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	<title>Comments on: स्वर्ग मे बाथरूम नहीं&#8230;.</title>
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	<description>नई बातें / नई सोच</description>
	<pubDate>Sun, 21 Mar 2010 06:38:26 +0000</pubDate>
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		<title>By: नई बातें / नई सोच &#187; ख़ुदा को नींद आगई</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3336</link>
		<dc:creator>नई बातें / नई सोच &#187; ख़ुदा को नींद आगई</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Sep 2007 05:52:18 +0000</pubDate>
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		<description>[...] ख़ुदा को याद दिलायाः आपकी बात सच साबित हुई, हैदराबाद मे मक्का मस्जिद घटना के बाद फिर से धमाके हुए जिसमे क़रीब चालीस लोग छांटे गए। ख़ुदा ने अपनी तारीफ़ मे फ़रमायाः मियां, हमारी बात पत्थर पे लकीर है, और ये कोई आख़िरी धमाका नहीं &#8220;बम का बदला बम&#8221; ये सिलसिला जारी रहेगा लोग यूं ही छेतडे फाडे मरते रहेंगे। वैसे भी भारतीयों के लिए बम धमाके रोज़ का मामूल है (जिस दिन कोई घटना ना हो, ये आश्चर्य की बात है।) ख़ुदा ने ख़ुद के कान मे कहाः अच्छा है ये धार्मिक लोग आपस मे लडते रहें मरते रहें और ख़ुदा का काम आसान करते रहें। ख़ुदा ने आश्चर्यजनक के साथ फरमायाः धर्म की शुरूआत दंगों से हुई, आज भी दंगों पर चल रहे हैं और इसका अंत भयानक दंगों पर होगा। धर्म पर चलने वालों का किस्सा सिर्फ इतना कि ये एकदूसरे से डरकर चलते हैं पता नहीं कौन कब भारी पड जाए। ख़ुदा ने फरमायाः ख़ुदा को अपने ख़ुदा होने की क़सम! हमने तुम इंसानों को थोडी बहुत सूझ बूझ दिए थे मगर तुम लोगों ने एक बार सम्झलिया तो दुबारा सोचने की ज़रूरत ना सम्झा। ख़ुदा की लानत है ऐसी बुद्धियों पर जो सम्झदार होकर भी सोचने से डरते हैं। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] ख़ुदा को याद दिलायाः आपकी बात सच साबित हुई, हैदराबाद मे मक्का मस्जिद घटना के बाद फिर से धमाके हुए जिसमे क़रीब चालीस लोग छांटे गए। ख़ुदा ने अपनी तारीफ़ मे फ़रमायाः मियां, हमारी बात पत्थर पे लकीर है, और ये कोई आख़िरी धमाका नहीं &#8220;बम का बदला बम&#8221; ये सिलसिला जारी रहेगा लोग यूं ही छेतडे फाडे मरते रहेंगे। वैसे भी भारतीयों के लिए बम धमाके रोज़ का मामूल है (जिस दिन कोई घटना ना हो, ये आश्चर्य की बात है।) ख़ुदा ने ख़ुद के कान मे कहाः अच्छा है ये धार्मिक लोग आपस मे लडते रहें मरते रहें और ख़ुदा का काम आसान करते रहें। ख़ुदा ने आश्चर्यजनक के साथ फरमायाः धर्म की शुरूआत दंगों से हुई, आज भी दंगों पर चल रहे हैं और इसका अंत भयानक दंगों पर होगा। धर्म पर चलने वालों का किस्सा सिर्फ इतना कि ये एकदूसरे से डरकर चलते हैं पता नहीं कौन कब भारी पड जाए। ख़ुदा ने फरमायाः ख़ुदा को अपने ख़ुदा होने की क़सम! हमने तुम इंसानों को थोडी बहुत सूझ बूझ दिए थे मगर तुम लोगों ने एक बार सम्झलिया तो दुबारा सोचने की ज़रूरत ना सम्झा। ख़ुदा की लानत है ऐसी बुद्धियों पर जो सम्झदार होकर भी सोचने से डरते हैं। [...]</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: उन्मुक्त</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3328</link>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Sep 2007 02:40:38 +0000</pubDate>
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		<description>आपकी ११ सितम्बर की सबसे नयी चिट्ठी नहीं खुल रही है। पासवर्ड मांगती है। क्या उसे पासवर्ड से सुरक्षित कर दिया है या फिर कोई और बात है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपकी ११ सितम्बर की सबसे नयी चिट्ठी नहीं खुल रही है। पासवर्ड मांगती है। क्या उसे पासवर्ड से सुरक्षित कर दिया है या फिर कोई और बात है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3177</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Jul 2007 03:59:24 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;b&gt;@  9.समीर लाल
@ 10.सागर चन्द नाहर 
@  11.प्रभात टन्डन
@  12.श्रीश शर्मा&lt;/b&gt;
लेख पसंद करने के लिए शुक्रिया आप सभी का। समीर जी, आम खाने का मौसम है तो बाथरूम भी आना जाना रहता है :) डाक्टर साहब, इरादे तो नेक ही हैं मगर वक़्त नहीं मिलता। सागर भाई और श्रीष भाई, ये लेख तकरीबन एक महीने से लिख रहा हूं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><b>@  9.समीर लाल<br />
@ 10.सागर चन्द नाहर<br />
@  11.प्रभात टन्डन<br />
@  12.श्रीश शर्मा</b><br />
लेख पसंद करने के लिए शुक्रिया आप सभी का। समीर जी, आम खाने का मौसम है तो बाथरूम भी आना जाना रहता है <img src='http://www.shuaib.in/chittha/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> डाक्टर साहब, इरादे तो नेक ही हैं मगर वक़्त नहीं मिलता। सागर भाई और श्रीष भाई, ये लेख तकरीबन एक महीने से लिख रहा हूं।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: श्रीश शर्मा</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3176</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Jul 2007 16:25:26 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3176</guid>
		<description>बहुत दिनों बाद लिखा लेकिन खूब लिखा।

