायाः दिल करता है नाक से गाना गाएं आंशिंक़ बनायां आंशिंक़ बनायां तूंनें —- वो चला था ख़ुदा बनने मगर हमने अमेरिका की मदद से उसको टपका डाला। फिर भी उसकी हिम्मत देखो कि फांसी के फंदे से लटकते हुए भी दीदे फाड कर घूर रहा था - तौबा हमारा पैजामा गीला होने को था। शुक्र है अमेरिका का, अगर वो ना होता तो आज सद्दाम ख़ुदा की बराब्री तक पहुंच चुका होता। वो एक शेर दिल इंसान था, उसे फांसने के लिए हमने सभी देशों से मदद की भीक मांगी थी। अडोस पडोस ईरान और सिरीया के लिए एक सबक़ है कि हमारे मेज़बान अमेरिका से आंख लडाओगे तो अपना हशर सद्दाम से बुरा देखोगे। ये सब तुम इंसानों की करतूतों की वजह होरहा है - अगर मुख़तलिफ धर्मों मे बटने की बजाए सब एक होते तो आज दुनिया का माहोल बहुत ही ख़ुश्गवार होता जिसकी कोई मिसाल ही नहीं।
ख़ुदा ने कहाः तुम लोग जिस तरह अलग अलग धर्म बनाकर बिखर चुके, हमने भी तै करलिया है कि यूं ही तुम लोगों को लडवा लडवा कर तबाह व बर्बाद करदेंगे। गुज़रे ज़मानों मे ज़मीन हडपने के लिए लडा करते थे और अब तुम सब लोग एक दूसरे को नीचा दिखाने लडते रहोगे जिसका कोई अंत नहीं। इतनी अच्छी अक़ल और सूझ बूझ होने के बावजूद भी तुम लोग ज़ात पात पर विश्वास रखते हो - वल्लाह फिर काहे अक़ल होने के बावजूद पागलों जैसी हरकतें करते हो? तुमहारा पागलपन देख कर दिल चाहता है समुद्र मे इतनी ज़ोर से छलांग मारें कि पिछली सोनामी को अपनी नानी याद आजाए।
छाती पीटते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः हे रब्बा, हमें अपनी मां याद आ रही है। आज वो भी अपने साथ होती तो हमारा कान पकड कर पूछती कि क्या खाक़ इंसान को बनादिया बदतमीज़ कहींका। हमारे पैदा होते ही वो मरचुकी, अगर ज़रा तमीज़ सिखा जाती तो हम इंसान बनाने की इतनी बडी गलती हरगिज़ ना करते। अच्छा हुआ कि आजका ये दौर हमारी मां देख ना पाई वर्ना वो भी तुम इंसानों की हरकतें देख कर रो पडती और हम भी अपनी मां का रोता चेहरा देख कर दहाडें मारते। ख़ुदा ने अपना बडा मूंह खोलकर रोते हुए चिल्लायाः माआं
तुम कहां। हमें दुनिया का वारिस बनाकर अकेला छोड गई, मआं। जान्वरों की देख भाल अपने बाएं हाथ का काम है मगर इंसान बनाकर बहुत भयानक गलती करदी। कुछ अच्छा सोच कर हमने इंसां बनाया था ताकि जान्वरों मे रौनक़ आजाए मगर ये बेशर्म इंसान लाखों जान्वर काट खागए। इतना अच्छा ख़ूबसूरत इंसान बनाया और उसमे ज़बरदस्त अक़ल भरदी और आज इसी अक़ल का इस्तेमाल करते हुए ख़ुदा पर मीज़ाइल मारने को तैयार खडा है - मआं 
आंसूं पोंछ कर ख़ुदा ने फर्मायाः ज़िन्दगी मे पहली बार हम रो पडे, वाक़ई मां को याद करके पत्थर दिल वाला भी रो पडता है। अपने इस बुढापे मे भी मां की गोदी मे सर रखदें तो यूं मेहसूस होता है जैसे हम वापस बचपन की मासूमियत मे खोगए। लोग ख़ाम्ख़ा ख़ुदा से मांगते हैं और ख़ुदा से पूछते हैं। हमसे कोई खाना मांगकर देखे, इन्तेज़ार मे भूका मर जाएगा - अगर यही भूक का इज़हार अपनी मां से करे फिर देखे वो तडप उठेगी और कहीं से भी जुगाड करके तुम्हारा पेट भर देती है। अरे बेवकूफ़ओं, ये मां ही ख़ुदा है - तुम्हारी बीमारी मे पूरी रात जागती है, तुम्हें खाना खिलाने के बाद बचा तो खाती है। तुम्हें चैन से सुलाने के बाद खुद सोती है, तुम्हारे उठने से पहले