[ ये ख़ुदा है - 51 ]
फ़ितने फ़साद और जलसे जुलूसों का महान राष्ट्र फ़िलिस्तीन के ताज़ा हालात पर ख़ुदा ने फ़िलिस्तीनीयों से फर्मायाः वल्लाह सदख़े जाऊँ तुम्हारी निशाना बाज़ी पर क्या कमाल का पत्थराओ करते हो। तौबा क्या जिगर पाया है आत्माघाती हमला करते हो फिर ग़म या ख़ुशी मे आसमान की ओर गोलीयां चलाते हो। हे बहादुर जंग्जू क़ौम एक बात बताओ जब दुनिया भर से तुम्हें इतना सारा पैसा चंदे ख़ैरात से मिलता है, बैठ कर आराम करने की बजाए क्यों अपनी जानें जोखम मे डाल रहे हो? तुम्हारे लिए हम क्या ख़ाक़ नसीहत करें, तुम लोगों का दिमाग़ इतना गर्म रहता है कि हम समझा भी नहीं सकते। तौबा, ये ख़ून ख़राबे की विरासत कहां से पाए हो, हमारे नाम का नारा लगाने वाले हे पत्थर फेंक क़ौम के लोगों ख़ुदा से दुश्मनी रखो मगर ख़ुदा के वासते अपने पडोसीयों के साथ अच्छा बरताऊ करो। अगर तुम सही होते तो आज इसराईल से ज़्यादा ताक़त्वर होते, तुम सब अगर एक-जुठ होते तो इसराईल का नाम व निशान ना होता। तुम्हारी कमज़ोरी ये भी है कि तुम सब एक बात पर कायम नहीं रह सकते जब देखो ख़ून मे लतपत ख़ुदाई नारे लगाते फिरते हो। अपने पडोसी देश से छेडछाड को जिहाद का नाम देते हो और ख़ुद आपस मे ऐसे लडते हो जैसे लंगर लूटते हो। तुम्हारी शुरूआत भी ख़ूनख्वार फसाद पर था, देख लेना तुम्हारा अंत भी ज़बर्दस्त फसाद पर होगा। देखो सुधर जाओ, ये जिहाद जिहाद जिहाद का नारा लगाकर आख़िर तुम्हारा ही तो नुक़सान होता आ रहा है फिर भी तुम लोगों ने सोचा नहीं कि ये काहेका जिहाद है? ख़ुद अपने पैरों पर कुल्हाडी मार रहे हो और दर्द से चिल्लाए फिरते हो। चारों ओर से तुम घिर चुके हो फिर भी तुम्हारी शान देखो कि सीना ताने टेंकों के आगे खडे हो। इस से पहले कि तुम्हारे लिए चंदा खैरात बंद करदें सुधर जाओ। छोटी छोटी बातों से क्योंकर बाक़ी दुनिया वालों को परेशान कर रहे हो। अख़बार वाले भी तंग आचुके तुम्हारे ख़ून ख़राबों से, अब अंदर के पन्नों पर भी तुम्हारी ख़बरें छापने से बेज़ार हैं। माना कि इसराईल तुम्हारे लिए सबसे बडा ख़तरा है मगर तुम भी तो इसराईल के लिए ख़तरनाक हो। रोना धोना मातम करना आहें भरना फिर जिहाद जिहाद के नारे लगाने से अच्छा है कि अपने आप को इसराईल से ज़्यादा ताक़त्वर बनकर दिखाओ। फिर देखो हम इसराईल से कहेंगे कि अब अगर हिम्मत है तो फिलिस्तीन से आंख लडाके देखो। मगर तुम फ़िलिस्तीनी पत्थर फेंक कर और आत्माघाती धमाकों से क्या ख़ाक़ जिहाद कर रहे हो? जलसे और जुलूस करवाने के सिवा तुम्हें कुछ आता नहीं। और तुम्हें महनत मज़दूरी करने की भी ज़रूरत नहीं दुनिया भर से खैरात जो पाते हो। आख़िर कब तक तुकडों पर पलते रहोगे, ज़रा तुम भी किसी की मदद करके देखो फिर जानो कि खैरात क्या होती है। अपने पुर्ख़ों की जहालत पर तुम भी जाहिल बने रहे मगर ख़ुदा के लिए अपनी आने वाली नसलों मे ये नफरत भरी चिंगारीयां वर्से मे ना देकर जाओ। ख़ुदा ने फर्माया अगर हम फ़िलिस्तीनी होते तो इसराईल की दीवर पर चढ़कर बोलतेः हे इसराईली हमारा और तुम्हारा बाप एक ख़ुदा है, तू यहूदी है तो आख़िर इन्सान है और मैं फ़िलिस्तीनी फिर भी हूं तो इन्सान। आ तेरी इस बनाई दीवार को हम मिलकर तोडदें। आ मिलजा गले, वर्षों के इस ज़ात-पात के फसाद को पल भर मे ख़तम करदें। हम ने एक दूसरे का बहुत ख़ून बहाया, वर्षों की दुश्मनी की वजह से हम ने एक दूसरे के मासूम बच्चों को भी नहीं बख़्शा। अगर आज हम एक ना हुए तो हमारी आने वाली पीढी यूं ही एक दूसरे का ख़ून करती रहेगी। आ मेरे इसराईली भाई मुझ फ़िलिस्तीनी को अपना भाई मान कर गले लगाले। इतनी ऊंची दीवार पर चढ़ तो आए मगर अब कैसे उतरें? जम्प मारूं तो मुझे अपनी गोदी मे उठाले। जारी
बाक़ी फ़िर कभी
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