&lt;blockquote&gt;खुदा ने अपने सारे हाथ जोड कर कहाः तोडो ये मंदिर और मसजिद और उनकी जगह बनाओ नाईट कल्ब और डिस्को फिर सब मिलकर हंसी खुशी नाचो।&lt;/blockquote&gt;
शब्दार्थ को न देखकर भावार्थ को देखें तो मालूम पड़ता है कितनी गहरी बात कह गए आप।

&lt;blockquote&gt;खुदा ने हुकम दियाः आजसे आमों को हमारे स्वर्ग इम्पोर्ट किया जाए मगर प्राब्लम ये कि वहां हमारे पास बाथरूम नहीं है।&lt;/blockquote&gt;

बेचारा खुदा! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत दिनों बाद लिखा लेकिन खूब लिखा।</p>
<blockquote><p>खुदा ने अपने सारे हाथ जोड कर कहाः तोडो ये मंदिर और मसजिद और उनकी जगह बनाओ नाईट कल्ब और डिस्को फिर सब मिलकर हंसी खुशी नाचो।</p></blockquote>
<p>शब्दार्थ को न देखकर भावार्थ को देखें तो मालूम पड़ता है कितनी गहरी बात कह गए आप।</p>
<blockquote><p>खुदा ने हुकम दियाः आजसे आमों को हमारे स्वर्ग इम्पोर्ट किया जाए मगर प्राब्लम ये कि वहां हमारे पास बाथरूम नहीं है।</p></blockquote>
<p>बेचारा खुदा! <img src='http://www.shuaib.in/chittha/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: प्रभात टन्डन</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3175</link>
		<dc:creator>प्रभात टन्डन</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Jul 2007 13:17:57 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3175</guid>
		<description>हमेशा की तरह बहुत बढिया !बहुत दिन बाद दिखे , कोई शुभ इरादा तो नही है :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हमेशा की तरह बहुत बढिया !बहुत दिन बाद दिखे , कोई शुभ इरादा तो नही है <img src='http://www.shuaib.in/chittha/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: सागर चन्द नाहर</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3174</link>
		<dc:creator>सागर चन्द नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Jul 2007 16:40:55 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3174</guid>
		<description>आपके लिखे के तो हमेशा से ही मुरीद रहे हैं, आप  लिखते ही ऐसा हैं। :)
 यह पंक्तियाँ बहुत पसन्द आई-
&lt;b&gt;खुदा ने अपने सारे हाथ जोड कर कहाः तोडो ये मंदिर और मसजिद और उनकी जगह बनाओ नाईट कल्ब और डिस्को फिर सब मिलकर हंसी खुशी नाचो - अगर तुम्हारे मे बेहयाई आजाए शायद कि इंसानियत भी आजए। &lt;/b&gt;

कभी कभी खुदा कुछ ज्यादा ही समजदार हो जाते हैं जब इस तरह की बातें करने लगते हैं, क्या अमरिका की मेहमाननवाजी  की खुमारी अभी उतरी नहीं?

