ये खुदा है – 43
[ पाकिस्तान मुल्लगिरी की ओर ]
अंतर राष्ट्रीय मुल्ला गिरी सम्मेलन मे सब मुल्लाओं ने एक साथ खुदा पर लानत भेजाः इस खुदा को जिस खुदा ने बनाया उस खुदा पर भी लानत है जिसने हमारे लिए ऐसा बद चलन खुदा भेजा। वर्षों से हम दुआ करते ही रहे कि खुदा मरे तो पाकिस्तान पर गिरे मगर वो ज़िन्दा सलमत अमेरिका मे उतरा। हम उसकी अर्थी को इबादत समझ कर कंधा देने तैयार थे मगर लानत है खुदा पर जो हमारी अर्थी का सामान लेकर उतरा। काश हम बिन खुदा के पैदा होते, काश हम खुद खुदा बन कर पैदा होते या फिर पैदा ही ना होते। बेशक हम मुल्ला हैं मगर खुदा की तरह अमेरिकी चमचा नही, खुदा हाकिम है तो मुफ्ती हैं, वो मालिक है तो हम मुजाहिद हैं, वो सब को पालने वाला है तो हमें चंदा देने वाले बहुत हैं। रात दिन सज्दे ठोंक कर छाती तक दाढी लिए हम इनतेज़ार करते ही रहे कि खुदा की मदद करीब है, मगर ज़माने बदल गए जहां कहीं भी अपनी मुल्लागिरी चलाने की कोशिश की हमेशा मुंह की खानी पडी। लानत है हर उस दिन पर जिस दिन मुल्ला पैदा हुआ, पता नही हमारे पुर्खों ने ऐसा क्या पाप किया कि हम मुल्ला लोग शुरू ज़माने से बेइज़्ज़त रहे। हमारे पास कोई हुनर नही और करने को कुछ आता नहीं चार शादियां करके बदनाम हुए फिर जिहाद का कारोबार शुरू किया तो बदनामी ने हमारा पीछा नही छोडा। दूसरों को रहम की नज़र से देखने वाले ऐ खुदा आखिर हम मुल्लाओं का कसूर क्या? क्या वाकई हमारी सोच झूठी और गंदी है? हम ने अपने परखूँ के विचारों पर ईमान लाया, हमें जो धार्मिक संसकार मिले उस से दूसरे धर्मों के लिए खुद ब खुद नफरत जाग उठी। समझ मे नही आता ये नफरत हमें अपने परखूँ से मिली या हमारे धार्मिक संसकार से? शुरू दुनिया से लेकर आज तक हमारी पूरी तारीख खून से रंगीन है, क्या खाख ज़िन्दगी पाई हमें कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं सिर्फ एक खुदा पर एतबार था अब अफसोस कि वो खुद अमेरिकी पालिसीयों का तरफदार है। यकीन ही नही आता क्या यही वो खुदा है जो हमने अपने परखूँ से सुना था, काश खुदा बतादे कि हमें कौनसा रास्ता अपनाना होगा अपने परखूँ वाला या ग्रीन कार्ड वाला? हम जो दूसरे धर्मों से नफरत करते रहे आज सारी दुनिया एक होकर हमें नफरत और हिकारत भरी नज़रों से देख रहे हैं और हमारी पवित्र जंग (जिहाद) को आतंकवादी कहते हैं। पूरे विश्व से मुल्लागिरी का दौर खतम होने को है और अपनी मुल्ला गिरी को काईम रखने के लिए हमारे पास जिहाद के सिवा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं। इसी लिए पाकिस्तान को दूसरा सौदी अरब बनाने निकले तो हमारे अपने टांग खींचने लगे। इस वक्त पूरे विश्व मे अमन और मिलाप की बातें हो रही हैं और यहां हमारे अपने साथ छोडने लगे। हम खुश थे कि खुदा सिर्फ हमारे लिए धरती पर आया है मगर जब से आया हम मुल्लाओं की वाट लगी है। ईराक, अफगान और लेबनान मे हम लोग मदद के लिए पुकारते ही रहे मगर खुदा के सर पर जूं तक नही रेंगी। क्या खुदा भी अपने बंदों मे फर्क रखाता है? हमें ज़ातों मे बांट कर क्या तमाशा देखना चाहता है? दुनिया वालों को साफ साफ क्यों नही बताता कि हम मुल्ला लोग ही तेरे सगे हैं। मगर यहां हमारी पैदाइश भी लानती, वजूद भी लानती हमारा युनिफार्म तक लानती जबकि हम मुल्ला यही समझते रहे कि हमारा लानती होना खुदा को खुश करना है। खुदा को चाहिए कि आज हमारा ज़हन कलियर करदे अगर हमारी मुल्लागिरी दागदार और ढकोसली है तो फिर क्यों हमारे परखूँ ने हमें जन्नत का मेम्बर बताया? जबकि जिन्दा रहने तक दुनिया मे कहीं भी इज़्ज़त नही मिली तो कैसे जन्नत पर यकीन करलें? मुहज़्ज़िब तालीम कि बजाए नफरत से भरी किताबें हम पर फर्ज़ हुईं, अपने दिल मे नफरत पालने को इबादत समझे और नफरत से हट कर सोचने को गुनाह समझे। हमारी रात दिन इबादतों का यही सिला है कि पूरी दुनिया हमसे नफरत करती है। आखिर हम मे ऐसी क्या खराबी है कि हमें कोई पसंद नही करता? हमारा नाम व निशान मिटाने की कोशिश हो रही है, आज हालत ये है कि हमारे अपने हमें अमेरिकी जाल मे फंसाने की तैयारी मे हैं। हमारी कौम बिखर चुकी है, तेज़ रफतार ज़माने के साथ हमारे अपनों की सोच बदल गई है अब हमें अमेरिका से ज़्यादा हमारे अपनों से डर होने लगा है। चारों तरफ से हमें घेर रखा है, ऐ खुदा तो हमें बचाले।