पानी गरम करती है, तुम्हारे बालों मे कंघा करती है। जिस गाल पर चमाट मारे फिर उसी गाल को चूम लेती है, तुम्हारी बुराईयों को छुपाती है और अच्छे कामों की तरफ उकसाती है, ग़लतीयों को माफ करती है और तुम्हारे ज़रूरतों को अपनी जान जोखम मे डाल कर पूरा करती है। अपने जले-कटे हाथों से वक़्त पर खाना बनाती है - तुम्हारे पूरे आराम का खयाल रखती है। आधी रात को भी पुकारो वो बेक़रार चली आती है, तुम्हारे कान का मेल साफ करती है और तुम्हारा पाख़ाना धोती है फिर गंदी चीज़ों से दूर रखती है। अपने सभी बच्चों को एक ही नज़र से देखती है, तुम्हारी ख़ुशियों और आराम को अपनी ख़ुशी मेहसूस करती है। भीक मांगले या अपना जिसम बेचदे मगर अपने बच्चों को भूका ना छोडे। आओ ऐ अक़ल के अंधे इंसानों ख़ुदा को पूजने कि बजाए अपनी मां की इबादत करो क्योंकि यही सच्ची इबादत है, मां को ख़ुश करके देखो तुम्हारी ज़िन्दगी बदल जाएगी। ख़ुदा से मांगो तो इन्तेज़ार ही करते रह जाओगे, अपनी मां की इबादत करो और जो चाहे मांगलो वो इनकार नहीं करती, वल्लाह हमारा गला सूख गया बगैर फ़ुल स्टाप के इतना लम्बा जो बोल दिया 
ख़ुदा ने अपनी बांहें फैलाकर फर्मायाः लौट आओ इंसानियत की तरफ, मज़हब और ज़ात पात मे कुछ नही रखा - अगर यूं ही धर्म धर्म करते रहोगे तो बडी बडी जंगें देखोगे फिर धर्ती पर कभी ना रुकने वाली तबाहियां होंगी, धर्म और ज़ात पात के झगडे दुनिया को खाक़ मे मिलादेंगी अब तक तो यही होता आरहा है और आज भी यही माहोल है। छोडो वो कल की बातें, ये जहां तुम्हारा है आपस मे मिलकर इसे और ख़ूब सजाओ एकदूसरे मे प्यार और दोस्ती बढाओ। दिमाग़ से अपनी धार्मिक सोच निकालो - तुम लोगों के दिलों मे जो एक-दूसरे के लिए नफरत है यही धर्म है। अब भला बताओ हे अक़ल के अंधों इस नफरत को धर्म क्यों कहते हो??? पता नहीं तुम्हारे पुर्खों ने ये धर्म और ज़ात पात क्योंकर बना गए जो तुम्हें ज़मानों से लडवा रही हैं फिर भी तुम्हें इसकी समझ नहीं आई दिलों मे बराबर नफरत पाल रहे हो और बातें बडी बडी करते हो।
ख़ुदा को ख़ुदा की पनाह - यक़ीन करें अगर हमें इंसानों जैसी सोच होती तो हम अपने ख़ुदा होने पर कोसते, तुम इंसानों के कारनामों को देख कर हमें अपने ख़ुदा होने पर अफसोस है। कई ज़मानों बाद बस यूं ही दुनिया देखने धर्ती पर उतर आए, सारा जहां झक मारा फिर अमेरिका मे रहना पसंद फर्माया क्योंकि यहां दुनिया के सभी कौम के लोग रहते हैं। तुम भी अपने देशों को ऐसा बनाओ कि जहां हर किसम के नहीं बल्कि सिर्फ एक ही किसम के इंसान हों जिनका दीन-धर्म सिर्फ इंसानियत हो सब मिलकर एक हों फिर देखो तुम इतने ताक़त्वर होजाओगे कि अमेरिका तुम्हारी उंगलियों पर होगा। तुम सबके एक होने मे सबसे बडा प्राब्लम तुम्हारा धर्म है - तुम्हारे धार्मिक विचार और सोच तुम्हें एक होने नहीं देते हालांकि जितनी भी बडी बडी अमन की बातें करलो मगर तुम्हारे अंदर नफरत की आग सुलगती रहेगी। इसकी मां की ——- ये पचासवी किश्त बहुत लम्बी होगई। वल्लाह, देखो धर्ती पर आकर हमारी ज़ुबान भी घटिया होगई। इतना लम्बा लम्बा बोलकर हम थक चुके, अरे कोई वो भुना गोश्त फिर से लादो - खाने के बाद वल्लाह हम फिर से सोना चाहते हैं - - जारी
बाक़ी फ़िर कभी
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