[ ये ख़ुदा है - 56 ]
अपने आप पर परफ्यूम छिडकते हुए ख़ुदा गुनगुनायाः दिल तो पागल है, दिल दीवाना है… फिर पूछाः मियां, इस वक़्त माधोरी दिक्षत किस हाल मे होगी? उसे पर्दे पर देखे ज़माना हुआ। और ये जितेन्द्र, धर्म गर्म वगैरों की कुछ ख़बबर तक नहीं। वाह उनकी अदाकारीयों मे ग़ज़ब का नशा होता था। वल्लाह, हमने नियत करली है कि मुंबई पहुंचते ही सबसे पहले बॉलिवूड जाएंगे और उन सभी स्टारों से मिलकर फ़ैज़ पाएंगे जिनके हम फेन थे। ख़ुदा ने पुरजोश होकर फर्मायाः आख़िरकार वो शुभ घडी आगई, हमारा भारत जाना नसीब हुआ।
ख़ुदा पर मुबारकबादीयों की बोछाड शुरू हुई, उसके भारत जाने की मुराद पूरी हुई। अपने लिए खास तौर पर कोलहापूर से चप्पल भी मंगावा लिए थे, अब ख़ुदा भी क्या याद रख्खे उसके भारत जाने का ख्वाब सच साबित होने को आया। बालों मे कंघा, आंखों मे सुर्मा, गले मे फूलों का माला सबने ख़ुदा को अलविदा कहाः अपना ख़याल रखना और ताज महल के रूबरू अपना फोटो ज़रूर खिंचवाना, गांधीजी की समाधी पर गुलाबों की चादर बिछाना हरगिज़ ना भूलना। आज एक ऐसे देश की तरफ ख़ुदा ने परवाज़ किया जहां तीन सौ से ज़्यादा बोलीयां हैं, दर्जनों धर्म, सैंक्डों ज़ात के हर रंग मे लोग ज़िन्दा हैं।
धर्ती और आसमां के बीच हवा मे झूमते हुए ख़ुदा ने ऊंची आवाज़ मे कहाः हे सरज़मीने हिन्दुस्तां के लोगों सलाम और नमस्ते। उम्मीद है तुम भारतीयों ने हमें पहचान लिया, जी हां - हम ख़ुदा हैं, इस सारे जहां के एक अकेले बादशाह। अपके दिलों मे हलचल मचाने वाले, तुम्हें नौ महीनों तक पेट मे ज़िन्दा सलामत रखने वाले, तुम्हें भूक और प्यास का ऐहसास दिलाने वाले, तुम्हारी ज़िन्दगी और मौत के मालिक, हवाओं का रुख़ बदलने वाले, रात और दिन बनाने वाले… वल्लाह हम ही ख़ुदा हैं देखलो आज तुम भारतीयों के आगे हवा मे लटके हुए हैं, अगर इजाज़त हो तो चंद दिनों हम भारत के मेहमान हैं और साथ मे अमेरिका से सिफ़ारिशनामा भी साथ लाए हैं।
अपनी कमर पर हाथ रखे फर्मायाः हे भारत की बिखरी ज़ातों, ज़मानों से जिसका तुम्हें इन्तेज़ार था, जिसकी इबादतों और पूजापाट करते तुम नहीं थके, जिसके लिए ख़ूनआलूद दंगा फ़साद मचाते थे, जिसके लिए एक-दूसरे की इबादतगाहों पर पत्थराओ करते थे - हां हम वही हैं चाहो भगवान, ख़ुदा ईश्वर ईसा समझलो - इस सारे जहां के मालिक हम ही हैं। पत्थरों को पूजने वालों, मन्दिरों मे घंटीयां बजाने वालों, गिर्जाघरों मे घुटने टिकाने वालों, मसजिदों मे सज्दे करने वालों और हवा मे ख़ाली ख़ाली घूरने वालों…. आज तुम्हारा ईश्वर तुम्हारे आगे हवा मे लटका हुआ है। हमें बडी तमन्ना थी कि भारत की इन बिखरी ज़ातों को देखलें, वल्लाह आज हमारी ये हसरत पूरी हुई।
मुस्कुराते हुए फर्मायाः क्या सोच रहे हो…. यही कि हम हिन्दू हैं कि मुस्लमान या इसाई या पार्सी या फिर सर्दारजी….. हे अफसोस कि क्या बताएं हम इनमे से कुछ नहीं। मगर बेशक बाक़ाईदा ख़ुदा हैं…. चाहो आज़मालो - चांद को धर्ती पे उतारदें, सूरज की रौशनी ख़तम करदें, समुद्र का पानी ख़ाली करदें या फिर इस दुनिया को ही मिटादें? हम ईश्वर हैं कुछ भी कर सकते हैं। तुम बिखरी ज़ातों के किस्से सुनकर बडा मज़ा आया, तुम्हारी दासतानें भी दिलचस्प हैं और तुम्हारा कल्चर ख़ुद एक अजूबा है…. क्यों अपना मूंह फुला कर देख रहे हो? ख़ुदा तो हाज़िर है अब किस चीज़ का इन्तेज़ार है?
