Archive for March, 2007

31
Mar

हिजडे

   Posted by: शुऐब    in टैम पास

हमारे डिपार्टमेंट मे एक Under wear Merchandiser है जिसका नाम श्रीपाद हेग्डे जो नार्थ कर्नाटका से है। सभी उसको हेगडे ही बुलाते हैं मगर अरब भाषा मे ग,ड,प,च आदी नहीं होते - तो हमारा बॉस हेगडे को यूं बुलाता है ‘हिजदे’ और हमें यूं सुनाई देता है ‘हिजडे’ - तकरीबन दिन मे बीस बार बुलाता हैः हिजदे!! :D

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अभी एक सप्ताह पहले केरल (सौथ इंडिया) से एक मलबारी ने हमारी कम्पनी जॉइन किया, वो आया विज़िट वीसा पे और विज़िट पर आने वाले काम मिलने पर भी दूसरे अच्छे जॉब की तलाश मे रहते हैं। हमारी कम्पनी ने अख़बार मे Recruitment का ऐड दिया जिसमे Fax नम्बर शारजाह का दिया था। अब ये नया बेचारा मलबारी को क्या मालूम कि हमारी कम्पनी की ब्रांच शारजाह मे भी है, उसने झट से अपना Resume भेज दिया जो वापस हेड आफिस दुबई को मिला :D

20
Mar

मैदान मे ख़ुदा

   Posted by: शुऐब    in खुदा से मिलो

[ ये ख़ुदा है - 54 ]

बडा गज़ब हुआ, पहली बार ख़ुदा को बुख़ार चढ गया। ऐसा नहीं कि बीमारी को छेड बैठा - बैठे बैठे शौक़ मे दबाकर आईस-क्रीम खालिया। और खाता क्यों नहीं आज उसकी सालग्राह का जशन था - तीन वर्ष पूरे हुए मेहमान बनकर अमेरिका मे उतरा था। अभी बुखार नहीं छूटा वेस्ट इंडीज़ जाने की ज़िद पकड बैठा। ख़ुदा को समझाया भी कि यहीं से टीवी पर लाईव देख कर अपना कलीजा थंडा करले मगर अब तो उसपर हिचकियां तक शुरू होगईं। आख़िर स्टेडियम जाने की क्या ज़रूरत? आऊट को नॉट आऊट करदे या फिर गज़ब मे आकर कोच को ही मार डाले।

पहले तो स्टेडियम मे ख़ुदा को आने नहीं दिया, वो अपने साथ ढेर सारे पटाख़े उठा लाया फिर सेक्यूर्टी गार्डस से हाथापाई होगई। कॉमिंट्रेन ने ख़ुदा को आवाज़ लगायाः ख़ुदारा ख़दा की तरह किसी कोने मे जाकर बैठ जाएं और प्लीज़ गैर-जानिबदाराना हरकतों से बाज़ रहें। यकदम ख़ुदा ने चिल्लाते हुए कहाः लानत है स्क्यूरिटी गार्डस पर, अम जनता की तरह ख़ुदा को पीट दिया। फिर फर्मायाः अरे नालायकों कमबख़्तों, हम बेव्कूफ़ थोडि हैं जो यहां चौके छक्के गिन्ने आए - हम यहां सट्टा लगाने को आए हैं। है कोई माई का लाल जो हमसे सट्टा लगाए? मगर ख़ुदारा कोई हमसे हमारी ख़ुदाई ना मांगले।

आज ९ वां विश्व क्रिकेट कप का पहला बाबरकत दिन है, ख़ुदा से कहा गया कि वस्ट-इंडिज़ और पाकिस्तान दोनों के लिए दुआ करे मगर कोई चमतकार ना चलाए और अच्छे दर्शकों की तरह बैठ कर मेच का लुत्फ़ उठाए। मगर ख़ुदा को सट्टा लगाने का जुनून सर चढ कर बोल रहा था, कॉमिंट्रयन का माईक छीन कर कहाः वल्लाह, आज हम जानना चाहते हैं कि फ़ुटबॉल पर सट्टा लगाने से अच्छी कमाई होगी या क्रिकेट खेल पर। फिर अपना मूंह बसौर कर फर्मायाः सारा जहां बनाया मगर ख़ाक़ एक नोट छापने की मशीन हम से ना बनी।