खुदा भी अपनी भडास उतारा
सच्ची बात तो ये है कि अब अपने पास पहले जैसी खुदाइयत नही रही, धरती पर आने के बाद बची कुची खुदरत अमेरिका को सोंप दिया। ज़िन्दगी मे पहली बार सेर सपाटा के लिए हम धरती पर आए फिर पूरी दुनिया छान्ने के बाद अमेरिका मे बसेरा करना पसंद फर्माया यहां करवट बदलने की भी तकलीफ नही पूरा सिस्टम कम्प्यूट्राईज़्ड है। वर्षों से दुनिया को पालते हमारे दिमाग की मां बहन एक होगई, याद भी नही आता पहले इनसान बनाया था या बंदर? अपने साबित होने की कसम हमारे ख्वाब व खयाल मे भी ना था कि धरती पर इतने सारे धर्म देखने को मिलेंगे, ताजुब है अपनी गज़ब खोपडी पर क्या अजब इनसान बनाया चाहे तो खुदा को भी कैद मे डाल दे। तुम से पहले भी विश्व मे बहुत सी कौमें आईं कई ने अपने आप को खुदा मनवाया और कोई खुद को खुदा का औतार बताया खुद किताबें लिख कर उसे खुदा का फर्मान बताया। अपनी गज़ब खोपडी की कसम हम ने उन्हें भूकंप और तूफानों से तबाह व बर्बाद कर दिया अब फिलहाल ये काम अमेरिका को सोंप दिया। दो पल खुशी के लिए बलात्कार करलें तो हमे ऐतराज़ नहीं, अयाशी और सारे गलत काम हमें कबूल हैं कोई डिस्को जाए या भाड मे हमारा साया उन पर कुरबान मगर हमारा नाम लेकर इनसानों को धर्मों मे बांटना हमें बरदाश्त नहीं। हम ने पहले इनसान बनाया उसको प्यार से बंदर पुकारा फिर नंगा ज़मीन पर उतार दिया। बस वो दिन और आज का दिन फिर इनसानों को हम ने अब देखा। हैरत है कि इनसानों ने अपने नाम रख लिए, कुंबों मे बट कर धर्म बना लिए और खुद किताबें लिख कर लेखक मे खुदा का नाम जोड दिया। हम तो अंपढ हैं हमें ये भी नही पता कि हमारा नाम खुदा किसने रखा? हम पैदाइशी लावारिस हैं जन्नत के खेत मे नंगे पडे थे फिर थोडी जवानी आई तो महसूस हुआ कि हम खुदा हैं
ऐ मनहूस मुल्लाओं लानत है तुम पर, तुम्हारे घटिया विचार और ढकोसली हरकतों पर ना हंसने को जी चाहता है ना रोने को। हमें क्या खुजली थी के तुम्हें धर्मों मे बांट कर तमाशा देखें? हमें तो ये भी पता नही था कि तुम लोग घने जंगल की तरह धरती पर आबाद मिलोगे। याद रखो खुदा एक है और उसके नज़दीक सभी इनसान एक जैसे हैं, हमारा कोई सानी नही और ना ही कोई खबरी, हमारा दीन मज़हब कुछ नही इसलिए तुम्हारा भी नही – हम ने तुम्हें सिर्फ इनसान बनाया कोई धर्म का नाम नही दिया। खुदा को खुदा की कसम, हम ने आज तक किसी की मदद नही की बल्कि इनसान खुद एक दूसरे का मददगार है यहां तक कि तुम को चांद पर पहुंचाने मे हमारा एक भी हाथ नही। तुम इनसान अपने भोजन के लिए भी खुद ज़िम्मेदार हो क्योंकि खुदा को चाय तक बनाना नही आता, अच्छी बुरी सोच के लिए भी तुम ही ज़िम्मेदार हो अपनी बीवियों को लगाना और बच्चे पैदा करना सब तुम्हारे हाथ मे है और फिर अपने बच्चों की परवरिश भी तुम्हारे ही ईख्तियार मे है चाहे डाकू बनाओ या मुल्ला तुमहारी मर्ज़ी। हम ना हिन्दू हैं ना मुसलमान हमारा सटाईल ही अलग है, खुदा को खुदा ही रहने दो उसे सूली पर ना चढाओ और ना ही उसके चार हाथ लगाओ इसकी बजाए लाली पौडर लगा दो और हमारी कमर मे घूंगरू भी बांध दो कहो तो तुम्हारे लिए दो ठुमके लगा दें। बस बहुत हो गया बंद करो ये मुल्ला गिरी और फत्वा गिरी। हम ने तुम्हें कोई हक नही दिया सब को बराबर इनसान बनाया - लानत है तुम मुल्लाओं पर जो खुदा का नाम लेकर आम लोगों को ज़ातों मे बांटते हो। सीधे हो जाओ अपनी पहचान इनसानों से बनाओ मुल्लाओं मे नही - अपने दिमाग से जन्नत का खयाल निकाल दो ये दुनिया ही जन्नत है तुम्हारे अच्छे और बुरे कर्मों के लिए। हमारी गज़ब खोपडी क्या हसीन दुनिया बनाया फिर इनसानों ने इसे सजाया। इतना लम्बा थूकने के बावजूद भी नही सुधरोगे तो फिर अमेरिका को अपना पिछाडा दिखाने तैयार रहो। जारी
बाकी फिर कभी
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