[ ये ख़ुदा है - 59 ]

सुबह सुबह आस्मान से चार फ़रिश्ते आटपके चूंकि बीच रास्ता उडन तश्तरी पंक्चर होगई, धक्का मारते आए ताकि ख़ुदा का नाप लेकर ईद के कप्डे फौरी बनवादे। तुरंत ख़ुदा ने इनकार करदिया, इस बार की ईद सादगी से होगी। ख़ुदा ने अफ़सोस के साथ कहाः मियां, देखते नहीं पाकिस्तान के हालात कितने गम्भीर हैं - कब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जासकता। चंद ख़ुद्दार लोगों की वजह अचानक लाखों जनता पर मुसीबत टूट पडे, ये बडे दुःख की बात है। इस वक़्त उसामा बिन लादिन का ताज़ा वीडियो हर दिन हाऊज़ फ़ुल जा रहा है, ईरान को अमेरिका जाने के लिए बलेक मे टिकट ख़रीदना पडा साथ ही दुनिया भर मे अजब कश्मकश कि बॉक्स आफ़िस से क्या रिपोर्ट निकलने को है? और यहां भारत मे राम भक्तों के साथ घटिया मज़ाक कि वजह देश भर मे टेंशण पैदा हो गया।… मुस्लमान और ईसाईयों के बाद अब हिन्दुओं को भी मौक़ा मिला कि आपस मे लडकर मरे जो कि कल तक दर्शक बने रहे! ख़ुदा ने फ़रमायाः हमारी आरज़ू भी यही कि सभी धर्म के लोग आपस मे लडकर मरे और ख़ुदा को मज़ा दे, चूंकि ख़ुदा के पास इस से अच्छा दूसरा कोई इन्टर्टेंमंट नहीं कि इंजुए करसके।

ख़ुदा से पूछाः आपने कभी राम को देखा? उलटा ख़ुदा ने सवाल माराः क्या किसी ने ख़ुदा को देखा?? राम देखने मे वैसा ही है जैसा ख़ुदा है अलबत्ता हमारी मूंछों मे १९-२० का फ़र्क़ है, राम किलीन शे्व जब्कि ख़ुदा की मूंछें ज़मीन झाडती हैं। ग़ज़बनाक होकर ख़ुदा ने चिंघाडाः मियां, मज़ाक की भी हद होती है, भला ख़ुदा का राम से क्या लेना? पहली बार हम इस धरती पे आए हैं फिर पता चला कि हमसे पहले कई तरह के ख़ुदा आकर चले गए कभी राम, कभी शाम, कभी ईसा और कभी मूसा। सबकी कहानीयां पढते हमारा दिमाग़ घूम गया कि इन ख़ुदाओं ने अमनवअमान की बातें बताकर चले गए या इंसानों को ज़ातों मे बांटने आए थे?? ख़ुदा ने कहाः शुक्र है उस ज़माने मे हम नहीं आए वरना आज बीजेपी के जलूस मे हाज़री लगाते। ख़ुदा ने बतायाः जैसे ही हम धरती पे पधारे, एकसाथ कई शकल के इंसान देख चकरा गए हालांकि इन्हे हमने ही बनाया था। चारों ओर से लोगों ने घेरलिया, हमसे हमारा धर्म पूछने लगे तो हम दुबारा चकराके बेहोश हो गए। फिर जब होश आया तो ख़ुद को अमेरिका मे पाया, शुक्र है यहां अभी तक किसी ने हमारा धर्म नहीं पूछा।