&lt;b&gt;बातें तो बडी बडी करते हो, गली गली इंसानियत के नारे भी लगाते हो जैसे खुद का सौदा कर रहे हो! पता नहीं किसको धोका दे रहे हो? अगर इंसान नहीं बन सकते तो खामूशी इख्तियार करो मगर दूसरों पर उंगली ना उठाओ - जिसतरह तुमने अपना धर्म बनालिया है, हर एक को हक है कि वो भी अपना धर्म बनाए। खुदा सब देख रहा है, तुम लोगों के विचारों को खूब जानता है और तुम्हारी अजब हरकतों को देख कभी हंसी आती है और गुस्सा भी आता है। वल्लाह हम बाकाईदा खुदा हैं मगर किसी भी धर्म मे नहीं।
&lt;/b&gt;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपके लिखे के तो हमेशा से ही मुरीद रहे हैं, आप  लिखते ही ऐसा हैं। <img src='http://www.shuaib.in/chittha/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /><br />
 यह पंक्तियाँ बहुत पसन्द आई-<br />
<b>खुदा ने अपने सारे हाथ जोड कर कहाः तोडो ये मंदिर और मसजिद और उनकी जगह बनाओ नाईट कल्ब और डिस्को फिर सब मिलकर हंसी खुशी नाचो - अगर तुम्हारे मे बेहयाई आजाए शायद कि इंसानियत भी आजए। </b></p>
<p>कभी कभी खुदा कुछ ज्यादा ही समजदार हो जाते हैं जब इस तरह की बातें करने लगते हैं, क्या अमरिका की मेहमाननवाजी  की खुमारी अभी उतरी नहीं?</p>
<p><b>बातें तो बडी बडी करते हो, गली गली इंसानियत के नारे भी लगाते हो जैसे खुद का सौदा कर रहे हो! पता नहीं किसको धोका दे रहे हो? अगर इंसान नहीं बन सकते तो खामूशी इख्तियार करो मगर दूसरों पर उंगली ना उठाओ - जिसतरह तुमने अपना धर्म बनालिया है, हर एक को हक है कि वो भी अपना धर्म बनाए। खुदा सब देख रहा है, तुम लोगों के विचारों को खूब जानता है और तुम्हारी अजब हरकतों को देख कभी हंसी आती है और गुस्सा भी आता है। वल्लाह हम बाकाईदा खुदा हैं मगर किसी भी धर्म मे नहीं।<br />
</b></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3173</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Jul 2007 14:10:17 +0000</pubDate>
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		<description>वाह, हम तो समझे कहाँ गुम गये?? और आप निकले बाथरुम में खुदा को खोजते-बहुत खूब!! अब जारी रहें. :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाह, हम तो समझे कहाँ गुम गये?? और आप निकले बाथरुम में खुदा को खोजते-बहुत खूब!! अब जारी रहें. <img src='http://www.shuaib.in/chittha/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3172</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Jul 2007 13:36:18 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;b&gt;@ 1. विजय वडनेरे&lt;/b&gt;
सही है विजय जी, मैं भी यही चाहता हूं कि काश वो लोग भी पढ लेते तो खुदा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं। भारत ट्रिप मज़ेदार रहा और मजेदार चल रहा है। फिलहाल हंसी खुशी के दिन हैं और ये दिन बहुत दिनों बाद नसीब हुए और हां होंडा एक्टिवा जो फौर स्ट्रोक गाडी है, हमें इंजन आइल का पता नहीं था गाडी की पूरा इंजन जाम हो गया था, पूरे छे हज़ार रूपये खर्च करने पर फिर ठीक ठाक चल रही है।

&lt;b&gt;@ 2. प्रियंकर&lt;/b&gt;
शुक्रिया भाई, मैं हमेशा यही चाहता हूं कि एकदम खुलकर बात बोलूं और ऐसी बात कि सामने वाले समझलें कि मैं क्या कहना चाहता हूं और क्यों - और कुछ लोगों को मेरी बात समझ आती है पर उसका जवाब उनमे नहीं होता।

&lt;b&gt;@ 3. संजय बेंगाणी&lt;/b&gt;
वाह भाई, आपने याद किया और मैं हाज़िर। यार यकीन मानो ये पोस्ट तकरीबन दो महीनों से लिख रहा हूं और समझ नही आरहा कि कहां पर खत्म करूं, तो आज मजबूरन स्माप्त करना ही था। आपका शुक्रिया भाई।

