[ ये खुदा है - 44 ]
कल ईराक मे 200 इनसानों की हैबतनाक मौत पर आज खुदा ने रोते रोते अपनी हालत बिगाडली फिर शाम को अमेरिका से मुलाकात पर हंसते हुए फर्मायाः बहुत मज़ा आया, इन ईराकियों को आपस मे लडवाकर हमारे अज़ाब का खर्च बचाया। हर जानिब खून मे लतपत इनसानी छेतडों को देख खुदा को अजीब लुत्फ आने लगा, क्यों ना इस तरह के मंज़र बार बार देखने को मिलें। सद्दाम, तुम खैर मनाओ कि अमेरिका ने तुम्हें ज़िनदा रखा - क्या तुम्हें यही दिन देखने का इनतेज़ार था? खुदा को खुदा की कसम, होनी को कौन टाल सकता है चाहे लेट कर मरे या बम फटने से ये इनसान की किस्मत है जिसमे खुदा का एक भी हाथ नहीं - - जारी
बाकी फिर कभी
उर्दू भाषा मेः یہ خدا ہے ـ 44
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on Friday, November 24th, 2006 at 3:25 pm and is filed under खुदा से मिलो.
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