मीडिया वालों की तरफ़ इशारा करते हुए फर्मायाः भला हो इन लोगों का जो इस वक़्त भी अपनी ड्यूटी पर क़ायम हैं। भिकारीयों की तरफ देख कर कहाः इन लोगों का भी भला हो जो यहां भी भीक मांगने मे मगन हैं। उन खिलोने बेचने वालों और आइसक्रीम बेचने वालों का भी भला हो कि जहां पब्लिक देखा अपनी आवाज़ें लगाना शुरू करदीं।….. ओह भारत वासीयों, ज़रा टहरो….. ख़ुदा आया है, ये कोई जलसा नहीं, अभी हम धर्ती पे उतरे नहीं कि इतने सारे लोग जमा हो गए। आदमी पे आदमी खडा है, पता नहीं ख़ुदा को देखने की तमन्ना है या उसतक पहुंचने की?
कश्मीर से कन्यिकुमारी तक गुजरात से बंगाल तक, वल्लाह सदख़े जाऊँ तुम्हारी इस अनोखी तहज़ीब पर। हमें पता था कि तुम्हारे यहां ख़ुदाओं की कोई कमी नहीं, मगर हम सभी ख़ुदाओं के ख़ुदा हैं ईश्वर पर्मेश्वर दाता आक़ा हम ही हैं।…… हमारे नाम पे तबलीग़ करने वालों, हमारी शकल पर मूर्तीयां बनाने वालों, हमारे नाम से फ़त्वे छापने वालों, हमारे नाम पे ज़ात बांटने वालों और इस देश के नेताओं तुम सब ज़रा पहली लाईन मे आजाओ पहले आपसे गुफ़्तगू हो जाए फिर आम जनता की सुनेंगे और अपनी भी बोलेंगे…… मगर पहले हमें धर्ती पे उतरने तो दो, कबसे हवा मे लटके हम ख़ुद बके जा रहे हैं।
सभी भारतीयों ने एक साथ बुलंद आवाज़ मे ख़ुदा से कहाः ख़ुदा को उसके ख़ुदा होने का वासता, ख़बरदार जो इस पाक धर्ती पे अपने क़दम रखा। जाओ जाओ हमें आपकी कोई ज़रूरत नहीं…… इथोपिया जाओ, सौडान जाओ, म्यानुमार जाओ, भोटान जाओ और जाओ ईराक़…. इन देशों को जाने अगर हिम्मत नहीं तो रहो अमेरिका मे मगर ख़ुदारा इस पाक धर्ती पे अपने क़दम ना रखो। हम भारती अपने इस देश के ख़ुद ख़ुदा हैं, यहां इतने ख़ुदा हैं कि हमें किसी भी बाहरी ख़ुदा पर ईमान नहीं।
दो हाथ वाले, चार हाथ वाले, बगैर हाथ वाले और बगैर दिखाई देने वाले, क़बरों मे सोए हुए सूली पर लटके हुए हर किसम के ख़ुदा हमारे देश मे मौजूद हैं। आप जाओ यहां से, हम भारतीयों को किसी दूसरे ख़ुदा की ज़रूरत नहीं। हम भारती ख़ुद ख़ुदा हैं ख़ुद क़यामत मचाते हैं, ख़ुद लुटेरे हैं, ख़ुद फितनेबाज़ भी हैं, ख़ुद दंगा फसाद मचाते हैं, अपने फैसले हम ख़ुद करते हैं। हम भारती हैं अपनी मर्ज़ी के राजा हैं - आप जाओ यहां से, हमारा किसी भी ख़ुदा पर ईमान नहीं।