ख़ुदा ने फरमायाः ख़ुदा को अपने ख़ुदा होने की क़सम! हमने सोचा भी ना था कि लोग ख़ुदा को अजब तरीक़ों से पूजते हैं और स्वर्ग तक पहुंचने के लिए ऊटपटांग हरकतों मे जुटे रहते हैं। ख़ुदा ने कहाः हम सुनीता विल्यम्स को सलाम करते हैं, जिसको स्पेस से दुनिया मे कोई सर्हद नज़र ना आई। हमारा भी ये हाल था, यही समझ बैठे कि दुनिया को जैसा बनाया था उसी हाल मे होगी मगर जब धरती पे उतरे तो ख़ुद को शर्म आगई। अलग अलग देशों की सर्हदें बना लिए उसपर धर्म ज़ातों की दीवारें भी और ख़ुदा को पूजते भी ऐसे कि एकदूसरे की इबादत को ग़लत बताते हैं। ज़ालिम इंसानों ने ख़ुदा की शकलें तक बनवालिए, छे हाथ वाला ख़ुदा, लम्बी ज़बान का ख़ुदा, लम्बी नाक का ख़ुदा, सूली पर टंगा ख़ुदा, क़बर मे लेटा ख़ुदा, आग मे दहकता ख़ुदा, हवा मे झूमता ख़ूदा वगैरा वगैरा (हालांकि ख़ुदा की शकल और सूरत ही नहीं)… ख़ुदा ने दहाडकर रोते हुए कहाः अफ़सोस! हमारे पास ऐसा कोई मंत्र नहीं कि हम दुबारा पैदा होते, पूरे विश्व को दुबारा बनाते, दुनिया की हर चीज़ बना देते मगर ख़ुदा की क़सम - इंसान बनाने की ग़लती दुबारा ना करते।

ख़ुदा ने ग़मज़दा अंदाज़ मे बतायाः अब शायद ख़ुदा के वजूद की ज़रूरत ही नहीं। तुम इंसान ब्लाक होल तक झांक सकते हो, स्त्री को पुरुष और पुरुष को स्त्री बना सकते हो, इंसान जान्वर की क्लोंनिंग कर सकते हो, बनावटी तारों के साथ ख़ुद ही बारिश बरसालेते हो, एकदूसरे के देषों पर ख़ुद अज़ाब बन जाते हो, ख़ुदा के स्वर्ग तक मीज़ाइल मारने का होसला भी रखते हो। पूरे विश्व को मिंटों मे तबाह करने का पूरा सामान तुम इंसानों के पास मौजूद है तो फिर ख़ुदा को अपने ख़ुदा रहने की क्या ज़रूरत है?… इतना सब कुछ तुम इंसानों ने ख़ुद करलिए लेकिन ये क्यों मानते हो कि धर्म को ख़ुदा ने बनाया है??… ख़ुदा को अपने वजूद की क़सम! ये धर्म तुम इंसानों का ही बनाया है जिसमें ख़ुदा का एक भी हाथ नहीं। ख़ुद धर्म बनालिए और एकदूसरे के धर्म को झूटा कहकर अपने आपको स्वर्गवासी सम्झने लगे! पता नहीं किसको धोका दे रहे, ख़ुदा को या ख़ुदको? ख़ुदा ने फ़रमायाः इस सारे जहाँ का सिर्फ एक मालिक है, इस मालिक को ईश्वर या पर्मेश्वर बोलो, ईसा या मूसा बोलो, राम या रहीम बोलो। चाहो तो प्यार से ख़ुदा बोलो। आपकी मर्ज़ी और भी नाम लगालो मगर प्लीज़ इस मालिक को अपने ख़ास धर्म से जोडकर ख़ुश ना हो। जारी

बाक़ी फिर कभी

This entry was posted on Saturday, September 29th, 2007 at 11:38 am and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

11 comments so far

pankaj bengani
 1 

सब स्वार्थ की माया है भाई.

भगवान और खुदा मुसिबत मे ही याद आते हैं. स्वार्थ के लिए हम पूजा करते हैं और मुसलमान बदंगी करते हैं.

हे प्रभु, अगर यह काम हो गया तो सवा ग्यारह की प्रसाद चढाउंगा. क्या यह रिश्वत नही है?

इस्लाम मे ना मानने वाले काफिर.. उनको मिटा दो यह जंगलीयत नही है.

धर्म के ठेकेदार बने बैठे हैं लोग. किसी को करूणानिधी की खोपडी चाहिए, तोगडिया जैसे लोगों ने जैसे हिन्दुओं का ठेका ले रखा है. कोई उनसे पूछे आपको यह हक दिया किसने.

