Archive for January, 2007

चूंकि “ख़ुदा” पर किस्तें, पहले उर्दू मे लिखना शुरू किया था - फिर किस्त नम्बर २२ या पच्चीस से उसी सीरियल नम्बर के साथ हिन्दी मे भी एक साथ पोस्ट करने लगा। जब भी मुझे फुरसत मिले तब उर्दू मे शुरू की लिखी किस्तों का ट्रांसलेट हिन्दी मे भी पोस्ट करने की कोशिश करूंगा।

अब तक ख़ुदा सिरीज़ की 49 क़िस्तें पोस्ट करचुका हूं, अब पचासवी किस्त लिखने का काम जारी है। चूंकि ये पचासवीं किस्त कुछ ज़्यादा लम्बी होती जा रही है पता नहीं किस बात पर लेख खतम हो लेकिन लिखने का काम जारी है।

आप सभी को धन्यवाद और शुक्रिया अदा करता हूं जो ख़ुदा की सिरीज़ को पढकर पसंद किया और अपनी टिप्पणीयों से नवाज़ा।

ख़ुदा की पचासवीं और शायद आखिरी किस्त का इनतेज़ार है। वैसे भी इन किस्तों को लिखना बंद करने मेरा दिल नहीं मानता।

14
Jan

धन्यवाद

   Posted by: शुऐब    in हिन्दी ब्लॉगिंग

अपने हिन्दी चिटठे को जिस जिस ने भी वोट दिया - ख़ुदा उनके पैर चूमता है - आप ख़ुदा के आगे झुको और ख़ुदा आपके आगे (हिसाब बराबर) ;)

पिछले दो सप्ताह से बहुत बिज़्ज़ी हूं, एक तो अपनी कम्पनी Dubai Investment Park (free zone) मे शिफ्ट हुई और दूसरा काम पहले से ज़्यादा बढ गया है। अपने फ़्लाट से दफ्तर जाने के लिए तकरीबन दो घंटे लगते हैं और वापस आने के लिए भी - और काम का समय नौ घंटे - यानी चोदह पंदरह घंटे सिर्फ कम्पनी के वासते फिर रात दस बजे घर आओ खाना वाना खाकर सो सजाओ बस यही है ज़िन्दगी आज कल।

इस चिट्ठे को वोट देने और तीसरा नम्बर दिलाने पर आप सभी हिन्दी चिट्ठाकारों और ख़ास कर जर्ज साहिबान और तरकश डाट कॉम का बहुत बहुत धन्यवाद और देर से धन्यवाद के लिए क्षमा भी चाहता हूं। फ़िलहाल ज़िन्दगी बहुत तेज़ भाग रही है, बहुत ज्लद ख़ुदा की सिरीज़ एक नये अंदाज़ के साथ दुबारा ले आओंगा।