ख़ुदा ने अपने दोनों हाथों मे पाकिस्तान और वस्ट-इंडीज़ के तिरंगे थाम लिया और बाकी हाथों से पटाखे खोलने लगा कि अचानक जूते चप्पलों की बोछाड शुरू होगई। पाकिस्तानी दर्शकों ने हल्ला मचा दिया, हमारी इबादतों का यही सिला मिला कि हम कहीं के ना रहे यहां तक कि खेल के मैदान से भी बाहर भगादिया। ज़बर्दस्त चीख़ मार कर ख़ुदा ने कहाः अब बस भी करो, हमें कौनसा जूते चप्पलों की दुकान खोलनी है? तुम्हारे निकम्मे खिलाडियों पर अपना गुस्सा उतारो, अपने उजडी उम्र और मोटे खिलाडियों का गुस्सा हम पे काहे कर रहे हो। वल्लाह, हम तो एक अच्छे दर्शक की तरह खेल देखने आए हैं ना कि अपनी चमतकारी से तुम्हें जिताने। तुम्हारे खिलाडियों मे अगर शौख़ व जज़बा होता, अपनी कौम को ख़ुश करना चाहते तो वो ज़रूर काम्याब होकर जाते। मगर तुम्हारे खिलाडियों के खिलाडी ख़ुद करप्ट हैं, तुम आम जनता को लूटा है और उसका सिला ये मिला कि उन्हें खेल के मैदान से अपना मूंह लटकाए बाहर जाना पडा।

भारती खिलाडियों ने अपना कॉलर चढाकर ख़ुदा से अर्ज़ कियाः हमने बर्मोडा खिलाडियों को भगाया दिया और आगे श्रीलंकन खिलाडियों को भी दो चार हाथ लगा कर भेजदेंगे। ख़ुदा से एक बिंती है कि विश्व कप तो दूर की बात मगर कम से कम फाईनल तक वस्ट इंडीज़ मे हमें इज़्ज़त से रखे। अचानक एक दर्शक ने ख़ुदा का कॉलर पकड के पूछलियाः अगर आप वाकई ख़ुदा हैं तो ईराक़ मे अमन कायम करके दिखाओ। वहां हर दिन दर्जनों कट रहें हैं, मज़लूम लोग इस उम्मीद से दुआएं कर रहे हैं कि ख़ुदा हमारी मदद के लिए आने ही वाला है - मगर ख़ुदा तो यहां स्टेडियम मे ऊटपटां हरकतें करने मे मश्ग़ूल है।

दर्शक को खींच कर चमाट मारने के बाद ख़ुदा ने फर्मायाः वल्लाह, हम सिर्फ ख़ुदा हैं, ईराक़ मे अमन कायम करने के लिए अमेरिका ज़िन्दा है और यही इस नये ज़माने का पैग़म्बर भी है जो सज़ा भी दे और दवा भी। और फर्मायाः हम तो सैर स्पाटे के लिए धर्ती पर उतरे थे, चंद दिन और मज़े करने के बाद वापस अपने स्वर्ग चले जाएंगे। गाल सहलाते हुए दर्शक ने पूछाः अमेरिका जैसे ज़ालिम को आपने अपना पैग़म्बर चुनलिया? समझ मे नहीं आता कि आपके सर मे दिमाग़ है कि गोबर?? खींचकर दुबारा चमाट मारने के बाद ख़ुदा ने दर्शक से कहाः मियां, हम ख़ुदा हैं कुछ भी कर सकते हैं, हर एक को मौक़ा देंगे मगर फिलहाल अमेरिका मे हम मेहमान हैं और हमारा मूंह ना खुलवाओ क्योंकि हम अपने मेज़बान को नाराज़ नहीं करना चाहते।