ख़ुदा बनने के लिए हमारे भारत देश मे अमीरों को भी हक़ है ग़रीबरों को भी, किसानों को भी, धोकाबाज़ों को भी, चोर डाकोओं को भी, यतीमों को भी और विधवाओं को भी - यहां हर कोई ख़ुदा बनसकता है। हम भारती हैं, अच्छे भी हैं और बुरे भी, सब एक दूसरे के दुश्मन भी और दोस्त भी - आपस मे लडते हैं फिर गले भी मिलते हैं, मारते भी हम फिर मरते भी हम, ख़ुद ज़ालिम भी और मज़लूम भी, दूसरों को हम तकलीफ देते हैं और कभी दूसरों से तकलीफ को सहते भी हैं, ख़ुद सज़ा पाते हैं और कभी हम ख़ुद सज़ा देते हैं। क़ानून हमारा और क़ानून बनाने वाले हम ही हैं। जैसे तैसे भी हैं हम भारती एक और अनोख हैं। और अपने देश के ख़ुद ख़ुदा हैं।
ख़ुदा ने झिल्लाकर चिंघाडाः कमबख़्त भारतीयों, हम ख़ुदा हैं - अभी भारत मे अपना क़दम नहीं रखा कि हमें भगाने की बात करते हो? ये सारा जहां हमारा है हम कुछ भी करसकते हैं। बहुत ज़माना हुआ हम अपने बनाए इंसानों को देखने धर्ती पे उतर आए। और ये तो ख़ुशी की बात है कि अमेरिका ने हमें अपना सरकारी मेहमान बनालिया, बाक़ी सारी दुनिया बेक़रार है कि ख़ुदा की एक झलक देखले और तुम भारतीयों से ये उम्मीद नहीं थी कि हम यहां आए आध घंटा हुआ ख़ुदा को हवा मे ही रोक दिया?? और यहीं से हमें भगाने की बात करते हो।
और चिंघाडते हुए फर्मायाः ताजुब है कि यूं बिखरी ज़ातें आज एक होकर ख़ुदा को भगाने की बात करते हो!! अरे नालायकों भूल गए? हमारे ही वासते तुम आपस मे लडते थे, मन्दिरों मसजिदों पर हमले करते थे, छोटी छोटी बात पर हमारे नाम के नारे जपते थे?…… आज तुम्हें क्या हो गया कि सब एक होकर ख़ुदा के ही ख़िलाफ आवाज़ उठा रहे हो?? हम तुम्हें समझाने आए थे कि छोडो ये ज़ातबाज़ी - सब एक होकर अमन से रहो….. मगर अचानक सब उलटा हो गया, हैरत हुई कि हमारे आने से पहले तुम सब एक होकर हमारे ही ख़िलाफ ख़डे हो गए!!! ये क्या सिस्टम है तुम्हारा जो हमारी समझ से बाहर है। हमने ऐसा क्या बोल दिया कि तुम्हारे मे अचानक इतिहाद आगया बिखरी ज़ातें सब एक जुट हो गए??
