[ ये ख़ुदा है - 66 ]

महीनों ख़ामोशी को तोडते हुए अचानक ख़ुदा को फिरसे बकवास की सूझी और साथ मे हज़ारों दर्शकों को जलसागाह खींच लाए फिर अपनी जेब से पर्ची निकाल सर्सरी नज़र डालते हुए खंकारने के बाद भाषण पढ़ना शुरू ही किया था कि एक समाचार पत्रकार ने पूछलियाः इतने दिनों कहां झक मार रहे थे? ख़ुदा ने जवाब दियाः भला हम कहां जाकर झक मारते? अलबत्ता डांस की रेहर्सल मे मसरूफ़ थे जो हमें अगले दिनों ईरान मे नाचना है।

ख़ुदा को बतायाः जबसे इस पृथ्वी पे आप आए नाचते ही रहे और पहली बार स्नान के लिए समुद्र मे छलांग क्या मारा सोनामी उबल पडाईराक़, अफ़ग़ान मे आपके नाचने का असर अभी तक बाकी है मगर लेबनान मे नाचते हुए ख़ुद अपनी ही टांग तुडवा बैठे अब जो ठीक हुई तो आप ईरान मे नाचने का शौक़ पाल रहे हैं। क्या यही नाचने के लिए हम मानवों के बीच आए? जब्कि किसी भी धर्म के ख़ुदा को नाचना तो दूर एक टांग पे खडे होना भी मालूम नहीं - आख़िर आपके इस नाचने का मक़सद क्या है??

बात टालते हुए ख़ुदा ने खंकारते अपना गला साफ़ किया और फर्मायाः तो प्रिय दर्शकों, हम जानते हैं कि इतना लम्बा अर्सा हमारे ग़ायब होने पर किसी को ज़रा भी ताजुब नहीं, वैसे भी आप लोग हमारे भाषण पर सिर्फ ऊंघते हो और अपनी कलाई घड़ी देखते रहते हो कि कब ख़ुदा अपना भाषण समाप्त करे। वैसे नाचने की रेहर्सल से हम काफ़ी थक चुके हैं और आप लोगों के ऊंघने से पहले ही हम अपना भाषण समाप्त करदेंगे।

तो अर्ज़ है, हाल ही हमने बिहार मे एक चमत्कार करडाला, हर बिहारी के घर के सामने एक सुमिंगपोल बनादिया ताकि अमीर और ग़रीब मे ज़्यादा फर्क ना रहे मगर ये क्या? हमारे इस कारनामे पर शुक्राना अदा करने कि बजाए सब लोग लानतें भेज रहे हैं। मियां, ऐसा पहली बार हुआ कि हमारी नेक नियत पर लानत नसीब पाई। जब्कि लानत उन कशमीरीयों पर होनी है जो अपने ही देश की धर्ती पर खड़े पड़ोसी देश की शान मे कसीदे गा रहे हैं। हालांकि ये ताजुब की बात नहीं, जब अपने ही काटते हैं तो ऐसे हलात पैदा होजाते हैं।

ख़ुदा ने फर्मायाः उभरते शहिंशाह ओबामा की कसम, ईरान मे नाचने के बाद फिर पाकिस्तान मे भांगड़ा डालेंगे नाचेंगे और सबको साथमे लेकर नचाएंगे ऐसा हमारा इरादा है। ख‌़ैर ये तो होना ही है तुम इंसानों ने ख़ुद हमें नाचने और नचाने पर आमंत्रित किया है। वैसे तो हमारा इरादा है कि रश्य, सोडान और जॉर्डान आदी देशों मे भी नाच दिखाएं। दर्शकों मे किसी ने ख़ुदा को आवाज़ दीः कहीं ऐसा ना हो कि आप नाचते रहें और पीछे से चीन आपकी मारले।