कोई कहता है सलमान ने पूजा की अब वो मुसलमान नही.. जैसे सारी दूनिया के मुसलमानो का ठेका उस बेवकुफ ने ले रखा है.

ओसामा और उसके गुर्गों को लगता है कि सारी दूनिया के मुसलमानो के प्रतिनिधि वही है.. और लालु प्रसाद जैसे लोग ओसामा के हमशक्ल को चुनाव प्रचार मे ले जाते हैं. इससे ज्यादा और क्या गिरेगा कोई?

बुश को अपने बैंक अकाउंट बढाने और देश की तेल और हथियार लॉबी को कमवाने के लिए हमले पर हमले करने हैं.

किसीको ईस्लामी बम बनाना है.

शोएब मलिक फायनल मे हारकर दूनिया भर के मुसलमानो से माफी मांगते है. जैसे कोई क्रिकेट का नही धर्म का युद्ध था. अबे मुरख तुझे जिसने हराया उस टीम मे भी मुसलमान थे.

और फिर ईसाई धर्म का प्रचार करने गरीबों की भावनाओं से खेल यह क्या है?

धर्म के नाम पर सब बिक सकता है.

वास्तव में इंसान से गन्दा जानवर और कोई है ही नही.

September 29th, 2007 at 11:58 am
 2 

बाप रे शुएब और पंकज ने ऐसा लिख दिया है की अपने पास कहने को कुछ नहीं. सबको सन्मति दे भगवान, पर जिसने इंसान बनाया उसकी क्या मत मारी गई थी?

September 29th, 2007 at 1:10 pm
 3 

वाह शुएब भाई क्या खूब लिखा है।

बेचारे राम और खुदा स्वर्ग में बैठे झक मारते होंगे कि यही दिन देखने के लिए दुनिया बनाई थी।

September 29th, 2007 at 4:08 pm
 4 

बहुत सही कहा आपने।

September 29th, 2007 at 5:26 pm
 5 

शुएब और पंकज का साझा प्रयास सा लग रहा है : ५० नम्बर इच के हिसाब पूरे १००. बढ़िया लिखा है.

September 29th, 2007 at 5:38 pm
 6 

शुएब भाई, बड़े दिनों बाद चिट्ठे पर सक्रिय हुए हैं, अच्छा लगा फिर खुदा का हाल पढ़ कर।

आपको तथा सभी अन्य हिन्दी चिट्ठाकारों के लिए सूचना है, हमारी हिंदी वेबसाइट http://www.josh18.com सक्रिय की गई है। कृपया पधारें तथा अपनी प्रतिक्रिया दें। उम्मीद है, पसंद आएगी।

October 12th, 2007 at 5:37 pm
Kasim
 7 

hi good

October 30th, 2007 at 7:23 am
 8 

चलो कम से कम जानवर तो धर्म के चक्रव्यूव्ह से बचे हुये हैं :) लेकिन अगर इन्सानों का बस चले तो उन बेचारों को भी हिन्दू, मुसलामान और ईसाई बना दें :)

November 29th, 2007 at 9:47 am
Rajendra prasad
 9 

Excellent! It keeps you at par with Saadat Hasan Monto, Ibne Inshan and HariShanker Parsain. Such articles need greater dissemination and reach than confined to netizens only.

December 6th, 2007 at 11:39 pm
 10 

शुएब साहब,
पहली बार इस घाट पर आया हूं । शेर और बकरी की तो छोड़िये यहां तो खुदा ही मिल गए। इधर हम अपने ब्लाग पर लोगों को तीरथ-यायावरी के मायने समझा रहे थे और खुदा को इस घाट पर पा लिया । शानदार चल रहा है खुदा का किस्सा । जमाए रखिये । अब सारे इत्मीनान से पढ़ने पड़ेंगे। आपका लिंक अपने ब्लाग में दे दिया है।

December 17th, 2007 at 12:17 pm
Rajendra prasad
 11 

A earnest philospher/writer sees the future. Your prophecy has come true so early.

December 28th, 2007 at 11:28 am

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