कॉमिंट्रयन ने दुबारा आवाज़ दियाः ख़ुदा को उसके ख़ुदा होने कि क़सम, ख़ामोश बैठ कर खेल देखे वर्ना उठ कर बाहर चला जाए। बर्मोडा के खिलाडियों ने ख़ुदा के आगे मातम शुरू करदिया, पहली बार पूरी उम्मीद से आए थे, बच्चा समझ कर भारती खिलाडियों ने हमें रोंद डाला। ख़ुदा ने बर्मोडा खिलाडियों को जवाब दियाः आज अगर भारती खिलाडी तुम्हें नहीं रोंदते तो वहां पूरे भारती अपने खिलाडियों को रोंद डालते। दाढी खुजाते हुए ख़ुदा ने कहाः हम ने कई बार फर्माया भी था कि नौजवान छोकरों को खेलने का मौक़ा दें, इनके अंदर बहुत कुछ करने के जज़बात होते हैं। अभी बंगलादेश की मिसाल लेलो ग़रीबी के बाव्जूद वहां के खिलाडी खेल के मैदान मे भी अपने देश की इज़्ज़त के लिए खेलते हैं। इन्हें मालूम है कि ये जंग के मैदान मे जीत नहीं सकते मगर खेल के मैदान मे अपनों का दिल जीत कर सबसे बडी जंग जीत सकते हैं।

ख़ुदा की अनापशनाप बक्वास से तंग, स्क्यूरिटी गार्डस ने उसे उठाकर मैदान से बाहर करदिया। और यहां मीडिया वालों ने ख़ुदा को घेरे मे लेकर बॉब वूल्मर की अचानक मौत पर प्रश्नों की बोछाड करदी। ख़ुदा ने कहाः अरे यारों, बॉब वूल्मर मरा नहीं बल्कि उसे मार — दिया — गय — ह - - - - - - - सामने किसी ने ख़ुदा के मूंह पर हाथ रख दिया - - - - - और कान मरोड कर ख़ुदा से कहाः क्या अनापशनाप बक रहे हो? आपको राज़ बताने का बडा शौक़ है - अभी पिछली किस्त मे आपने अपना नाडा भी खोल दिया था। शर्मिंद्गी छुपाते हुए ख़ुदा ने दुबारा मीडिया वालों से कहाः पहले पोस्ट मार्टम होने दें तभी कुछ कहा जासकता है - आप मीडिया वाले दो दिन बाद हमारे पास आना जवाब के लिए। अब हम बंगलादेश जाना चाहते हैं ताकि उन्हें मुबारकबादी दे आएं। हमारे लिए हवाई बघ्घी तयार की जाए क्योंकि आजकल हवाई जहाज़ मे जाना भी जानलेवा खतरा है।

एक रिपोर्टर ने ख़ुदा से स्वाल पूछाः इस बार विश्व कप किसके हक़ मे जाएगा? ख़ुदा ने तुरंत जवाब दियाः विश्व कप वही ले जाएगा जो अच्छा खेलेगा। ख़ुदा पर एक और स्वाल दाग़ाः आप भारत और पाकिस्तान से क्यों ख़फ़ा हैं, शुरू मे ही दोनों की फाडदी? दांत पीसते हुए ख़ुदा ने कहाः देखो मियां, इन दोनों देशों ने खेल को भी बिगाड दिया, समझ मे नहीं आरहा कि टीवी के इश्तेहारों मे अदाकारी करने वाले क्रिकेट खेल रहे हैं या क्रिकेट खेलने वाले अदाकारी भी करलेते हैं? दोनों देशों की आम जनता इस खेल पर बुरी तरह पागल होचुकी है, और खिलाडी भी ऐसे कि जनता के पैसों और सरकार पर बोझ बनी हुई है - उजडी उम्र और बढता पेट लिए ये क्या खेलेंगे? ज़माना हुआ जो इन दोनों देशों के खिलाडियों ने अपनी अपनी जनता को ख़ुश नहीं किया और भोली भाली जनता ऐसी कि हमेशा अपनी क्रिकेट टीम पर पूरी उम्मीद लगाए रहती है।

