17
Aug

इनसे मिलो -29

   Posted by: shuaib   in खुदा से मिलो

ये खुदा है

खुदा खुद कनफ्यूज़ है के कौन जीता - हिज़बुल्ला या इज़राइल? जबकि खुदा ने जितना होसका अमेरिका की खातिर लेबनान मे तबाही मचाई और खुश भी था कि इसके बाद ईरान को भी नचाएगा। लेबनानीयों को बेली डांस करवाते खुदा ने खुद अपनी टांग तोडली, ठीक होने पर कुछ नया कारनामा कर दिखाने की उम्मीद है। आज अरब देशों के चेहरे खुशी से खिल उठे, खुदा की सिर्फ टांग टूटी तो हिज़बुल्लाह की कामयाबी समझ बैठे। जिस दिन से खुदा दुनिया मे आया तब से सिर्फ अमेरिका को ही सुन रहा है, उसे डर है कि अगर बाकी देशों मे जाए तो लोग उससे उसका धर्म पूछेंगे अगर वोह मुसलमान है तो हिन्दू क्यों नही अगर ईसाई निकला तो पंजाबी क्यों नही? खुदा खुद नही जानता कि उसका धर्म कौनसा है और वोह परेशान है के उसने सिर्फ इनसान बनाए थे और आज जब दुनिया देखने आया तो सभी इनसान ग्रुपों मे बट चुके हैं। जापान ने अमेरिका को वारनिंग भेजी के खुदा सबके लिए आया है, उसे आसमान से दुनिया मे आए दो वर्ष होने को आए मगर अभी तक अमेरिका से बाहर नही निकला - हम जापानी लोग अगर चाहें तो खुदा जैसे दो-चार खुदा और बना सकते हैं। भारत ने खुदा को सत्य देखने पर उकसाया कि किस तरह बुरे का अनजाम बुरा होता है। खुदा ने दहाडते होए फरमायाः हमने कब किसी का बुरा चाहा? अगर वही अफगानिस्तान के तालिबान को दिखा देते तो हमारे हमले से पहले ही हथियार डाल देते - जैसा के अमेरिका ने उसामा बिन लादिन को मोहरा दिखाया और आज तक वोह अमेरिका के लिए एक मोहरा का रोल निभा रहे हैं। टांग टूटने के बावजूद खुदा ने बहुत ही गज़बनाक अनदाज़ मे फरमायाः खुदा को खुदा की कसम - जो अमेरिका को नही मानता वोह हमारा नही, लानत है उस पर जो अमेरिका का खाए फिर उसी को बुरा कहे - और हम ने अमेरिका मे रहना इस लिए पसंद फरमाया क्योंकि यहां हम सुरक्षित हैं — जारी

बाकी फिर कभी

This entry was posted on Thursday, August 17th, 2006 at 7:29 pm and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

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