सुबह जब खुदा की आंख खुली, सीधा भारत की ओर मुडा और कहाः बडे अजीब किस्म के लोग हैं, जबकि अफज़ल लटकने को तैयार है और दूसरी तरफ चंद लोग उसके लटकाने के खिलाफ पूरे आनंद के साथ आवाज़ लगा रहे हैं जैसे वो बच गया तो बडा नेता बनेगा अगर लटका ही दिया तो दूसरे अफज़लों को मौका मिलेगा। तभी अफज़ल की बेगम खुदा से इलतिजा कर बैठीः बडी मेहरबानी अगर अप मेरे अफज़ल की जगह ले लें वैसे भी खुदा को मौत नही आती - अगर उसे लटका दिया तो मैं दुनिया मे अकेली अपने बच्चे के साथ और अफज़ल जन्नत मे हूरों के साथ जो मुझे बरदाश्त नही। खुदा ने अपनी बात जारी रखीः हर इनसान की ज़िन्दगी और मौत खुदा के हाथ मे है मगर आतंकवादीयों से खुदा खुद खौफ खाता है, क्योंकि वो यकीनन हमारे स्वर्ग तक मिज़ाइल से निशाना बना सकता है। हम ने मुजाहिदीन से जन्नत का वादा किया, मगर वो बेचारे हमेशा से दुनिया ही मे बुरी मौत मारे जाते हैं। माना कि किसी ज़िनदा इनसान को फांसी पर लटकाना अच्छी बात नही, करना तो ये था आतंकवादीयों को देखते ही गोली मार देते तो आज अफज़ल को लटकाने की ज़रूरत ही ना पडती। सुबह नाश्ते के बाद दुआ की मेहफिल सजाई जिसमे खुदा ने थाईलैंड के लिए दुआए खैर मांगी और पूरी दुआ थाई सेना पर छोडी फिर कहाः उम्मीद है थाईलैंड मे पाकिस्तान जैसी हालत ना बने। पीछे से टोनी बलैयर ने भी अपने लिए दुआए खैर मांगी तो खुदा ने जवाब दियाः अब कोई फाइदा नही क्योंकि तुमहारे लिए उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। “लगे रहो मुन्ना भाई” को तीसरी बार देखते हुए खुदा मज़े लूट रहा था ऐन गांधीग्री पुस्तकों की सीन पर अमेरिका ने खुदा के कान भरेः मुशर्रफ की नई किताब पर टैक्स लगाना ज़रूरी है जिसमे खयाली पलाऊ की खयाली तरकीबों के सिवा कुछ भी नही। दूसरी तरफ इसाई साधू पोप बेंडिक्ट ने अपने हालिया लेक्चर पर नाराज़ मुसलिम नेताओं से खुलेआम मुलाकात पर खुल कर कहाः   इस मे नाराज़्गी कैसी? हम सब खयालों पर ईमान रखने वाले हैं, एक धर्म दूसरे धर्म के बारे मे जो खयाल रखता है वही खयाल को हम अपने लेक्चर मे ज़ुबानी कह गए गए। अप मुसलमान लोग हम ईसाई खयालों से सहमित नही तो हम कौनसा मुसलिम धर्म से सहमित रहें? बात खयाली है उसे खयालों मे ही रहने दें मगर यूं सडकों पर निकल आना, नारे बाज़ी करना ये सब अच्छी बात नही जिस से हमारे विचार आप मुस्लमानों के बारे मे और पक्का हो जाते हैं। पोप ने नारज़ मुसलमानों को दावत भी दीः आओ हम सब मिल कर अपने विचारों का सम्मेलन करलें, उम्मीद है हम सबके विचार जूठ साबित हों जिसका कोई सबूत भी नही - फिर आखिर मे हम सब मिलकर नए विचारों को जनम देंगे ताकि आने वाली पीढी को पूराने विचारों से पाक रखा जाए। जब लगे रहो मुन्ना भाई खतम हुई, खुदा ने फिर से चौथी बार देखने की ठानी तो अमेरिका ने याद दिलायाः मेहफिल लग चुकी है और लोग बाग अप के इनतेज़ार मे ऊंघ रहे हैं। मजलिस पहुंच कर खुदा ने दुपहर का भाषण पढना शुरू किया, अचानक पता नही खुदा को क्या सूझी पूरा भाषण घांधीग्री पर सुना दिया — जारी

बाकी फिर कभी

This entry was posted on Friday, October 6th, 2006 at 7:02 am and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

8 comments so far

 1 

सही राह पकड़ी हैं. जारी रखो.

October 6th, 2006 at 9:16 am
 2 

well done. keep it up.

October 6th, 2006 at 10:26 am
 3 

लगे रहो शुएब भाई

October 6th, 2006 at 10:44 am
 4 

सही महौल खींचे हो, लगे रहो, शुऎब भाई. शुभकामनायें.

October 6th, 2006 at 12:20 pm
 5 

क्या बात है, शुएब, बडे तल्ख अन्दाज मे दिख रहे हो!

October 6th, 2006 at 12:51 pm
 6 

शुएब भाई. बढिया लिखा है!!

October 6th, 2006 at 3:18 pm
नीरज दीवान
 7 

हा हा .. ये खुदा आपका पीछा नहीं छोड़ रहा है या आप ही पिले पड़ो हो उसके पीछे? लगे रहो शोएब भाई.. ख़ुदा खैर करे

October 6th, 2006 at 3:33 pm
 8 

लगता है खुदा से तैबा कराने की ठानी है।

October 7th, 2006 at 5:59 am

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