[ ये ख़ुदा है - 53 ]

बेरंग ख़बरों से तंग अख़बार मरोड कर फेंकने के बाद ख़ुदा बडबडायाः आआख़… सारे के सारे अख़बार छेद हैं, हमारी कोई ख़बर ही नहीं कल रात बाथरूम मे जो फिसले वल्लाह किसी को कानोंकान ख़बर नहीं। पिछले माह जब ज़बर्दस्त बर्फबारी चली तो पूरा न्यूयार्क ख़ुदा पर ताने मार रहा था जैसा कि हम आग जलाए हाथ सेंख रहे हैं, अरे बेव्कूफों हम भी तो थरथर कांप रहे थे। ख़ुदा से पूछाः अख़बार फेंकने के बाद अब आप क्यों कांप रहे हैं? तुरंत ख़ुदा फर्मायाः मियां, हम कांप नहीं रहे बल्कि ख़ुशी मना रहें हैं अख़बार की इस ख़बर पर कि समझोता एक्सप्रेस मे हम सवार नहीं थे वर्ना आज तुम सभी को ख़ुदा के बगैर जीना पडता। फिर फर्मायाः ख़ुदा का शुक्र है कि हम ट्रेनों और जहाज़ों मे यात्रा नहीं करते, हम तो ख़ुदा हैं धुवां बनकर कहीं भी गायब होजाएंगे। ख़ुदा से कहाः अच्छाजी, आप तो बच गए अब चल कर उन मरने वालों के रिश्तदारों से हमदर्दी जितालें ताकि आपके ख़ुदा होने का कुछ तो स्बूत मिले। ठटरते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः ना बाबा ना, उनकी चीख़वपुकार और आहें सुनते ही हम बेहोश होजाएं। मियां, क्या ज़रूरत थी समझोता पर यात्रा करने की ये जानते हुए भी कि हमेशा से दोनों देशों के किसी भी समझोते पर आतंकवादी नाराज़ रहते हैं - वल्लाह हम ख़ुदा होकर भी ख़ुद आतंकवादीयों से ख़ौफ़ खाते हैं। ख़ुदा को समझायाः ख़ुदारा अपनी ज़ुबान संभालो, यहां हादसा हुआ है दर्जनों लोग टपक चुक रिश्तेदार वावीला मचा रहे हैं और आप हैं कि मज़ाकिया अंदाज़ मे अनापशनाप बोले जा रहे हैं। मूंह बसोरते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः ओह यार, आतंकवादी पर क्या कहा जाए -मानलो आजके दौर मे ये भी एक कला है और बहुत हिम्मत वाला काम है भई। टीवी पर लाईव देख कर हम ख़ुद दंग रह गए, वल्लाह क्या जिगर था हवाई जहाज़ लेकर वर्लड ट्रेट संटर की इमारतों मे घुस पडे। कान खींचकर ख़ुदा को बतायाः अरे आप ख़ुदा हो कि पजामा! आपकी बक्वास भी यहां लाईव चल रही है और आतंकवादीयों को लताडने की बजाए आप उनके कारनामों पर दाद दे रहे हैं? उंगलियां कतरते हुए ख़ुदा ने कहाः हुररर… पहले क्यों नहीं बताया कि ये हमारा लाईव है, फिर कॉलर सीधा करते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः ये आदत से मजबूर आतंकवादी बेचारे जो सिर्फ आतंक मचाने के लिए ‘जिहाद’ की डिग्रियां उठा लाए और फिर ख़ुदा को ख़ुश करने के लिए मासूम लोगों पर बम फेंक कर भाग जाते हैं ताकि जन्नत मे इन्हें स्कून नसीब हो। वल्लाह, मगर हम ऐसा हरगिज़ होने नहीं देंगे… पिछले ज़मानों से आज तक भी किसी आतंकवादी को  आराम की मौत नसीब ना आई, वो हर जगह बेमौत मारे गए और बहुत ही बुरे हाल मे अपनी लाशें छोड गए इसके बाव्जूद फिर भी  अपना आतंक मचाने का कारोबार नहीं छोडा। तौबा कितना मनहूस दिमाग है इन आतंकवादीयों का - जब देखो मासूम जनता से बदला लेकर जिहाद समझते हो और ख़ुद आख़िरकार कुत्ते से बुरी मौत मारे जाते हो!!! ये बक्वास नहीं, हमारी बात अगर बक्वास लगे तो ख़ुद सोचो कि ये ‘जिहाद’ का नारा कब काम्याब रहा? जहां कहीं भी ये नारा लगाया ख़ुद मूंह की खानी पडी। आप मारो तो जिहाद और कोई आपको मारे तो ज़ुल्म! ये कहां का इंसाफ है? ख़ुदा को याद दिलायाः ये भाषण का समय नहीं है, दोनों देशों मे इस वक़्त ग़म का पहाड टूटा है, कुछ तो अमनवअमान की मीठी बातें बोलो जैसा कि आप दिलासा दे रहे हो ऐसी घटनाएं आईंदा नहीं होंगी। खंकारने के बाद ख़ुदा ने फर्मायाः देखो भई, समझोता एक्सप्रेस की घटना मे जितने भी लोग मरे उसके ज़िम्मेदार हम ही हैं जैसा कि आप सबका कहना है ज़िन्दगी और मौत ख़ुदा के ही हाथ मे है (ख़ुदा के कान मे कहाः अनापशनाप ना बोलो जूते पडने वाले हैं) दुबारा खंकारते हुए ख़ुदा ने बोलने की कोशिश की फिर चिल्लाते हुए कहाः हम क्या बोलें?? इस घटना पर किसकी मां बेहन को गाली दें?? (दुबारा ख़ुदा के कान मे कहाः अदबवआदाब मे बोलें ये आपका लाईव है) ख़ुदा दहाडाः भाड मे जाए लाईव - अब तक की किस्तों मे हम ने गला फाड फाड के समझाया, ख़ुद की ख़ुदाई का मज़ाक उडालिया, इन किस्तों मे अपने आप पर गालीयां लिखवालीं एक जोकर की तरह हंसाया तुम्हें… ताकी याद दिलाते रहें इंसानियत से हटकर अगर यूं ही धर्मों झगडते रहोगे तो ऐसे ही धमाकों मे मरते रहोगे या फिर किसी दिन ख़ुदा को भी मार कर उसकी मैयत को क़यामत तक दफनाते रहोगे। मुट्ठी मारते होए ख़ुदा ने फर्मायाः अमनवअमान की बातें करने वालों ज़रा ठेरो हम नाडा खोलकर अपना राज़ बतादें - हम ना हिन्दू हैं ना मुस्लमान और ना ही ईसाईः जो भी हैं वल्लाह हम बाकाईदा ख़ुदा हैं। अपने आपको सच्चा मोमिन कहलवाने वाले हे लोगों तुम्हारा कोई ईमान ही नहीं वर्ना क्या ज़रूरत है हिन्दू को काफ़िर और मुस्लमान को आतंकवादी बोलने की? अपने दांत पीसते हुए फर्मायाः कीचड से टेंनिस खेलने वाले गंदे दिमाग के लोगों - पत्ता पत्ता हमारी ख़ुदरत की गवाही देता है, हमारे हुक्म से हवाएं अपना रुख़ बदलती हैं, हर तिंका तिंका हमारे ही वजूद से है अगर हम ना होते तो ये जहां ना होता और ये जहां ना होता तो तुम जैसे घटिया सोच के इंसान ना होते। मगर ख़ुदा को ख़ुदा की कसम, शुक्र मनाते हैं कि हम ख़ुदा हैं, अगर हम इंसान होते तो तुम्हारी ही तरह कंफ्यूज़ रहते कि ये समझोता एक्सप्रेस पर धमाके हिन्दूओं ने किए या मुस्लमानों ने? छाती ठोंक कर ख़ुदा चिल्लायाः अपने वजूद की कसम, हम पूरे यकीन से कहते हैं कि ये धमाके हिन्दू और मुस्लमानों ने मिलकर किए थे जो कि दोनों इंसानियत के दुश्मन हैं। जारी

