[ ये ख़ुदा है - 57 ]
बीच बाज़ार मे खुदा ने एक बच्चे का कान मरोड कर पीटना शुरू करदिया, बच्चे का कसूर सिर्फ इतना कि उसने खुदा को अंकल कहदिया था। अदालत मे जज ने खुदा को अपनी सफाई पेश करने को बोला तो खुदा ने गुस्से मे कहाः अब हम अपनी सफाई मे क्या कहें? बडे तो बडे अब बच्चे भी खुदा की इज़्ज़त नहीं करते, आज हमें अंकल पुकारा कल को मामू बोलकर छेडेगा इसी लिए पीटा था। खुदा ने कहाः आजके बच्चे भी हद करते हैं, राह चलते एक स्कूली बच्चे ने अखबार दिखाकर हमसे पूछाः अंकल आज ईराक़ मे कितने मरे, एक अखबार मे ५० बताया है जब्कि दूसरे मे ५७ लिखा है। खुदा फौरन ईराक़ पहुंच गया, शायद बच्चे का इम्तेहान हो। धमाकों मे बिखरे हुए हाथ पैरों की गिंती हुई तो ५७ मरे थे जब टूटी हुई गर्दनें गिनी तो ४५ थे। खुदा ने झिल्ला कर कहाः यारो, कमसे कम मरने के बाद तो अपनी सही तेदाद बताते जाओ और धमाकों मे मरते भी ऐसे कि पता ही नहीं चलता आखिर कितने मरे! और ये बच्चे भी ऐसे वैसे स्वाल पूछते हैं जैसे हम खुदा नहीं बल्कि हिसाब के मास्टर हों। आखिर मे जज ने खुदा को ये बोलकर छोड दिया कि अपने छोटों पर प्यार करो, उनपर हाथ ना उठाओ।
ग्रीन कार्ड को खुदा ने अपना चुनाऊ निशान बनालिया, घर घर जाकर वादा भी कर दियाः खुदारा खुदा को ही वोट दो और बदले मे अमेरीकन ग्रीन कार्ड पाओ, वहां जाकर ऐश करो, महीलाओं को भी साथ ले जाओ जांच हुई तो उसे अपनी पत्नी साबित करो फिर भी पकडे गए तो अपनी किस्मत जानो मगर खुदा को बदनाम ना करो। नौजवान टोलीयों को खुदा ने अपने साथ लिया, शराब से भरी बोतलें मुफ्त बांटा, गली गली झक मारकर अपने नारे आप लगाया फिर बादाम का दूध पीने के बाद भाषण के लिए तैयार हो गया।
जलसे मे खुदा ने फरमायाः मुलायम और माया दोनों ही अपने, कोई हारे या जीते खुदा को कुछ फर्क नहीं कयोंकि अगले चुनाऊ तक हम जनता को मूंह दिखाने के काबिल नहीं। जनता तो जनता है, बुलाओ तो आए, भगाओ तो भागे, खिलाओ तो खाए, पिलाओ तो पिए, हंसाओ तो हंसे, रुलाओ तो रोए और मारो तो मरे। खुदा ने हैरत का इज़हार कियाः देश मे लाखों पढे लिखे और ईमान्दार लोगों के बावजूद जैल से निले कैदी और सरकारी मुजरिम ही अकसर चुनाऊ मे काम्याब होते हैं - वल्लाह हमे समझ नही आया कि ये कैसे पढे लिखे और ईमानदार लोग हैं जो गुंडों को वोट देकर खुद अपना लीडर बनाते हैं? मगर खुदा तो खुदा है, जिसकी जेब मे पैसा खुदा उसका।
पाकिस्तान के ताज़ा वारदात पर खुदा ने कहाः हमेशा आम जनता का ही नक़सान होता है और ग़रीब बेचारा तो खुद अपना दुश्मन, वो अपनी मौत आप मारा जाता है। मुशर्फ की सुपारी लेने से इनकार करते हुए खुदा ने कहाः आफरीन है पाकिस्तानी अवाम जो अपने राष्ट्रपति के खिलाफ कमर कस कर खडी है - एक देश का राष्ट्रपति अपनी जनता के खिलाफ और जनता अपने राष्ट्रपति के खिलाफ (वाह क्या जोडी है)। पाकिस्तान देश, जिसे इस्लाम के नाम पे मांग कर बनाया था, मगर आज तक वहां किसी भी सरकार ने अपनी जनता को खुश नही रखा। ये पाकिस्तान जो कल तक ज़मीन्दारों, सर्दारों और मुल्लाओं का हुआ करता था मगर अब ये आम जनता का है। लोग रोजी रोटी के लिए दूसरे देशों को भी जाते हैं और फिर वापस अपने देश लौट आते हैं मगर ज्यादातर पाकिस्तानी अपनी सरकारों से तंग विदेशीयों की ज़िन्दगी जी रहे हैं।
