ख़ुदा ने हिचकियों के साथ रोना शुरू कर दिया, पूछने पर बताया - तारे ज़मीन पर उतर आए। इन तारों को हम सिर्फ प्यार भरी नज़रों से देखते हैं मगर जानना ज़रूरी नहीं समझते कि ये कैसे जगमगाते हैं।
ख़ुदा ने कहा “सभी लोग बच्चों से प्यार करते हैं मगर इनकी मासूम भावनाओं को समझ नहीं पाते। माता पिता अपने बच्चों को लाड़ करते हैं तो इसका ये मतलब नहीं कि अपना फ़र्ज़ पूरा कर रहे हैं। कोई बच्चा ऊटपटांग हरकतें करे तो रिश्तेदारों के मशवरे पर उसे बोर्डिंग स्कूल मे फेंक देते हैं, एक मासूम जान के साथ इस से बडा ज़ुल्म और क्या है?”
ख़ुदा से पूछा “मगर ये फिल्म देख आप क्यों इतना रो रहे हैं?”
ख़ुदा ने बताया - मियां, हमें अपने बचपन की मासूम हरकतें याद आ गईं, वल्लाह कितने भोले भाले थे हम! हमारे पास ऐसा कोई जादू नहीं कि वापस अपने बचपन मे चले जाते! हाय अफसोस ऐसा मुमकिन होता!! ख़ुदा को बताया - हाँ ये मुमकिन है, चड्ढी पहनकर कुछ देर के लिए ख़ुदको बच्चा समझ लें।
धूम मचाले – “वंस मोर - वंस मोर” की चीख़ों के साथ ख़ुदा ने दुबारा ज़बरदस्त ठुमके लगाए। इतना ख़ौफ़नाक डांस दिखाया कि पूरा स्टेज ख़राब कर दिया। दूसरे दिन अख़बारों ने लिखा - ख़ुदा को नाच-गाने में ज़रा भी तमीज़ नहीं, ख़ुद नाचा और नौजवानों को भी ऐसे नचाया कि कुछ लड़कियों का पाजामा तक फट गया।
ख़ुदा ने मीडिया के आगे कहा — वहाँ हम सभी लोग नाचने मे इतना व्यस्त हो गए कि कब किसका पाजामा फटा पता ही ना चला, वल्लाह हमारा पाजामा तक ग़ायब था (क्यों ना ये भी अल-क़ायदा वालों की शरारत हो!) ख़ुदा ने अफ़सोस का इज़हार फरमाया - लोग नाच-गाने मे ऐसे व्यस्त हो जाते हैं अपना पाजामा फटने का एहसास भी देर से होता है। ख़ुदा ने पत्रकारों से कहाः अगले साल हम धीरे धीरे नाचेंगे ताकि नज़र रख सकें कौन किसका पाजामा फाड़ रहा है। फिर ख़ुदा ने खुदके ही कान मे कहाः ख़ुदा की कसम! जब तक शरीफ़ घराने की लडकियां डिस्को मे आती रहेंगी हम उनका पाजामा वैसे ही फाड़ते रहेंगे!!
बेनज़ीर की मुत्यु पर ख़ुदा ने रोने की जबरदस्त एक्टिंग की, पूछने पर फरमाया — यहाँ सभी रोने धोने की अदाकारी में एक दूसरे पर बाज़ी मार रहे हैं तो हम क्यों पीछे रहें? ख़ुदा ने अफ़सोस से कहा — अच्छा ख़ासा पाकिस्तान बगैर सेक्यूलरिज़्म के जैसे तैसे आगे बढ रहा था फिर एक स्त्री सेक्यूलरिज़्म की झलक दिखलाने क्या आई अब क़यामत तक ये देश दंगे फ़साद की नज़र हो गया। नाक पर हाथ रखे ख़ुदा ने पूछाः ये सब कैसे हुआ? ख़ुदा को बतायाः अल-कायदा वालों ने अपना वादा निभाया और बेनज़ीर को मार डाला – अल-कायदा के लोग वादे के पक्के हैं जो कहा वो कर डाला। ख़ुदा ने फ़रमाया — बेनज़ीर की मुत्यु से पहले पिछली किश्त मे हम ने फ़रमाया था — (उद्धरण) “ख़ुदा से पूछा — पाकिस्तान मे मारशल लॉ कायम है तो चुनाव करवाने का मतलब क्या है? ख़ुदा ने जवाब दिया — सिम्पल सी बात है, बेनज़ीर और नवाज़ को खींच लाओ जहां पैदा हुए वहीं दफ़नाओ।” अपना कॉलर चढाकर ख़ुदा ने कहाः मियां हम ख़ुदा हैं सब जानते हैं।
मीडिया वालों से बात करते हुए ख़ुदा ने कहा — बेनज़ीर की मुत्यु पर हम रोने क्या गए, वहाँ दूसरों को रोता देख हमारी हंसी निकल गई, इससे पहले कि पब्लिक हमें मारती वहाँ से भाग निकले। ख़ुदा को बताया — किसी की मुत्यु पर ऐसे मज़ाक़ नहीं करते। ख़ुदा ने कहा — मियां, हम मज़ाक़ नहीं कर रहे, वाक़ई वहां रोने धोने का मानो जैसे मुकाबला ही चल रहा था।
नवाज़ शरीफ़ तो इतना रो रहा था कि बेनज़ीर के सगे रिश्तेदार भी उतना नहीं रोए। चार लोगों के पीछे खडा नवाज़ शरीफ़ झाँक झाँक कर रो रहा था जैसे देख रहा हो बहनजी ठीक से मरी कि नहीं। वल्लाह, इसकी शक्ल पर लिखा था कि कातिल कौन था!! ख़ुदा ने कहा — बेनज़ीर को मारने वालों मे सभी पाकिस्तानी शामिल हैं, आठ साल ऐश करने के बाद फिर से पाकिस्तानियों पर राज करने चली आई थी। जारी
बाक़ी फिर कभी
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