बस मे ट्रेन मे विमान मे या जहां कहीं भी कोई नया मिलजाए, स्लाम नमस्ते के बाद बात चीत शुरू होती है फिर नाम पूछते हैं तो जवाब मे बोलता हूं कि मेरा नाम शुऐब है तो वापस बोलते हैं - ओह आप मुसल्मान हो?

मेरे दिल मे एक ही उत्तर ग़ुस्से मे निकलता है “तेरी मां की………. तेरी बेहन की……….

मेरे पेट पर घूंसा मारो, पीठ पर लात मारो लेकिन उस्से भी ज़्यादा ग़ुस्सा मुझे तब आता है जब कोई मुझसे मेरा धर्म पूछता है। लगता है जैसे मेरी मां बेहन को गाली दे रहा है। मैं इंसान हूं और भारतवासी।

आपसे बिनती है कि यात्रा मे या कहीं भी अजनबीयों से उनका धर्म न पूछें न अपना धर्म बताएं वरना बात चीत और नई दोस्ती का अच्छा मूड़ कहां से कहीं और निकलजाता है। ये नया ज़माना है, हम सभी को साथ मिलकर रहना है।

This entry was posted on Saturday, October 17th, 2009 at 10:03 am and is filed under मेरा विचार. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

17 comments so far

 1 

एकदम सही कहा शुऐब भाई… आजकल लोग सबसे पहले यही पूछने लगे हैं… और चलो माना कि नाम बताया सुरेश, तो पूछेंगे ब्राह्मण हो? या कुछ और? मान लो बताया कि ब्राह्मण हूं तो कहेंगे कौन से ब्राह्मण… फ़िर और एक सवाल, फ़िर और, फ़िर और… यानी व्यक्ति के गुण से कोई लेना-देना नहीं, बस धर्म कौन सा है बताओ… लानत है ऐसी मानसिकता पर…

October 17th, 2009 at 10:43 am
 2 

शोएब भाई, अपना एक शेर याद आता है:-

हमारी सोच नयी, पंख नए, ढंग नया/
हम नया आसमान रखते हैं //

और अगर नहीं रखते तो हमें बनाना ही पड़ेगा ऐk नया आसमां।

October 17th, 2009 at 11:06 am
 3 

सही कह रहे हैं आप। व्यक्ति की पहचान तो उसका व्यक्तित्व है, नाम या धर्म नहीं।

दीपोत्सव का यह पावन पर्व आपके जीवन को धन-धान्य-सुख-समृद्धि से परिपूर्ण करे!!!

October 17th, 2009 at 11:10 am
 4 

बेहतरीन बात कही आपने…

October 17th, 2009 at 11:26 am
 5 

आपसे बिलकुल सहमत हूँ शुएब भाई. जब कोई धर्म और जाति पूछता है तो उसे बातचीत शुरू करने का अफ़सोस होता है और तरस आता है उसकी बुद्धि पर. इन मूर्खों की वजह से ही हिंदुस्तान की आज दुर्गति हो रही है.
दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

October 17th, 2009 at 12:35 pm
 6 

बस मे तो हम भी यात्रा करते हैं कभी कभी….लेकिन ऐसी बातों से कभी सामना नही हुआ…..वो हमे देखते ही पहचान जाते हैं कि हम कौन है….;)

वैसे अगर ऐसा होता है तो गलत है….पता नही यह राजनीति करने वालें कब हमे इस से मुक्त होनें देगें और कब हम आपस में इस वैमनस्य को दूर कर पाएगें।

October 17th, 2009 at 5:14 pm
 7 

सही है बिलकुल सहमत हूँ.

October 17th, 2009 at 5:58 pm
 8 

शुएब ,
नाम सुन कर धर्म पर सोचने वालों पर आप नाराज हो जाते हैं,सही है । उनकी माँ , बहन ने कौन सी गलती की होती है? पुरुषों पर हमले वाली गाली सोचो ।

October 18th, 2009 at 9:15 am
 9 

आपने सही कही है | १००% सहमत

October 18th, 2009 at 9:16 am
बवाल
 10 

बस बस भाईजान। दिल छोटा न करें। देखिए एक ना एक दिन मंज़र खुशनुमा ज़रूर नज़र आएगा। आमीन।

October 18th, 2009 at 9:25 am
 11 

सचमुच बहुत शर्मनाक है यह स्थिति….कब बदलेगी ये मानसिकता…सोचकर दुःख होता है…

October 18th, 2009 at 10:43 am
 12 

आज इस ब्लॉग पर पहली बार आना हुआ और बहुत अफ़सोस हो रहा है कि आखिर क्यों इतने दिन तक हम इस ब्लॉग को पढने से महरूम रहे.
खैर !
अब तो आ ही गए हैं तो अफलातून भाई का सवाल दुहरा देते हैं
ये खुदा भी जेंडर बायस्ड है क्या
पता लगाना पड़ेगा

October 18th, 2009 at 11:21 pm
SHUAIB
 13 

टिप्पणी केलिए आप सभी का धन्यवाद।
शुऐब

October 19th, 2009 at 8:59 am
Saif Khan
 14 

SHOIB BHAI TUM TO APNE DIN SE GUMRAH HO GAYE HO AUR YE SAAB EK MUSALMAN KE LIYE JAYAZ NAHI. MAIN YE MANA NAHI KARTA KI AAP HUNDU BHAIYON KE SAATH UTHE AUR BAITHE MERE BHI SARE DOST HINDU HAIN UNSE MERI DOSTI KAFI ACCHI HAI AUR HINDUSTAN SE MUJHE BHI PYAR HAI
PAR DEEN SABSE UPAR HAI

ALLAH T ALA AAPKO SIDHE RASTE PE CHALYEIN

AMEEN

November 8th, 2009 at 3:54 pm
SHUAIB
 15 

@ Saif Khan. Bahut Shukria Saif Khan, pehli baar aap is blog per aaye. Aapki bat thik hai, Deen sabse acha hai magar Insaniyat usse bhi Uper hai.
Duwa karo ki ham sabhi Insan ek dosre ki izzat karen aur ek dosre ko samjhe.

Shuaib

November 9th, 2009 at 8:49 am
 16 

यह तो दुरस्त है के सफ़र में मज़हब का सवाल मूड ख़राब कर देता है लेकिन यह सिर्फ वक़्ति होता है , जैसे जैसे बातचीत बढ़ती है सब खुल जाते हैं , मुझे तो अब तक कोई ऐसा बंदा नहीं मिला जिसने मज़हब के नाम पर बेकार की गुफ़्तगू से सारा ही सफ़र बर्बाद कर दिया हो

November 9th, 2009 at 3:55 pm
 17 

सही कहा मित्र. पर बहन-माँ की गाली मत देना कभी. इतनी सी बात मान जाओ.

सैफ खान जैसे लोगों से दूर रहना दोस्त. इंसान बने रहोगे.

March 3rd, 2010 at 9:51 am

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