[ ये ख़ुदा है - 68 ]

चांदनी रात मे बच्चों को चंदामामा के बारे बताते ख़ुदा ने कहा - हमे मालूम है आजके बच्चे बड़े होकर इंजीनियर, डाक्टर, हेड़मास्टर बनने कि बजाए चंदू, चंदा बनने का सपना सजाए हुए हैं। आज हर कोई चांद पर अपनी छत बनाने की सोच रहे हैं। हालांकि किसी को अपने जीवन का नहीं पता कि कब ख़ुदकी सीटी बजेगी। लोग कल केलिए पैसा जमा रखते हैं कि कहीं भूके ना मरे मगर रात को ही टपक जाते हैं। इंसानों ने पृथ्वी को गंदा कर रखा है अब चांद और मरक्युरी पर भी गंद फैलाने के लिए सर जोड़कर बैठे हैं।

  • पाकिस्तान ने कहा - अगर हमारी ऐसी औक़ात होती तो पूरे चांद को ग्रीन कलर मे रंग आते।
  • मुस्लमानों ने कहा - अब रमज़ान के रोज़े और ईद केलिए किसका मूंह देखे।
  • अरब देशों ने कहा - हमारी तिथियों की मां बेहन एक होजाएगी।
  • जापान ने कहा - हम एक और चांद बनाने जा रहे हैं, बटन दबाओ तो ईद का चांद भी दिखाई देगा।
  • भारत ने कहा - धन्य है, हमने अपनी चादर से आगे पैर फैलाचुके हैं।
  • ईरान ने कहा - उम्मीद है, इस चांद दौड़ मे अमेरिका हमपर हमला करना भूल जाए।
  • रश्य ने कहा - वहां चांद पर पहले से ताला पडा है और कुंजी अमेरिका के पास है।
  • चीन ने कहा - मगर एक नक़ली कुंजी हमारे पास भी है।
  • यूरोप ने कहा - क्योंना चांद को हिस्सों मे बांटले, फिर ताक़त के ज़ोरसे एकदूसरे के हिस्से पर झपटा मारते रहे।
  • बंग्लादेश ने पूछा - अगर चांद पर तूफ़ान के आसार नही तो फिर हम भी उमीद करसकते हैं जलसा-ज्लूस करने की।
  • इज़राइल ने बताया - सभी देशों की आशाओं को ध्यान मे रखते हुए हमने मरक्युरी पर आशयाना बनाने की सोच रहे हैं।
  • लालू प्रसाद ने उम्मीद से कहा - पहली किस्त मे हम जाएंगे चांद पर और दूसरी ही किस्त मे अपनी भैंसों को भी उतारलेंगे।
  • बालठाकरे ने कहा - चाहे हम चांद पर भी बैठ जाएं मगर बंग्लदेशीयों पर विशेष नज़र रखेंगे।
  • अफ़ग़ान पठानों ने कहा - हम बहुत पहले ही सपनों मे चांद पर उतरचुके हैं।
  • ओबामा ने विचार ज़ाहिर किया - अपनी जीत का जशन चांद पर मनाएंगे।
  • सऊदी अरब के शेख़ ने बताया - पेट्रोल, डीजल केलिए शर्त ये है कि चांद पर भी हमारी पत्नीयों का इंतेज़ाम होना चाहिए।
  • मौलवी साहिबों ने ख़ुशी का इज़हार किया - अब आइंदा ईद के चांद पर हमारा आपसी झगड़ा समाप्त होजाएगा।
  • सोनिया गांधी ने घोषणा की - कॉंग्रेस के सभी नेताओं को हर साल चांद पर छुट्टीयां मनाने का इंतेज़ाम किया जाएगा।

ख़ुदा ने चिंघाड़ते कहा - अरे बस भी करो कम्बख़्तों, सब मिलकर चांद की मां बेहन एक करने पर तुले हुए हो? अगर एक-एक करके सभी इंसान चांद पर चले गए तो वहां भी सीमाएं बनालोगे फिर ऊंच-नीच ज़ात-पात कहीं मंदिर कहीं मस्जिद वहां भी फ़साद मचाओगे।

ख़ुदा ने कहा - इंसानों को पृथ्वी पर क्या बसाया, यहां तो सीमाएं बनालिए। इंसान ज़ातों मे बटकर धर्म बनालिए, अपना दीन, अपनी पवित्र पुस्तकें और पवित्र इमारतें। आपस मे ऐसे भिड़ गए कि इंसान इंसान को काटता है, इंसान इंसान को बेचता है और इंसान इंसान से डरता भी है।

ख़ुदा ने फ़रमाया - ज़मीन पर इतना गंद फैला रखा है कि कहीं भी आराम नहीं। टहर टहरकर वर्षा के जैसे बम धमाके, फ़साद कर्फ्यू, लूटमार। अब ये गंदे काम करने के लिए तुम इंसान चांद पर डोरे डाल रहे हो? दुनिया को बर्बाद करदिया अब चांद को तो बख़्शदो। जारी

बाक़ी फिर कभी।

This entry was posted on Friday, October 31st, 2008 at 1:42 pm and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

3 comments so far

 1 

अब चाँद पर भी गन्दगी , झगडे … लगता है पुलिस थाना , नर्सिग होम खुलने का scope अब वहा‘ं भी है :)

November 1st, 2008 at 11:28 am
 2 

Bahut achche.

November 17th, 2008 at 6:04 pm
 3 

गजब का लेखन इसे बरक़रार रखें भाई साहब
मजा आ गया

November 18th, 2008 at 3:10 pm

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