ख़ुदा ने अफ़सोस भरे लहजे मे फर्मायाः ईद का मैदान हो या गणपती पूजा का मैदान मगर खेल के मैदान मे सभी धर्म के लोग एक ही लाईन मे हंसी ख़ुशी दिखाई देते हैं और ये मंज़र ख़ुदा को बहुत प्यारा लगता है। मगर तुम कमीने इंसानों ने अब खेलों को भी बिगाड दिया, यहां भी ऊंच नीच ज़ात पात के साथ सट्टाबाज़ी और हराम कारीयां शुरू करदीं। क्रिकेट खिलाडियों की तरफ इशारा करते हुए फर्मायाः अपने ही देश का और अपनी ही जनता का पैसा खाने वाले लोगों - ख़ुद अपनों को ही धोका देते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती? आम जनता की ख़ून पसीने की कमाई को सरकार तुम पर अरबों रूपये ख़र्च करती है मगर तुम अपने देश के लिए क्यों कुछ नहीं करते?? तुम विश्व कप जीत नहीं सकते मगर कम से कम फाईनल तक पहुंच जाते तो तुम्हारे देश की जनता को थोडी ख़ुशी मिलजाती कि अगली बार का विश्व कप अपने ही देश का होगा। जारी

बाक़ी फिर कभी

[ ये ख़ुदा है - 53 ]