बाक़ी फिर कभी

This entry was posted on Friday, March 9th, 2007 at 12:13 pm and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

6 comments so far

 1 

शुक्र है, लौट आए, हमें लगा खुदा तुम्हें भी कहीं ले गया. :)

सही कहा इंसानियत के दुश्मन खुन बहाते है.

March 9th, 2007 at 1:29 pm
 2 

सही लौटे-बढ़िया रहा. :)

March 9th, 2007 at 5:57 pm
 3 

बढ़िया लिखा-छाती ठोंक कर ख़ुदा चिल्लायाः अपने वजूद की कसम, हम पूरे यकीन से कहते हैं कि ये धमाके हिन्दू और मुस्लमानों ने मिलकर किए थे जो कि दोनों इंसानियत के दुश्मन हैं।

March 9th, 2007 at 7:39 pm
 4 

Shoaib bhai, please write in paragraphs!

March 10th, 2007 at 5:20 am
 5 

ऊपर आशीष जी की तरह मेरा भी अनुरोध है कि पैराग्राफ में लिखें।

खुदा की ये बात काश खुदा के नाम पर दहशत फैलाने वाले समझ जाते।

March 10th, 2007 at 8:28 am
 6 

वाह क्या लिखा है बधाई

March 10th, 2007 at 10:02 am

One Trackback/Ping

  1. शुऐब » मैदान मे ख़ुदा    Mar 20 2007 / 6pm:

    [...] ख़ुदा की अनापशनाप बक्वास से तंग, स्क्यूरिटी गार्डस ने उसे उठाकर मैदान से बाहर करदिया। और यहां मीडिया वालों ने ख़ुदा को घेरे मे लेकर बॉब वूल्मर की अचानक मौत पर प्रश्नों की बोछाड करदी। ख़ुदा ने कहाः अरे यारों, बॉब वूल्मर मरा नहीं बल्कि उसे मार — दिया — गय — ह - - - - - - - सामने किसी ने ख़ुदा के मूंह पर हाथ रख दिया - - - - - और कान मरोड कर ख़ुदा से कहाः क्या अनापशनाप बक रहे हो? आपको राज़ बताने का बडा शौक़ है - अभी पिछली किस्त मे आपने अपना नाडा भी खोल दिया था। शर्मिंद्गी छुपाते हुए ख़ुदा ने दुबारा मीडिया वालों से कहाः पहले पोस्ट मार्टम होने दें तभी कुछ कहा जासकता है - आप मीडिया वाले दो दिन बाद हमारे पास आना जवाब के लिए। अब हम बंगलादेश जाना चाहते हैं ताकि उन्हें मुबारकबादी दे आएं। हमारे लिए हवाई बघ्घी तयार की जाए क्योंकि आजकल हवाई जहाज़ मे जाना भी जानलेवा खतरा है। [...]

Leave a reply

Name (*)
Mail (will not be published) (*)
URI
Comment