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Dec

बकरा ईद लाया

   Posted by: शुऐब   in खुदा से मिलो

[ ये ख़ुदा है - 61 ]

तेज़ रफ़्तार ख़ुदा ने फ़ुटपाथ पर बैठे एक भिकारी को ठोकर मारदिया, भिकारी ने झिल्लाकर कहाः आप ख़ुदा हो कि पाजामा! देखकर नहीं चलसकते? ख़ुदा ने जवाब दियाः नहीं देख सकते! ये फ़ुटपाथ तुम्हारे बाप का नहीं कि यूं पैर फैलाए भीक मांगो, अगर भीक मांगना ही है तो अदब और तमीज़ से बैठो। भिकारी ने अपने बासी डंडे से ख़ुदा को पीटना शुरू करदिया अभी नाक फूटने की देरी पुलिस आगई। ख़ुदा ने माजरा सुनाया तो उलटा पुलिस की जूतीयां भी खानी पडी। तंग आकर ख़ुदा ने चिंघाडाः हद हो गई, इन भिकारीयों की वजह से पूरा शहर परेशान है, सिग्नल पर भी गाडीयों पर चढजाते हैं और ऐसे भीक मांगते हैं जैसे अपना हक़ मांग रहे हों। फ़ुटपाथों पर ऐसे बैठजाते हैं कि आम लोगों का चलना फिरना मुशकिल होगया है और अगर इनसे पंगा ले तो ऐसा शर्मिंदा करते हैं कि पुलिस वाले भी उलटा शरीफ़ आदमी पर थू थू करते हैं। ख़ुदा बडबडायाः यूं धूप मे घूमने फिरने से अच्छा है हम भी भिकारी बन जाएं ताकि ज़ोर ज़बर्दस्ती अपना हक मांगे।

सभी अलक़ाईदा टीम ने जुट बनाकर मंत्र पढाः “ख़ुदा को उसके ख़ुदा होने का वास्ता अगर हिम्मत है तो सामने आजा”। ख़ुदा ने कहाः कल छुट्टी का दिन हमने पिक्चर देखा, क्या ख़ाख़ नये दौर मे पुराने स्टाईल की पिक्चर थी इंटर्वल से पहले हम भाग खडे हुए। ख़ुदा को बतायाः अच्छा होता इंटर्वल के बाद बाक़ी पूरी फिल्म भी देखलेते जिसमे नये ज़माने का भी स्टाईल था। ख़ुदा ने कहाः भाड मे जाएं ऐसे लोग जो ऊटपटांग फ़िल्में बनाकर पैसा हडपते हैं, सभी अदाकारों को बुलाकर नचादिया तो इसका ये मतलब नहीं कि कुछ अनोखा कारनामा अंजाम दिया। अमां यार, लोग तंग आचुके ऐसी फ़िल्में देखकर बहुत ज़माना हुआ कोई अच्छी फिल्म देखना नसीब ना हुआ। ख़ुदा ने बतायाः हम फिर वहीं पास वाले सिनिमा गए ताकि कुछ तो इंटर्टेंमंट होजाए मगर वो पिक्चर भी ऐसी जिसमे सवेरा ही नहीं पूरी फिल्म अंधेरे मे बनाई थी यानी उसमे भी हम दर्शकों को उल्लू बनादिया। फ़्रिश्तों ने ख़ुदा के सपने मे आकर पूछाः क्या बात है आक़ा, आप सपने मे क्यों खिलखिलाकर हंस रहे हो? ख़ुदा ने कहाः मियां ख़ुश्आमदीद आओ तुम भी देखो जो हम देख रहे हैं वल्लाह पेट मे गुदगुदी मच गई

सद्दाम हुसैन की पहली बरसी की ख़ुशी मे ख़ुदा ने केक काटने के बाद फरमायाः बहुत ही ख़डूस आदमी था, ख़ुदा से डरना तो दूर की बात अमेरिका से भी नहीं डरता था। ख़ुदा ने कहाः सद्दाम की पहली बरसी पर हम नाचने ही वाले थे कि अमिताभ की मां चल बसी। अब हम मैयत मे जा रेहे थे कि गुजरात पहुंच गए जहां हमें फैसला करना है। ख़ुदा ने अपने आंसूं पूंछने के बाद फरमायाः भाईयो बेहनो! भूलकर भी किसी अच्छे आदमी को वोट ना देना क्योंकि अच्छे आदमी पर भरोसा ना रहा वो चुनाऊ जीतने के बाद ख़राब होजाता है। ख़ुदा ने मोदी के बारे कहाः आज कौन लीडर अच्छा है किसी की भी नियत ठीक नहीं लगती? मोदी लाख बुरा सही अगर दुबारा उसको ही मौक़ा दिया जाए तो उम्मीद है वो अच्छा ही साबित होगा उसके सीने मे भी दिल है सोचने सम्झमने की सलाहियत रखता है ये भी म्मकिन है वो अपने किये गुनाहों की माफ़ी मांगले और अपने ऊपर लगे दाग़ अच्छे कर्मों से धोले।

