[ पाकिस्तान का पाकिस्तान पर हमला ]
 
बडा गज़ब हुआ, सुबह की चाय तो दूर दोपहर के खाने के लिए भी खुदा ने अपना दरवाज़ा नही खोला। ईद और दिपावली को गुज़रे एक सप्ताह हो गया मगर आज भी दरवाज़े के बाहर फकीरों का हजूम एक पर एक खडा है। खुदा से गरीबों का दुःख दर्द देखा नही जाता उसका दिल कमज़ोर है और ये बेचारे गरीब लोग आज भी यही समझते हैं कि खुदा के पास बहुत पैसा है हालांकि नोट छापने की मशीन तो इनसानों के पास है। जब से खुदा ज़मीन पर आया गरीब गरीब ही ठेहरा अमीर और ज़्यादा अमीर बन गया। खुदा को ना तो झोंपड़ों मे रात गुज़ारने का तजुर्बा है और ना ही लोकल ट्रेनों मे लटकने का। गरीब किसानों ने वर्षा के लिए जो दुआ मांगी थी और फिर पानी को ऐसा बरसाया कि पूरे के पूरे खेत ही उजड गए। गरीब की छत से टपकते पानी को भी इन्जोये करने का हुक्म दिया अगर बरदाश्त नही कर सकते तो किसी सिनेमा हाल जाकर नाइट शो देखने का फर्मान जारी कर दिया। गरीबों के पास खाने के लिए दो वक्त की रोटी नही मगर सारे जहां का दर्द “स्टार पल्स” दे दिया। खुदा ने चिल्लाते हुए कहाः आखिर विश्व से कब खतम होगी ये गरीबी? जितने गरीबों को मारो उतने ही पैदा होते जा रहे हैं। अमेरिका ने खुदा से वादा भी किया था कि बहुत ज्लद पूरे विश्व को गरीबी से पाक कर दिया जाएगा और गरीबों को फकीरी मे बदलते उलटा वो खुद कंगाल होने को है। जब शाम को चौकीदारी से लौट कर अमेरिका वापस आया तो खुदा ने पूछाः टोटल कितने भिकारियों को मारा? सलूट देते हुए अमेरिका ने खुदा को जवाब दियाः सरकार, रात का समां था और अँधेरे मे यूं Pakistani tribesmen on Monday gather around bodies during a funeral ceremony in Khar, the main town in the Bajur district. Missiles fired by Pakistani helicopters destroyed a religious school on the Afghan border Monday that the military said was a front for an al-Qaeda training camp, killing 80 people. The army said those who died were militants, but furious villagers and religious leaders said the predawn missile barrage killed innocent students and teachers at the school, known as a madrassa. (STR, AFP, Getty)महसूस हुआ जैसे पांच सौ तो ज़रूर मार दिए हैं। खुदा ने अमेरिका को कान के नीचे दो बजाए और आज का अखबार दिखायाः सिर्फ 90 भिकारी मरे हैं और बाकी 410 को क्या ज़मीन खा गई? सर झुका कर अमेरिका ने कहाः हमारा टार्गेट तो पांच सौ के ऊपर था, हमारे हेलीकाप्टर से एक रोटी क्या गिरी सभी फकीर आपस मे लड पडे। अमेरिका की सफाई सुन कर खुदा ने उसे शाबाशी दी, चलो कम से कम आपस मे तो लडवा दिया जिस से खुदा का खर्च बचा - हर दिन पचास फकीर भी मरें कोई बात नही आपस मे लडवाना ज़रूरी है – जारी

बाकी फिर कभी

This entry was posted on Tuesday, October 31st, 2006 at 1:49 pm and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

11 comments so far

 1 

ग़ैरत को ताक पर रखकर राज करने का अनुपम उदाहरण है पाकिस्तान सरकार. इन पर लानत है.
अद्भुत तरीक़ा है लिखने का शोएब भाई. आपके ख़ुदा का सैतीसवां पाठ मुझे बहुत पसंद आया.
खासकर यह लाइन - जब से खुदा ज़मीन पर आया गरीब गरीब ही ठेहरा अमीर और ज़्यादा अमीर बन गया। खुदा को ना तो झोंपड़ों मे रात गुज़ारने का तजुर्बा है और ना ही लोकल ट्रेनों मे लटकने का।

बहुत बहुत शुक्रिया लेख के लिए

October 31st, 2006 at 4:23 pm
 2 

काश खुदा आपका लेख पढ़ पाता।

October 31st, 2006 at 5:21 pm
 3 

खुदा सिरिज का जवाब नहीं, बहुत वजनदारी से बात कह जाते हैं आप अपनी.

October 31st, 2006 at 7:59 pm
 4 

शुएब भाई ,मर्मस्पर्शी लिखते हैं आप…….बहुत खूब, जारी रखें।

October 31st, 2006 at 9:09 pm
 5 

awsome stuff, almast fakir ho yaar shoaib.

October 31st, 2006 at 10:30 pm
 6 

बहुत खूब, शुएब्।

October 31st, 2006 at 10:42 pm
 7 

शुएब्, खुदा का यह लेख लिखने का अंदाज बड़ा सही है, पाकिस्तान ने पाकिस्तान में बमवारी की…एक देश ने अपने ही देश में बमवारी ये पहली बार सुना।
ये सब पैदल सेना भेज कर भी करा जा सकता था लेकिन तब नंबर का आंकड़ा शायद इतना नही पहुँचता।

एक बात भिकारी गलत है, सही शब्द है भिखारी। इसके बावजूद भी बड़ी अच्छी हिंदी लिखते हो।

November 1st, 2006 at 1:49 am
 8 

शुऐब भाई, आप तो उम्दा हज्व गो हो चुके हैं। क्या खूब‍ लिखा है।

November 1st, 2006 at 4:58 am
 9 

काश आपके लेख खुदा भी पढ़ पाता !
पर उसे अमरीका की मेहमाननवाजी से फ़ुर्सत मिले तब ना।

November 1st, 2006 at 7:00 am
 10 

बहुत सही लिखा है आपने शुएब भाई
पाक की ये हरकतें उसके आने वाले कल पर भारी पड़ेंगी

November 1st, 2006 at 7:27 am
 11 

मुझे चिट्ठो में कुछ एक चिजे पढ़नी बहुत पसन्द है, उनमें खुदा वाली आपकी पोस्टे भी शामिल है.
बस लिखते रहो.

November 1st, 2006 at 3:11 pm

One Trackback/Ping

  1. फ़ुरसतिया » हिंदी में कुछ वाक्य प्रयोग    Oct 31 2006 / 5pm:

    [...] जान हथेली पर रखना:- शुएब जान हथेली पर रखकर (किसकी) कट्टरपंथियों के खिलाफ लेख लिखते रहते हैं। [...]

Leave a reply

Name (*)
Mail (will not be published) (*)
URI
Comment