बडे गुस्से मे खुदा ने कहाः हम बेवकूफ ठेरे कि शादी से पहले ही अभिषेक और ऐश्वर्या को अपना आशिर्वाद दे दिया इस उम्मीद से कि दावत मिलेगी और इसी बहाने भारत की सैर भी हो जाएगी - मगर अफसोस कि हमें बुलाया नहीं हालांकि शादी कार्ड पर सबसे पहले खुदा का ही नाम लिखा था और शादी के दौरान पंडित ने हमारे ही नाम का मंतर पढा, अमिताभ भी बार बार कह रहे थे कि ये सब भगवान की कृपया से है - मगर भगवान को दावत पे बुलाया नहीं। ये बडे लोग ऐसे ही होते हैं खुदा को भी अपनी जेब मे रखते हैं।
जलसे मे पब्लिक के सामने रोते होए खुदा ने कहाः वल्लाह, आज हम अपना रुमाल भूल आए, कोई हमें रुमाल दे - आंसूं पोंछ कर अभी वापस करदेंगे। दरअसल खुदा को शिल्पा के साथ रिचर्ड गेयर की हरकत पर रोना आया - सिर्फ खुदा को ही नहीं बल्कि कई भारतय नौजवानों ने भी खूब रोया कि ऐसा मौका हमें क्यों नहीं मिला? हम जिसे सपनों मे चाटते थे कोई बाहर से आकर अपने ही सामने चाट गया…… और हम तमाशाई बने रहे - मीडिया वाले भी बार बार वही चुम्मा चाटी को दिखाते थे और हम अपने दांत पीसकर रह जाते कि काश हम रिचर्ड गेयर होते!। खुदा ने रिचर्ड गेयर पर लम्बी लानत भेजते हुए फरमायाः लानत हो गेयर पर जो भारत मे आकर सरे बाज़ार बदनाम हुआ साथ ही कई भारतय नौजवानों का दिल जला गया।
मेहफिल मे खडे होकर खुदा ने सलमान रश्दी को ‘सर’ कह दिया तो मुस्लमान सडकों पे उतर आए कि अलफाज़ वापस लें - एक ऐसे आदमी को खुदा ने ‘सर’ कह दिया जिसे मुसल्मान बिलकुल पसंद नहीं करते। खुदा ने दहाडते हुए कहाः हम भी उसामा बिन लादिन को पसंद नहीं करते जिसे तुम ‘मुजाहिद’ कहते हो। तुम्हारा जो भी आदमी दूसरों को नुकसान दे तो उसे फौरन मुजाहिद (धार्मिक हीरो) कहते हो और कोई दूसरा तुम पर एक लफ्ज़ कहे तो उसे शैतान कहते हो?? हांजी - अच्छा मज़ाक करलेते हो। किसी नामी मुजाहिद ने खुदा को ई-मेल से धमकी भी भेजा कि अगर हिम्मत है तो ऐसी बातें पाकिस्तान मे आकर बोलें - खुदा की कसम खुदा का जनाज़ा निकलेगा। खुदा ने कहाः मियां, हम खुदा चाहते हैं कि किसको नाम दे और किसको बदनाम करे - वल्लाह हम खुदा हैं हर चीज़ पर कादिर हैं।
भारत मे उभरते राष्ट्रपतियों के लिए खुदा ने कहाः इस देश मे हर किसी को राष्ट्रपति बनने का हक है, मगर आज भी चंद देशों मे सिर्फ खानदानी लोग ही कुर्सी के हकदार होते हैं। भारत के मौजुदा महामहिम को दुबारा मौका मिले तो अच्छी बात है, वरना इस कुर्सी के लिए और भी लोग लाईन मे खडे हैं जिनमे कुछ लोग भारत की सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठना चाहते हैं और कुछ मुफ्त मे नाम और पैसा बनाना चाहते हैं और कुछ भारत की तरक्की के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं - ये तो इस देश की आम जनता के हाथों मे है कि किसे अपना राष्ट्रपति बनाए। साथ ही खुदा ने कहाः शुक्र है पहली बार किसी स्त्री का नाम आया है और खुदा के नज़दीक औरत और मर्द दोनों का मुकाम एक है।