बेरंग ख़बरों से तंग अख़बार मरोड कर फेंकने के बाद ख़ुदा बडबडायाः आआख़… सारे के सारे अख़बार छेद हैं, हमारी कोई ख़बर ही नहीं कल रात बाथरूम मे जो फिसले वल्लाह किसी को कानोंकान ख़बर नहीं। पिछले माह जब ज़बर्दस्त बर्फबारी चली तो पूरा न्यूयार्क ख़ुदा पर ताने मार रहा था जैसा कि हम आग जलाए हाथ सेंख रहे हैं, अरे बेव्कूफों हम भी तो थरथर कांप रहे थे। ख़ुदा से पूछाः अख़बार फेंकने के बाद अब आप क्यों कांप रहे हैं? तुरंत ख़ुदा फर्मायाः मियां, हम कांप नहीं रहे बल्कि ख़ुशी मना रहें हैं अख़बार की इस ख़बर पर कि समझोता एक्सप्रेस मे हम सवार नहीं थे वर्ना आज तुम सभी को ख़ुदा के बगैर जीना पडता। फिर फर्मायाः ख़ुदा का शुक्र है कि हम ट्रेनों और जहाज़ों मे यात्रा नहीं करते, हम तो ख़ुदा हैं धुवां बनकर कहीं भी गायब होजाएंगे। ख़ुदा से कहाः अच्छाजी, आप तो बच गए अब चल कर उन मरने वालों के रिश्तदारों से हमदर्दी जितालें ताकि आपके ख़ुदा होने का कुछ तो स्बूत मिले। ठटरते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः ना बाबा ना, उनकी चीख़वपुकार और आहें सुनते ही हम बेहोश होजाएं। मियां, क्या ज़रूरत थी समझोता पर यात्रा करने की ये जानते हुए भी कि हमेशा से दोनों देशों के किसी भी समझोते पर आतंकवादी नाराज़ रहते हैं - वल्लाह हम ख़ुदा होकर भी ख़ुद आतंकवादीयों से ख़ौफ़ खाते हैं। ख़ुदा को समझायाः ख़ुदारा अपनी ज़ुबान संभालो, यहां हादसा हुआ है दर्जनों लोग टपक चुक रिश्तेदार वावीला मचा रहे हैं और आप हैं कि मज़ाकिया अंदाज़ मे अनापशनाप बोले जा रहे हैं। मूंह बसोरते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः ओह यार, आतंकवादी पर क्या कहा जाए -मानलो आजके दौर मे ये भी एक कला है और बहुत हिम्मत वाला काम है भई। टीवी पर लाईव देख कर हम ख़ुद दंग रह गए, वल्लाह क्या जिगर था हवाई जहाज़ लेकर वर्लड ट्रेट संटर की इमारतों मे घुस पडे। कान खींचकर ख़ुदा को बतायाः अरे आप ख़ुदा हो कि पजामा! आपकी बक्वास भी यहां लाईव चल रही है और आतंकवादीयों को लताडने की बजाए आप उनके कारनामों पर दाद दे रहे हैं? उंगलियां कतरते हुए ख़ुदा ने कहाः हुररर… पहले क्यों नहीं बताया कि ये हमारा लाईव है, फिर कॉलर सीधा करते हुए ख़ुदा ने फर्मायाः ये आदत से मजबूर आतंकवादी बेचारे जो सिर्फ आतंक मचाने के लिए ‘जिहाद’ की डिग्रियां उठा लाए और फिर ख़ुदा को ख़ुश करने के लिए मासूम लोगों पर बम फेंक कर भाग जाते हैं ताकि जन्नत मे इन्हें स्कून नसीब हो। वल्लाह, मगर हम ऐसा हरगिज़ होने नहीं देंगे… पिछले ज़मानों से आज तक भी किसी आतंकवादी को  आराम की मौत नसीब ना आई, वो हर जगह बेमौत मारे गए और बहुत ही बुरे हाल मे अपनी लाशें छोड गए इसके बाव्जूद फिर भी  अपना आतंक मचाने का कारोबार नहीं छोडा। तौबा कितना मनहूस दिमाग है इन आतंकवादीयों का - जब देखो मासूम जनता से बदला लेकर जिहाद समझते हो और ख़ुद आख़िरकार कुत्ते से बुरी मौत मारे जाते हो!!! ये बक्वास नहीं, हमारी बात अगर बक्वास लगे तो ख़ुद सोचो कि ये ‘जिहाद’ का नारा कब काम्याब रहा? जहां कहीं भी ये नारा लगाया ख़ुद मूंह की खानी पडी। आप मारो तो जिहाद और कोई आपको मारे तो ज़ुल्म! ये कहां का इंसाफ है? ख़ुदा को याद दिलायाः ये भाषण का समय नहीं है, दोनों देशों मे इस वक़्त ग़म का पहाड टूटा है, कुछ तो अमनवअमान की मीठी बातें बोलो जैसा कि आप दिलासा दे रहे हो ऐसी घटनाएं आईंदा नहीं होंगी। खंकारने के बाद ख़ुदा ने फर्मायाः देखो भई, समझोता एक्सप्रेस की घटना मे जितने भी लोग मरे उसके ज़िम्मेदार हम ही हैं जैसा कि आप सबका कहना है ज़िन्दगी और मौत ख़ुदा के ही हाथ मे है (ख़ुदा के कान मे कहाः अनापशनाप ना बोलो जूते पडने वाले हैं) दुबारा खंकारते हुए ख़ुदा ने बोलने की कोशिश की फिर चिल्लाते हुए कहाः हम क्या बोलें?? इस घटना पर किसकी मां बेहन को गाली दें?? (दुबारा ख़ुदा के कान मे कहाः अदबवआदाब मे बोलें ये आपका लाईव है) ख़ुदा दहाडाः भाड मे जाए लाईव - अब तक की किस्तों मे हम ने गला फाड फाड के समझाया, ख़ुद की ख़ुदाई का मज़ाक उडालिया, इन किस्तों मे अपने आप पर गालीयां लिखवालीं एक जोकर की तरह हंसाया तुम्हें… ताकी याद दिलाते रहें इंसानियत से हटकर अगर यूं ही धर्मों झगडते रहोगे तो ऐसे ही धमाकों मे मरते रहोगे या फिर किसी दिन ख़ुदा को भी मार कर उसकी मैयत को क़यामत तक दफनाते रहोगे। मुट्ठी मारते होए ख़ुदा ने फर्मायाः अमनवअमान की बातें करने वालों ज़रा ठेरो हम नाडा खोलकर अपना राज़ बतादें - हम ना हिन्दू हैं ना मुस्लमान और ना ही ईसाईः जो भी हैं वल्लाह हम बाकाईदा ख़ुदा हैं। अपने आपको सच्चा मोमिन कहलवाने वाले हे लोगों तुम्हारा कोई ईमान ही नहीं वर्ना क्या ज़रूरत है हिन्दू को काफ़िर और मुस्लमान को आतंकवादी बोलने की? अपने दांत पीसते हुए फर्मायाः कीचड से टेंनिस खेलने वाले गंदे दिमाग के लोगों - पत्ता पत्ता हमारी ख़ुदरत की गवाही देता है, हमारे हुक्म से हवाएं अपना रुख़ बदलती हैं, हर तिंका तिंका हमारे ही वजूद से है अगर हम ना होते तो ये जहां ना होता और ये जहां ना होता तो तुम जैसे घटिया सोच के इंसान ना होते। मगर ख़ुदा को ख़ुदा की कसम, शुक्र मनाते हैं कि हम ख़ुदा हैं, अगर हम इंसान होते तो तुम्हारी ही तरह कंफ्यूज़ रहते कि ये समझोता एक्सप्रेस पर धमाके हिन्दूओं ने किए या मुस्लमानों ने? छाती ठोंक कर ख़ुदा चिल्लायाः अपने वजूद की कसम, हम पूरे यकीन से कहते हैं कि ये धमाके हिन्दू और मुस्लमानों ने मिलकर किए थे जो कि दोनों इंसानियत के दुश्मन हैं। जारी