&lt;b&gt;@ 4. जगदीश भाटिय&lt;/b&gt;
जी बहुत शुक्रिया आपका, मगर मुझे आपका सर्किट वाला अंदाज़ बहुत अच्छा लगता है।

&lt;b&gt;@ 6. Arun arora&lt;/b&gt;
खुदा की चाहता भी यही है कि वो भारत का ही हो कर रहे, मगर पिछली बार खुदा को हमने यहां से भगा दिया था कि भारत को उसकी कोई ज़रूरत नहीं क्यों भूल गए कया ;) यहां देखें शायद कि आपको याद होः http://www.shuaib.in/chittha/archives/145

&lt;b&gt;@ 7. डा. रमा द्विवेदी&lt;/b&gt;
व्यंग्य पसंद करने के लिए आपका आभार रमा जी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><b>@ 1. विजय वडनेरे</b><br />
सही है विजय जी, मैं भी यही चाहता हूं कि काश वो लोग भी पढ लेते तो खुदा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं। भारत ट्रिप मज़ेदार रहा और मजेदार चल रहा है। फिलहाल हंसी खुशी के दिन हैं और ये दिन बहुत दिनों बाद नसीब हुए और हां होंडा एक्टिवा जो फौर स्ट्रोक गाडी है, हमें इंजन आइल का पता नहीं था गाडी की पूरा इंजन जाम हो गया था, पूरे छे हज़ार रूपये खर्च करने पर फिर ठीक ठाक चल रही है।</p>
<p><b>@ 2. प्रियंकर</b><br />
शुक्रिया भाई, मैं हमेशा यही चाहता हूं कि एकदम खुलकर बात बोलूं और ऐसी बात कि सामने वाले समझलें कि मैं क्या कहना चाहता हूं और क्यों - और कुछ लोगों को मेरी बात समझ आती है पर उसका जवाब उनमे नहीं होता।</p>
<p><b>@ 3. संजय बेंगाणी</b><br />
वाह भाई, आपने याद किया और मैं हाज़िर। यार यकीन मानो ये पोस्ट तकरीबन दो महीनों से लिख रहा हूं और समझ नही आरहा कि कहां पर खत्म करूं, तो आज मजबूरन स्माप्त करना ही था। आपका शुक्रिया भाई।</p>
<p><b>@ 4. जगदीश भाटिय</b><br />
जी बहुत शुक्रिया आपका, मगर मुझे आपका सर्किट वाला अंदाज़ बहुत अच्छा लगता है।</p>
<p><b>@ 6. Arun arora</b><br />
खुदा की चाहता भी यही है कि वो भारत का ही हो कर रहे, मगर पिछली बार खुदा को हमने यहां से भगा दिया था कि भारत को उसकी कोई ज़रूरत नहीं क्यों भूल गए कया <img src='http://www.shuaib.in/chittha/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> यहां देखें शायद कि आपको याद होः <a href="http://www.shuaib.in/chittha/archives/145" rel="nofollow">http://www.shuaib.in/chittha/archives/145</a></p>
<p><b>@ 7. डा. रमा द्विवेदी</b><br />
व्यंग्य पसंद करने के लिए आपका आभार रमा जी।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: डा. रमा द्विवेदी</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3171</link>
		<dc:creator>डा. रमा द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Jul 2007 09:42:25 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3171</guid>
		<description>बहुत खूब हास्य-व्यंग्य लिखा है आपने :)  बधाई......

     - डा. रमा द्विवेदी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत खूब हास्य-व्यंग्य लिखा है आपने <img src='http://www.shuaib.in/chittha/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' />  बधाई&#8230;&#8230;</p>
<p>     - डा. रमा द्विवेदी</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: arun  arora</title>
		<link>http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3170</link>
		<dc:creator>arun  arora</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Jul 2007 09:38:27 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.shuaib.in/chittha/archives/151#comment-3170</guid>
		<description>चलो भाइ हमे तो देख कर सकून मिला की खुदा भारत की भूमी पर ही है,और वापिस ड्यूटी पर भी,शु एब भाइ हम तो  खुदा कॊ दिल्ली वेलकम भी कर रहे है,१४ को खुदा के साथ मिटिंग हो जायेगी ब्लोगरो की,:)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>चलो भाइ हमे तो देख कर सकून मिला की खुदा भारत की भूमी पर ही है,और वापिस ड्यूटी पर भी,शु एब भाइ हम तो  खुदा कॊ दिल्ली वेलकम भी कर रहे है,१४ को खुदा के साथ मिटिंग हो जायेगी ब्लोगरो की,:)</p>
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