चार दिनों तक ख़ुदा नींद से बेदार ना हुआ तो ऐक टेंकर पानी मंगवाकर उसके मूंह पर डाला। हडबडाकर उठने के बाद ख़ुदा ने पूछाः आख़िर कौनसी आफ़त आगई जो हमे चार दिनों मे ही जगादिया? स्वर्ग मे कितना अच्छा था जहां हम अपनी मर्ज़ी से सोते जागते मगर जबसे इस धर्ती पे आए हैं ज़ालिम लोग हमे कुछ दिन सोने भी नहीं देते!!! ख़ुदा को बतायाः आलीजाह गुस्ताख़ी मॉफ़, सिर्फ ये पूछने के लिए जगाया था कि इस बकरे को कहां बांधे जिसका आपने आरडर दिया था? ख़ुदा ने गुस्से मे कहाः मियां, हमारे पीछे ही बांधदो। मौक़ा देखकर बकरे ने ख़ुदा को पीछे से लात मारा तो ख़ुदा ने बकरे के कान पकड उठालिया और पूछाः बदतमीज़, हमे लात मारने की वजह बयान करो? बकरे ने ख़ुदा के मूंह पर छींक मारने के बाद कहाः आलीजाह! जान की अमान पाऊँ तो अर्ज़ है, अपने पास हाथ नहीं कि आपको थप्पड लगऊँ इसीलिए लात मारने की गुस्ताख़ी की। बकरे पर चार पांच पवित्र गालीयां पढने के बाद ख़ुदा ने कहाः कमबख़्त टहर अभी हम तेरी बिरयानी बनाते हैं।

अलक़ाईदा ग्रूप ने दुबारा मंत्र पढाः “ख़ुदा को उसके ख़ुदा होने का वास्ता अगर हिम्मत है तो सामने आजा”। ख़ुदा ने कहाः छुट्टा नहीं है आगे जाओ। ख़ुदा बडबडायाः ईद की सुबह हुई नहीं की भिकारी लोग अजीब ग़रीब आवाज़ लगाना शुरू करदेते हैं। बकरे ने ख़ुदा से कहाः ईद आप मना रहे हो और काट मुझे रहे हो? यानी आपकी ख़ुशी मेरा ग़म!! ख़ुदा ने कहाः मियां बकरे, ये तो बरसों पुरानी रिवायत है कि इंसान तुम्हे काट खाते हैं, अब इस रिवायत को हम तो क्या हमारे फ़्रिश्ते भी बदल नहीं सकते। इंसान की ख़ुशी हो या ग़म दोनों टाइम तुम उनका मज़ेदार भोजन हो। बदकिस्मती तुम्हारी है तुम बकरा हो बकरा बनो। अब हमारे हाथों कटने के लिए तैयार हो जाओ वल्लाह पेट मे चूहे दौड रहे हैं। बकरे ने कहाः हुम्म्म, हां अपनी ही बदकिस्मती है कि मैं बकरा हूं। बकरे ने ख़ुदा को घूरा फिर बोलाः अब देर किस बात की आक़ा, चाक़ू उठाओ और मुझे काटो, मेरी बिरयानी बनाओ, खाओ डकार लो और ख़ुश रहो आपको ईद मुबारक और मुझे मौत। जारी

This entry was posted on Thursday, December 27th, 2007 at 9:44 am and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

6 comments so far

 1 

बेचारा बकरा !
घुघूती बासुती

December 27th, 2007 at 10:26 am
 2 

बकरे से हमदर्दी है भाई. बाकी अल्लाह को पता तो चला एक आम आदमी कैसे जी पाता है, इअ दुनिया में.

ईद मुबारक.

December 27th, 2007 at 12:37 pm
मिहिरभोज
 3 

ईद मुबारक ,यार बहुत अच्छा लिखते हो

December 27th, 2007 at 1:05 pm
 4 

और ये तुम्हारी फोटो में क्या बाहर एक्स रे लगा है क्या

December 27th, 2007 at 1:06 pm
 5 

शोएब जी, आपका हास्य के साथ गहन चिन्तन भरा लेख अच्छा लगा। सच कहूँ तो आज पहली बार हास्य के माध्यम् से आध्यात्मिक अभिव्यक्ति करने वाला लेख पढ़ा है। कहीं कहीं शब्दों के मिल जाने से वर्तनी में अशुद्धी आ गयी है, किन्तु अर्थ स्पष्ट़ है।
बहुत बहुत मुबारक

January 1st, 2008 at 10:42 am
 6 

दुनिया में तमाम तरह के लोग भरे है. जो खराब टिप्पणियाँ है, उन्हे पहले ही डिलिट कर (हटा) दिया करो. मॉडरेशन का ऑपशन (विकल्प) भी है.

खुदा ऐसे लोगो को सदबुद्धी दे.

April 17th, 2008 at 2:09 pm

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