भारत के हालात पर नज़र डालते ख़ुदा ने कहाः उत्तर से दक्षिण तक कहीं भी स्कून नहीं, छोटे बडे सभी शहर आतंक की लिपेट मे हैं। जगह जगह बम धमाके, लूटमार, जलसे और जलूस, लाठी चार्ज फिर फाईरिंग। मज़े की बात तो ये है कि सभी धार्मिक लोग वृत्त बनाकर एकदूसरे की मार रहे हैं और खुदकी भी मरवा रहे हैं। हर एकदूसरे को आतंकवाद समझते हैं मगर अपने अंदर के हैवान को कौन पहचाने। खुद आतंक मचाकर आतंकवादीयों को ढूंडते फिर रहे हैं, अपने धर्म की आड़ मे हैवानियत का काम कर रहे हैं।

मगर क्रिश्चियन समुदाय ने ख़ुदा से कहाः आप किस टाईप के ख़ुदा हैं? देखते नहीं यहां कर्नाटक मे हिन्दू लोगों ने हमारे चर्चों को बर्बाद कर रखा है और जब हमने इसपर विरोध किया तो पुलिस वालों ने हमारा जीना हराम करदिया। अगर आप सचमुच ख़ुदा होते तो हमारी मदद को तुरंत पहुंचते मगर आप भी दूसरों की तरह टीवी पर पुलिस से हमें पिटते देख रहे थे। हम जिस भगवान को पूजते हैं वो तो सूली पर लटके हैं और आप खुदको असली ख़ुदा कहलवाने वाले अगर सचमुच ख़ुदा हो तो ज़रा इन हिन्दू लोगों से हमारी बेइज़्ज़ती का बदला लेकर दिखाएं।

ख़ुदा ने मुसकुराकर कहाः मियां, तुम कब सीधे हो, मौका मिले जब तुम भी उनकी मारलेते हो। कल तुम्हारा समय था आज इनकी बारी है। हर किसी को समय मिलता है खुदकी मरवाने और दूसरों की मारने - पिछले ज़मानों से यही चल रहा है। याद करलो बोसनिया, फ़िलिस्तीन, गुजरात और कशमीर, ९ सितम्बर फिर अफ़ग़ानिस्तान बाद मे ईरान। तुम इंसान वाकई अच्छे हो मगर विचारों से हैवान। आज मस्जिद मे बम फटा तो कुछ ही दिनों बाद मंदिर मे बम धमाके और ये धारावाहिक कभी रुकने वाला नहीं क्योंकि तुम इंसान अपने अंदर के हैवान को सुधारने वाले नहीं।

एक भारतीय ने ख़ुदा से कहाः हमारे देश पर रहम करें, कहीं ऐसा ना हो कि भारत के हालात भी पाकिस्तान जैसे होजाएं। ख‌़ुदा ने उत्तर दियाः मियां, हमसे काहे मदद मांगते हो, आपके पास तो एकसे एक ख़ुदा पडे हैं हर रंग हर शकल मे, किसी का ख़ुदा सूली पर लटका है तो कोई भाला थामे खडा है तो किसी का शुरू से ही ग़ायब है। जब इतने सारे ख़ुदाओं से तुम्हे मदद नहीं मिलती जिनकी रात दिन तुम लोग पूजा करते हो। हम क्यों तुम्हारी मदद करें तुम कौनसी हमारी मानते हो? तुम लोगों को दूसरों पर इलज़ाम लगाना बहुत आसान है जब तुम्हारी खुद फटती है तो चीखें मारते हो

भाषण जारी रखते ख़ुदा ने फर्मायाः पूरे संसार मे आतंक और दूसरी तरफ वैज्ञानिकों की अजीबवग़रीब हरकतें। किसी को क्या पता अगले दिन का सूरज देखना शायद नसीब ना हो। आज भी लोग क़यामत के इंतेज़ार मे हैं मगर सच तो ये है ख़ुद क़यामत इस इंतेज़ार मे है कि कब मानव आदेश दे। तुम इंसानों के पास दुनिया को तबाह करने का सभी सामान मौजूद है हैरतअंगेज़ मिसाइल, एटम बम, संसार के वजूद पर खुजाना अब सितारों से आगे भी झंकने की तैयारी फिर ख़ुदा के स्वर्ग तक भी मिसाइल मार सकते हैं और आख़िरक मे शायद ख़ुदा की भी मारलें।