अपनी खोपड़ी खुजाते हुए फर्मायाः ठीक है, यूं ही आंखें फाडे देखते रहोगे कि धर्ती पे उतरने की इजाज़त भी दोगे? तौबा, कबसे हवा मे लटके हुए हैं पाजामा का नाडा भी ढीला होने को आया। कैसी बद्तमीज़ कौम हो ख़ुदा को हवा मे लटका देख रहे हो!! यकीन करो कि हम तुम्हारे ख़ुदा हैं, तुम्हारे पालनहार। अब तो इस धर्ती पे क़दम रखने दो….. हे देढ सौ करोड की आबादीयों!! जिसे तुम अपने दिलों मे याद करते हो, जिसकी ख़ुशी के लिए रात को उठकर पूजापाठ करते हो, जिसके डर से तुम तौबा करते हो, जिसे तुम भलाई करके हम पर ऐहसान समझते हो, जिसकी तबलीग़ मे रात दिन झक मारते हो……. वल्लाह हम वही ख़ुदा हैं जिसका नाम लेकर तुम दूसरों को डराते हो, ख़ुदा का नाम लेकर लोगों को धर्मों मे बांटते हो, जिसकी क़यामत का तुम इन्तेज़ार करते हो - अपनी दुआओं मे जिससे मालवदौलत की उम्मीदें लगाए बैठे हो….. हां हम ही वो ख़ुदा-ईश्वर हैं जो इस वक़्त हवा मे अटके हैं।
सभी भारतीयों ने एकसाथ मिलकर कहाः बस बहुत हो गया, अब हमारी धर्ती पे किसी को ख़ुदागिरी करने का चांस नहीं। ज़मानों से हम धर्मगिरी की ज़ंजीरों से जकडे हुए थे, अब जाके थोडा स्कून आया हमारे बच्चों मे कुछ नया विचार आया। हम अपनी बरबादी के ख़ुद ज़िम्मेदार थे, यहां के दंगा फसादों मे ख़ुद शामिल थे, इंसानियत के नारे लगाते तो थे लेकिन धर्म की तल्वार के साये मे थे। अब हमारे बच्चों का ज़माना है, उनके विचारों मे नई रौशनी आई है पूरा भारत अब इन्ही के हाथों मे है। आज हम भारतीयों को ऐहसास हुआ की सच्ची आज़ादी क्या है, साठ वर्ष पहले आज़ाद हुए भी तो दंगा फसाद की नज़र हुए। लेकिन आज हम पूरी तरह आज़ाद हैं और पूरी आज़ादी से सांस ले रहे हैं। ये सच है कि हम अपनों को मार रहे हैं और अपनों से मार भी खा रहे हैं मगर कभी किसी विदेशी को छेडा नहीं और मदद के लिए किसी बाहर वाले को पुकारा नहीं। हम ख़ुद्दार भारती हैं भले ग़रीब हैं छीन कर खाते हैं और मिलबांट कर भी खाते हैं - जो भी हो सब अपने आपमे हैं। कभी किसी बाहरी देश से आस नहीं लगाई, अपनी ग़रीबी के बाव्जूद ग़ैरों की भी भरपूर मदद की। हम भारती हैं अपने देश के ख़ुद ख़ुदा हैं।
सभी भारतीयों ने ख़ुदा से कहाः चाहो तो इन मौलवियों को उठाले जाओ, पाद्रीयों और साधूओं को भी पकडले जाओ, हमारे नेताओं को भी खींचले जाओ….. इन लोगों ने बहुत फसाद मचाया, हमें आपस मे ख़ूब लडवाया, हमारे घरों को जलाया, हमारे छोटे बच्चों को हमारे सामने काटा - हमारी दुकानों को लूटा - औरतों की इज़्ज़त से अपना मूंह काला किया…… हमें बहुत सताया, धर्म के नाम पर बडी तबाहीयां मचाईं, धर्म के नाम पे डराया हर दिन एक नया फसाद करवाया - हम भारती सच्चे धार्मिक होने के नाते बहुत मुसीबतें झेलनी पडीं - मुस्लमान को अपने पडोसी हिन्दू से डर था और हिन्दू को मुस्लमानों के मुहल्ले से गुज़रना अज़ाब बन गया…..