बाक़ी फिर कभी

उलटा फुलटा जो भी लिखा माफ करना, दफ्तर मे बैठ कर हिन्दी मे टैप करना मानो जैसे बॉस की छाती पर सवार होकर उसके दांत निकालना। अपने डिपार्टमंट से दो गधे छुट्टी पर गए तो दोनों का बोझ इस मासूम बकरे पर आपडा। मइ 2007 को यानी ठीक ढाई महीने बाद एक माह की छुट्टी पर भारत आ रहा हूं :) एक साल बीत गया और पता ही नहीं चला अब हर दिन इतना लम्बा लगता है कि रात होने का इन्तेज़ार रहता है। हंसी खुशी के दिन ख‌तम होए अब हर तरफ गर्मी ग्रम धुवां, बाहर तो वैसे ही गर्म हवाएं चलती हैं ऊपर से ऐ सी से निकलने वाली गर्म हवा।

अभी पिछले सप्ताह “ये ख़ुदा है” की 53 वीं किस्त (समझोता ऐक्सप्रेस धमाकों पर) तैयार करली और पोस्ट करने ही वाला था कि एक ग़लती की तलाश मे पूरी किस्त पढा तो मेरे ही बाल ख़डे हो गए। बहुत ही ख़तरनाक लेख है, लगा कि भारत जाऊँ तो दोनों हिन्दू-मुस्लमान एक होकर मुझे मार डालेंगे :( चलो अच्छा है कि मेरे लेख पर हिन्दू मुसलिम एक तो होए मुझे मारने के बाद

सोच ही रहा था कि ये 53 किस्त पोस्ट करूं या नहीं मगर बेचारे पर एक नहीं बल्कि दो तरफ से धागे (टैग्स) बांध दिए। और तो और ई मेल से भी याद दिलाया कि स्वालों के उत्तर देने हैं। चार दिन बाद आज नारद को नमस्ते किया तो “उत्तरों” का जैसे मेला लगा है। और ऐसे ऐसे चिट्ठाकारों ने उत्तर दिए हैं मानो गर्मीयों मे अचानक बारिश होगई जैसे हमारे हरदिल अज़ीज़ रमणजी। उत्तरों का मेला है और एक दूसरे को टैग इस लिए करते हैं कि यही हमारा भाईचाराह है हमारे एक होने का स्बूत भी। उन्मुक्तजी और पंडितजी का शुक्रिया कि मुझे भी याद करलिया।

अगर आप दोनों मे से किसी एक के भी स्वालों के उत्तर देदूं तो ये मेरे लिए बहुत बडी बात होती मगर ऐसा फंसा कि दोनों ने धागा बांध दिया बडे प्यार से। वादा किए बगैर कोशिश करूंगा कि आप दोनों के प्रश्नों का जवाब देसकूं मगर फ़िलहाल तो बख़्शदें ये हमारा लंच टाईम है और बाहर खडे दोस्त लोग मेरे मोबाईल पर मिसकॉल पर मिस्कॉल दे रहे हैं  क्योंकि हम रोज़ाना साथ मिल कर दोपहर का खाना खाते हैं क़रीब की एक होटल मे। लेकिन मैं कोशिश करूंगा कि ज्लद से ज्लद आपके बंधे हुए धागों से उत्तर देकर आज़ाद होजाऊँ अगर ज़्यादा देर होजाए तो क्षमा करना :)