14 comments so far
शुऐब भाई, मेरे ख़्याल से आपको उर्दू प्लेनेट पर बने रहना चाहिए। क्योंकि वहाँ (उर्दू ब्लॉगर्स के बीच) आप सारे हिन्दुस्तान की नुमाइन्दगी कर रहे हैं और हिन्दुस्तानियों के ख़यालात आपके ही ज़रिए उर्दू जानने वालों तक पहुँच रहे हैं। कोई बुरा कहे या भला, आप अपना हिन्दुस्तानी नज़रिया उर्दू जानने वालों के सामने रखते रहें। इसलिए मेरा मानना है कि आपको फिर से उर्दू प्लेनेट पर अपनी फ़ीड जुड़वा लेनी चाहिए।
ज्यादातर लोगों के लिये विचारों की स्वतंत्रता का अर्थ होता है उन विचारों की स्वतंत्रता से, जिससे वे सहमत हों| यदि दूसरा उनके विचारों से सहमत न हो तो दूसरे के विचार रोकने के लिये कोई न कोई कारण ढ़ूढ लेते हैं| बहुत बिरले ही उन विचारों की स्वतंत्रता की बात करते हैं जो कि उनके विचारों से मेल न खाते हों
शोएब भैया,
१२५ करोड हिन्दुस्तानी आपके साथ हैं, मतलब दुनिया में हर पांचवां आदमी आपके साथ है, किस बात से डरना है।
वैसे मै चाहता था पढना आपके लेख, अफसोस कि हमें उर्दू नही आती। आपसे गुजारिश है कि हम जैसे उर्दू से अंजान लोगों के लिये उर्दू सिखाने का कोई चिठ्ठा शुरू करिये। मेरे दादा नाना सब उर्दू के बडे जानकार थे, क्योंकि तब यह सरकारी भाषा थी।
अशीष भाईः
बहुत शुक्रिया आपका और बिलकुल सही फरमाया आपने कि हर किसी को तो खुश नही कर सकते, जो भी लिखेंगे अपनी मरज़ी की लिखेंगे।
प्रतिक भाईः
बात ये है कि जहां पर मैं ने थूका अब वहां क्यों बैठूं? वैसे भि फीकर नॉट मैं वहां चलने वाली हर बात यहां अपने ब्लॉग पर लिखता रहूंगा और आप सबसे बताऊँगा कि पडोसी लोग हमारे बारे मे किया किया लिखते हैं। वैसे भी मैं ने उर्दू प्लानट पर अब हिन्दुसतान को सबसे आगे ही रखा है और हमारा हिन्दुसतान वहां आज भी आगे ही है।
जीतू भैयाः
धन्यवाद आपका - मैं आज भी डटा हुवा हुं पर बाहर से, मेरे हिन्दुसतानी होने पर फकर है और आज भी मैं अपने उर्दू ब्लॉग पर भारत शान मैं बहुत कुछ लिखत हूं जिसे पडोसी देश के लोग पढने आते हैं और खूब जलते हैं।
उन्मुक्तजीः
अपकी बात मे वज़न है और आपने सब कुछ सही फरमाया - मैं ये कहना चाहूंगा कि हम अपने ब्लॉग पर वही लिखें जो चाहते हैं वोह ना लिखे जो दूसरे पढना चाहते हैं।
छायाजीः
अगर १२५ करोड हिन्दुस्तानी पेशाब भी करदें तो पूरा पडोसी देश डूब के मर जएगा
—- हां जी मैं कोई उर्दू हिन्दी का उसताद तो नही पर कोशिश करूंगा कि हिन्दी से उर्दू सीखने का कोई फारमोला शुरू किया जाए - इस बारे मे मैं पहले जीतू भैया से राए लेना चाहूंगा कि ये काम कैसे शुरू किया जाए - आप उम्मीद रखें इस पर ज़रूर काम करूंगा कि हम हिन्दी ब्लॉगर्स के लिए उर्दू भी आनी चाहिए ताकि पडोस की हर खबर से खबरदार रहें।
बंधु शुएब, बहुमत के ख़िलाफ जाने की हिम्मत बहुतों में नहीं होती। हम प्रतीक भाई की बात से सहमत हैं कि आप उर्दू ब्लॉग जगत में भारत के नुमाइंदे हैं और इसलिये आपको उर्दू ब्लॉगिंग नहीं छोड़ना चाहिये। हमारा थोड़ी- बहुत उर्दू पढ़-लिख लेते हैं। हम ख़ुद भी एक उर्दू ब्लॉग शुरू करना चाहते हैं। कृपया बताएं कि अगर हमारा उर्दू टाइप करना चाहें तो कैसे करें?
शेखजीः हमारी हिम्मत बंधाने के लिए आपका धन्यवाद - जी हां मैं प्रातिक भाई की बात से सहमित हूं।
अमितजीः ज़रूर शुरआत करें और आप उर्दू मे भी ब्लॉग लिखना चाहें तो हमें आपकी खिदमत का मौका दें ![]()
Zack: ofcouse I know you; what I meant was I feel that your thoughts and thinking are like communist, I never referred you as communist. If you understood like that I apologies for that.
[...] और इससे भी बड़ी बड़ाई के पात्र हिंदी के चिट्ठाकार शुएब हैं जो उर्दू के चिट्ठों पर भारत का झंडा ऊंचा रखे हुए हैं और भारत को गाली देने वालों को निजी मेल भेजी कर, बकौल शुएब, उनकी मां-बहन कर देते हैं:) पड़ोसी देश के “जलने वालों” को शुएब ने कैसे और जलाया, इसका विवरण पढ़िए उनके ही चिट्ठे पर। [...]