सभी भारतीयों ने रोते हुए ईश्वर से कहाः ख़ुदा से एक गुज़ारिश है इन मौलवियों, साधूओं और नेताओं को उठाले जाओ और उनके बदले हमारे लिए डाको ही भेजदो - चूंकि डाको हमें सिर्फ लूटते हैं मगर आपस मे नहीं लडवाते।
हम भारती अपने धर्मों से तंग आचुके, जीना हराम हो गया, छुपछुपा कर भागना पडा - बच्चों को दूध के लिए करफ़्यू से गुज़रना पडा। हम भारती ख़ुद अपने भारतीयों से खौफ़ खाने लगे, हर बात पर हम केट्ग्री मे बांट दिए गए, छोटी सी नौकरी के लिए भी हमारी ज़ात का बहाना बना दिया। हम कंफ़्यूज़ हो चुके अपने धर्म पर क़ायम रहें कि देश के कानून पर? बुरी तरह दोनों तरफ से मुसीबतें झेलनी पडीं - समझ मे नहीं आ रहा था कि अपना धर्म छोडें या देश? हमारी ज़िन्दगीयां बरबाद हो गईं सडकों पर सिर्फ दिखावे के लिए इंसानियत के नारे लगाते थे मगर सच तो ये है कि यहां हिन्दू मुस्लमान एक दूसरे के लिए ख़ून के प्यासे थे। हम दुआएं करते ही रहे कि अपने देश मे भलाई हो मगर काहे की भलाई जब्कि हम ख़ुद तबाही मचाते मचाते रहे। जी हां, सारे जग मे हमारा देश एक अजूबा है यहां मुस्लमान को आतंकवाद कहते हैं और हिन्दू को काफ़र बोलते हैं फिर देखलो दोनों एक ही थाली मे खाते हैं।
शुक्र है आज हम भारतीयों के नौजवान बच्चे हर किसम की ज़ंजीरों से आज़ाद हैं - एक आज़ाद देश मे मज़े से सांस ले रहे हैं। और धर्मों की परवाह किए बगैर अपने देश की तरक्की मे सब एकसाथ जुटे हैं। माईक्रोसॉफ्ट, याहू, गूगल पंटागॉन और नासा दुनिया की हर तरक्की मे हमारे भारती बच्चे बराबर शामिल हैं। और आज हमारी नई पीढी के बच्चे शान से सीना तान कर कहते हैं: हम भारती हैं - कोई धर्म हमारे देश से बडा नहीं - और हम ना हिन्दू हैं ना मुस्लमान बल्कि अपने देश के ख़ुद ख़ुदा हैं।
भारतीयों की बात पर ख़ुदा ने रो कर कहाः अरे बस भी करो हमे और ना रुलाओ - तुम भारतीयों की अज़मत को इस ख़ुदा का स्लाम जो इस सारे जहां का मालिक है। जारी
बाक़ी फिर कभी
[...] ख़ुदा को भारत देखने का शौक चर्राया और वे निकल पड़े इधर की ओर. पर उन्हें भारतीयों ने हवा में ही रोक दिया है. नीचे उतरने ही नहीं दे रहे. दोनों में झगड़ा चल रहा है. ख़ुदा और हिंदुस्तानियों की गुफ़्तगू शुएब से ही सुनिए. [ख़ुदा ने] अपनी खोपड़ी खुजाते हुए फर्मायाः ठीक है, यूँ ही आँखें फाड़े देखते रहोगे कि धरती पे उतरने की इजाज़त भी दोगे? तौबा, कबसे हवा मे लटके हुए हैं, पाजामा का नाड़ा भी ढीला होने को आया। कैसी बद्तमीज़ कौम हो, ख़ुदा को हवा में लटका देख रहे हो! यकीन करो कि हम तुम्हारे ख़ुदा हैं, तुम्हारे पालनहार। अब तो इस धरती पे क़दम रखने दो… हे डेढ़ सौ करोड की आबादियो! जिसे तुम अपने दिलों मे याद करते हो, जिसकी ख़ुशी के लिए रात को उठकर पूजापाठ करते हो, जिसके डर से तुम तौबा करते हो, जिसे तुम भलाई करके हम पर ऐहसान समझते हो, जिसकी तबलीग़ मे रात दिन झक मारते हो… वल्लाह हम वही ख़ुदा हैं जिसका नाम लेकर तुम दूसरों को डराते हो, ख़ुदा का नाम लेकर लोगों को धर्मों मे बाँटते हो, जिसकी क़यामत का तुम इन्तेज़ार करते हो - अपनी दुआओं मे जिससे माल व दौलत की उम्मीदें लगाए बैठे हो… हाँ हम ही वो ख़ुदा-ईश्वर हैं जो इस वक़्त हवा मे अटके हैं। [...]