[  सद्दाम को मौत ]
 
उसामा बिन लादेन को घसीटते हुए थाना ले आए जब उसके कपडे उतारे तो थाना मे सब की चीखें निकल पडीं और डर के मारे कांप उठे। किसी इमारत की लिफ्ट मे ऊपर नीचे खेलते हुए उसामा के कपडों मे खुदा पकडा गया। दो दिन पहले खबरों मे बताया भी था कि न्यूयार्क के म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चोरी हो गए। पता नही क्यों, खुदा को भी शरारत सूझती है आखिर क्या ज़रूरत थी म्यूज़ियम से उसामा के कपडे चुरा कर पहनने की? अब हालत ये है कि अगर उसको समझाएं तो गज़ब मे आकर कहीं भी भूकंप ला सकता है। आज खुदा की नींद हराम, सुबह चार बजे ही जगा दिया कि जनाज़ा मे जाना है, उठते ही बडे गज़बनाक अंदाज़ मे अंगडाई ली शायद ज़िनदगी मे पहली बार किसी की मृत्यु पर जाना है। दांत साफ करते हुए खुदा को खयाल आया कि कल रात डिनर पर अमेरिका ने पूछा थाः क्या आप अर्थी को कंधा देने का तजुर्बा रखते हैं? खुदा ने खिलखिलाते हुए जवाब दियाः हमें तो जनाज़ों मे जाने का तजुर्बा नही अलबत्ता जनाज़े के जुलूस को भी बारात की तरह इनजोए करते हैं। इस पर अमेरिका ने कहाः तब तो आपको रात भर प्रेक्टिस करलेनी चाहिए क्योंकि कल सुबह आपको एक महान हस्ती की अर्थी को कंधा देना है। दांत साफ करने बाद अभी तक नाश्ता नही मिला मगर सद्दाम का खत मिला जिसकी पहली लाइन मे ही खुदा को अमेरिकी चमचा लिखा, आगे लिखाः अपनी मौत की खबर सुन कर मैं ने खुदा पर दुबारा ईमान लाया मगर अब क्या फाइदा वो खुद अमेरिका के कब्ज़े मे है। सद्दाम का खुला खत पढ कर खुदा को बहुत रोना आया फिर सीधा वाइट हाऊस मे घुस आयाः किसी भी हाल मे हमें ईराक जाना है, वहां बेचारा सद्दाम को हमारी मदद की ज़रूरत आंपडी है। अमेरिका ने मना किया, इस वक्त आपका वहां जाना मुनासिब नही, पूरे ईराक मे दंगा फसाद और हर तरफ खून की नालियां बह रही हैं - खुदा ना करे अगर खुदा को कुछ हो जाए तो फिर विश्व को कौन चलाए। अमेरिका ने खुदा को समझायाः चुनाव सर पर हैं और ऐसे मौके पर सद्दाम को मौत की सज़ा सुनाना ज़रूरी था - एक ऐसा शक्स जो पच्चीस वर्षों तक अपनी ही जनता पर खुद को खुदा मनवाता रहा वो पेट्रोल की ताकत से पूरे गल्फ पर खुदा बने उडना चाहता था और जब हम ने उसका सारा पेट्रोल चूसा तो वो नीचे आगिरा। इसी दौरान ईराक से खुदा को फोन आने शुरू होएः अगर आप वाकई खुदा हैं तो कृपया अली की मज़ार को सौदी अरब मे शिफ्त करदें बडी मेहरबानी आपकी, यहां हम सुन्नी-शिया आपस मे एक दूसरे के लिए खून के प्यासे हैं। खुदा ने दिलासा दियाः जब वो ईराक आए तो एक साथ मिल बैठ कर मसला हल कर लेंगे। क्या खाख हल करेंगे? सेकडों वर्ष गुज़र चुके आज तक ये मसला हल नही हुआ कि कौन खुदा की औलाद है हद तो ये है कि खुदा खुद नही जानता कि वो किस का पैदा किया है? अगर वो एक बाप का होता तो आज विश्व मे इतने सारे धर्म नही होते और ना ही धर्म के नाम पर ये फसाद। आज ऐसे वक्त जहां पूरे विश्व मे ज़ात और धर्म के नाम पर फसाद और जंग का माहूल है सब ताकत की ज़ोर पर खुदा बनने लगे और दूसरी तरफ खुद खुदा खामोश तमाशा देख रहा - पता नही हम इनसानों को आपस मे लडवा कर खुदा क्या साबित करना चाहता है। सद्दाम ने कभी सोचा तक नही कि खुदा को कभी मौत आए, इतना तो मालूम है कि विश्व पर अपनी तरह के बहुत सारे खुदा आए और उनके आखिरी समय मे बडी शर्मनाक मौत मरे — जारी

बाकी फिर कभी

This entry was posted on Monday, November 6th, 2006 at 2:47 pm and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

3 comments so far

 1 

ईराक की स्थिति पर अच्छा लेख लिखा है
पर सद्धाम का चित्र ठीक से लगा दें तो पूरा पढ़ने में आये

November 6th, 2006 at 9:20 pm
 2 

बहुत खुब शुएब और यह तो बहुत ही सटीक कहा है “अपनी तरह के बहुत सारे खुदा आए और उनके आखिरी समय मे बडी शर्मनाक मौत मरे”
निचे वाली तस्वीर हटा देना वह लिखे हुए के उपर आ रही है, इसलिए पुरा नहीं पढ़ पा रहे.

November 7th, 2006 at 4:02 am
SHUAIB
 3 

शुक्रिया bhuvnesh भाई और संजय भाई
मैं ने नीचे वाला सद्दाम का फोटो निकाल दिया।
आप दोनों का धन्यवाद :)

November 7th, 2006 at 6:08 am

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