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Oct
वीरान बालकोनी
रोज़ाना आज भी सुबह बालकोनी पर खड़े अंगडाई लेने ही वाले थे कि याद आया सामने ख़ूबसूरत पड़ोसन कल ही किसी और जगह नया फ़्लैट ख़रीदकर शिफ़ट होगए। वैसे पिछले दो वर्शों से बाकाईदा सुबह ठीक समय पर अंगडाई लेने हम अपनी बालकोनी पर तैयार रहते कि आजसे अपने बिसतर पर ही अंगडाई खींचनी पडेगी।
दो वर्श पहले जब उनहोंने पहली बार अपनी सामने वाली बालकोनी पे आकर सुबह अंगडाई खींचने केलिए बाहें फैलाई ही थी कि हम दोनों की नज़रें टकरा गई। उनहोने अंगडाई लेने केलिए अपने हाथ उठाए ही थे कि हमको देख शर्माके हाथ नीचे छोड दिए। फिर उसके बाद हमने ख़ाम्ख़ा रोज़ सुबह अंगडाई लेने बालकोनी पर चले आते और वो हमको छुपके देखते थे। इस छुपाछुपी मे बडा मज़ा आता था। आज सामने वाली बालकोनी वीरान है, अब हम तभी अंगडाई लेंगे जब अपने सामने वाली बालकोनी पे कोई एक नया ख़ूबसूरत पडोस आ
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on Saturday, October 3rd, 2009 at 9:54 am and is filed under ये ज़िनदगी.
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