बिरयानी का नाम सुनते ही खुदा ने थर थर कांपना शुरू करदिया, हालांकि वो बिरयानी खाने का बहुत शौकीन था। खुदा की ख्वाहिश है कि जब भारत आए तो गुजरात की थाली और हैदराबाद की बिरयानी ज़रूर खाए मगर आज अचानक हैदराबादी बिरयानी का नाम सुनते ही अपने दांत बाहर रख कर कांपना शुरू हो गया। मिडीया के आगे खुदा ने कहाः खुदा का शुक्र है, हमने उस जुम्मे की नमाज़ हैदराबाद की मक्का मसजिद मे नहीं पढा वरना वहां मरने वालों की लिस्ट मे शायद खुदा का भी नाम होता। इबादतख़ानों मे बम धमाके भारतियों के लिए मामूली बात है, आज मसजिद मे बम फटा तो कुछ दिन बाद किसी मंदिर मे धमाका होगा और ये सिलसिला चलता ही रहेगा और धार्मिक लोग खाम्खा ही बेचारे आतंकवादियों पर इल्जाम लगाते रहेंगे हालांकि ये धार्मिक लोग खुद ही एक दूसरे की इबादतगाहों पर हमले करते हैं और कसूरवार बेचारे आतंकवादियों को ठेराते हैं। खुदा ने कहाः तुम धार्मिक लोगों को शर्म नहीं आती मगर एक-दूसरे को शर्मिंदा करना खूब जानते हो - खुदा के वासते सिर्फ एक दिन के लिए खुद अपने से शर्म करके देखो वल्लाह तुम्हारे मे इंसानियत जाग जाएगी। शायद तुम्हें फिर भी शर्म ना आए मगर तुम्हारी हरकतों की वजह से उलटा खुदा खुद शर्मिंदा है।
खुदा ने अपने सारे हाथ जोड कर कहाः तोडो ये मंदिर और मसजिद और उनकी जगह बनाओ नाईट कल्ब और डिस्को फिर सब मिलकर हंसी खुशी नाचो - अगर तुम्हारे मे बेहयाई आजाए शायद कि इंसानियत भी आजए। बातें तो बडी बडी करते हो, गली गली इंसानियत के नारे भी लगाते हो जैसे खुद का सौदा कर रहे हो! पता नहीं किसको धोका दे रहे हो? अगर इंसान नहीं बन सकते तो खामूशी इख्तियार करो मगर दूसरों पर उंगली ना उठाओ - जिसतरह तुमने अपना धर्म बनालिया है, हर एक को हक है कि वो भी अपना धर्म बनाए। खुदा सब देख रहा है, तुम लोगों के विचारों को खूब जानता है और तुम्हारी अजब हरकतों को देख कभी हंसी आती है और गुस्सा भी आता है। वल्लाह हम बाकाईदा खुदा हैं मगर किसी भी धर्म मे नहीं।
खुदा ने एक आम खाया तो जोश मे आकर आमों से भरा टोकरा खागया। अब खुदा को क्या मालूम कि इसतरह हदसे ज़्यादा आम खाने का अंजाम क्या है - बेचारा पूरे तीन दिनों तक अपना पेट पकडे बाथरूम मे फंसा रहा, चौथे दिन हालत कुछ नार्मल हुई तो पूछाः मियां, इतना मज़ेदार फल हमारे स्वर्ग मे क्यों नहीं उगता? खुदा ने हुकम दियाः आजसे आमों को हमारे स्वर्ग इम्पोर्ट किया जाए मगर प्राब्लम ये कि वहां हमारे पास बाथरूम नहीं है। जारी
बाकी फिर कभी
[...] स्वर्ग मे बाथरूम नहीं…. - तॊलिया,इजिचेअर ऒर वेटिंग-रूम [...]
[...] ख़ुदा को याद दिलायाः आपकी बात सच साबित हुई, हैदराबाद मे मक्का मस्जिद घटना के बाद फिर से धमाके हुए जिसमे क़रीब चालीस लोग छांटे गए। ख़ुदा ने अपनी तारीफ़ मे फ़रमायाः मियां, हमारी बात पत्थर पे लकीर है, और ये कोई आख़िरी धमाका नहीं “बम का बदला बम” ये सिलसिला जारी रहेगा लोग यूं ही छेतडे फाडे मरते रहेंगे। वैसे भी भारतीयों के लिए बम धमाके रोज़ का मामूल है (जिस दिन कोई घटना ना हो, ये आश्चर्य की बात है।) ख़ुदा ने ख़ुद के कान मे कहाः अच्छा है ये धार्मिक लोग आपस मे लडते रहें मरते रहें और ख़ुदा का काम आसान करते रहें। ख़ुदा ने आश्चर्यजनक के साथ फरमायाः धर्म की शुरूआत दंगों से हुई, आज भी दंगों पर चल रहे हैं और इसका अंत भयानक दंगों पर होगा। धर्म पर चलने वालों का किस्सा सिर्फ इतना कि ये एकदूसरे से डरकर चलते हैं पता नहीं कौन कब भारी पड जाए। ख़ुदा ने फरमायाः ख़ुदा को अपने ख़ुदा होने की क़सम! हमने तुम इंसानों को थोडी बहुत सूझ बूझ दिए थे मगर तुम लोगों ने एक बार सम्झलिया तो दुबारा सोचने की ज़रूरत ना सम्झा। ख़ुदा की लानत है ऐसी बुद्धियों पर जो सम्झदार होकर भी सोचने से डरते हैं। [...]