[ ये खुदा है - 44 ]
कल ईराक मे 200 इनसानों की हैबतनाक मौत पर आज खुदा ने रोते रोते अपनी हालत बिगाडली फिर शाम को अमेरिका से मुलाकात पर हंसते हुए फर्मायाः बहुत मज़ा आया, इन ईराकियों को आपस मे लडवाकर हमारे अज़ाब का खर्च बचाया। हर जानिब खून मे लतपत इनसानी छेतडों को देख खुदा को अजीब लुत्फ आने लगा, क्यों ना इस तरह के मंज़र बार बार देखने को मिलें। सद्दाम, तुम खैर मनाओ कि अमेरिका ने तुम्हें ज़िनदा रखा - क्या तुम्हें यही दिन देखने का इनतेज़ार था? खुदा को खुदा की कसम, होनी को कौन टाल सकता है चाहे लेट कर मरे या बम फटने से ये इनसान की किस्मत है जिसमे खुदा का एक भी हाथ नहीं - - जारी

बाकी फिर कभी

उर्दू भाषा मेः یہ خدا ہے ـ 44

This entry was posted on Friday, November 24th, 2006 at 3:25 pm and is filed under खुदा से मिलो. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

4 comments so far

 1 

यार, यह क्या? सिर्फ दो लाइनो में निपटा दिया.
भैये समय निकाल कर पुरा लिखो.

November 24th, 2006 at 4:50 pm
 2 

आप खुद टिप्पणी मे दो चार लाईन लिख देते तो मैं उसे पोस्ट मे जोड देता :P ;)

November 24th, 2006 at 5:24 pm
 3 

भाई मेरे जब इंसान मरते है, तब दर्द होता है. ऐसे में जब उस पर आप लिखते हो तो मन को शुकुन मिलता है. इसलिए समय निकाल कर खुदा को चिट्ठे पर ले आया करो.
अब खुदा आपसे लिखवाना चाहता है तो हम क्या करें. हम तो रोज कोफी मग लिए हाजिर होते हैं पर बात जमती ही नहीं.

November 24th, 2006 at 7:25 pm
 4 

यार, बहुते छोटा लिखे हो, कहीं टिप्पणी समझ कर क्न्फ्यूज तो नहीं हो गये?

November 26th, 2006 at 5:10 am

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  1. نئی باتیں / نئی سوچ » Blog Archive » یہ خدا ہے ـ 44    Nov 24 2006 / 3pm:

    [...] ہندی زبان میں: ये खुदा है - 44 [...]

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