अपने ही गाल पर ज़ोरदार चमाट मारते ख़ुदा ने कहाः ख़ुदा को अपने वजूद की क़सम, जब हमने मानव को बनाया तो ज़रा भी ख़याल ना था कि इसकी सोच इतनी घटिया होजाएगी कि वो ख़ुदको ख़ुदा समझ बैठे और दूसरों को ख़ुदा और उसके अज़ाब से डराता फिरे। ख़ुद दूसरों की मारली तो कोई बात नही मगर जब कोई अपनी मारले तो ख़ुदा की बार्गाह मे पनाह मांगते हो। दूसरों की हत्या करो तो कोई बात नहीं मगर जब दूसरा कोई हमारी हत्या करदे तो शहीद कहलावाने का हक़ रखते हो?

छाती पीटकर खुदा ने कहाः हम इस संसार के एक अकेले और तनहा खुदा हैं, चाहे हमे राम बोलो रहीम बोलो, ईसा या मूसा पुकारलो मगर प्लीस तुम्हारे बनाए धर्मों मे खुदा की टांग ना खींचो क्योंकि खुदा का कोई धर्म नहीं। अपने सभी हाथ आकाश की तरफ उठाते खुदा ने दर्शकों से फर्मायाः छोडो ये कल की बातें, अपने बुज़र्गों के बनाए धर्म को ठोकर मारकर सब एक इंसान बनजाओ। खुदा ने दर्शकों से पूछाः क्या ऐसा करोगे। मगर किसी भी दर्शक ने जवाब नहीं दिया।

ऊंघने वालों पर खुदा ने गुस्से मे माइक फेंक माराः बेवकूफों, हम यहां ज़बर्दस्त भाषण पढे जा रहे हैं और तुम हो कि सो रहे हो? तुम लोग कभी सुधरने वाले नहीं जाओ हम अपना भाषण यहीं पे समाप्त करते हैं। सभी दर्शक खुशी मे उठकर भागना शुरू करदिया मगर एक बदमाश ने खुदा को छेडाः अब अगला भाषण कितने सालों के बाद पढोगे। गुस्से मे खुदा ने जवाब दियाः मियां, अब पहले जैसा नहीं, अब तो हर सप्ताह एक नया भाषण लेकर हम हाज़िर होंगे। जारी

बाक़ी फिर कभी

This entry was posted on Tuesday, September 30th, 2008 at 2:31 am and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

8 comments so far

 1 

ये खुदा इतना देरी से क्यों आता है ?

क्या कहें खुदा सही फरमा रहे है, मगर हम सुधरने वाले नहीं. इंसान जो ठहरे.

September 30th, 2008 at 1:44 pm
 2 

rochak

October 1st, 2008 at 1:28 pm
parth
 3 

ya khuda!
its marvelaous. eyeopener,khuda tum baar baar aao.
thanks
parth

October 1st, 2008 at 1:46 pm
 4 

शोएब और उनकी ‘खुदा सीरीज़’ की वापसी बेहद अच्छी खबर है .

October 1st, 2008 at 3:12 pm
 5 

इधर भी खुदा है उधर भी खुदा है
जिधर ना खुदा है उधर खोद डालो

October 1st, 2008 at 5:31 pm
 6 

अच्छा लिखा है…आगे भी लिखते रहें…हम पढने आते रहेंगे.

October 3rd, 2008 at 10:18 am
 7 

अरे साहब हम तो इस बकवास को भूल ही गए थे….प्यारी सी बकवास…
पहले पढ़ते थे और आपको दाद देते थे। फिर अचानक आप गुम हो गए…लौट आए हैं तो अब फिर रौनक रहेगी…

October 3rd, 2008 at 7:51 pm
 8 

अच्छी बकवास है.

@मज़े की बात तो ये है कि सभी धार्मिक लोग वृत्त बनाकर एकदूसरे की मार रहे हैं और खुदकी भी मरवा रहे हैं। हर एकदूसरे को आतंकवाद समझते हैं मगर अपने अंदर के हैवान को कौन पहचाने। खुद आतंक मचाकर आतंकवादीयों को ढूंडते फिर रहे हैं, अपने धर्म की आड़ मे हैवानियत का काम कर रहे हैं।

October 9th, 2008 at 10:00 am

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