Archive for September, 2007

[ ये ख़ुदा है - 59 ]

सुबह सुबह आस्मान से चार फ़रिश्ते आटपके चूंकि बीच रास्ता उडन तश्तरी पंक्चर होगई, धक्का मारते आए ताकि ख़ुदा का नाप लेकर ईद के कप्डे फौरी बनवादे। तुरंत ख़ुदा ने इनकार करदिया, इस बार की ईद सादगी से होगी। ख़ुदा ने अफ़सोस के साथ कहाः मियां, देखते नहीं पाकिस्तान के हालात कितने गम्भीर हैं - कब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जासकता। चंद ख़ुद्दार लोगों की वजह अचानक लाखों जनता पर मुसीबत टूट पडे, ये बडे दुःख की बात है। इस वक़्त उसामा बिन लादिन का ताज़ा वीडियो हर दिन हाऊज़ फ़ुल जा रहा है, ईरान को अमेरिका जाने के लिए बलेक मे टिकट ख़रीदना पडा साथ ही दुनिया भर मे अजब कश्मकश कि बॉक्स आफ़िस से क्या रिपोर्ट निकलने को है? और यहां भारत मे राम भक्तों के साथ घटिया मज़ाक कि वजह देश भर मे टेंशण पैदा हो गया।… मुस्लमान और ईसाईयों के बाद अब हिन्दुओं को भी मौक़ा मिला कि आपस मे लडकर मरे जो कि कल तक दर्शक बने रहे! ख़ुदा ने फ़रमायाः हमारी आरज़ू भी यही कि सभी धर्म के लोग आपस मे लडकर मरे और ख़ुदा को मज़ा दे, चूंकि ख़ुदा के पास इस से अच्छा दूसरा कोई इन्टर्टेंमंट नहीं कि इंजुए करसके।

ख़ुदा से पूछाः आपने कभी राम को देखा? उलटा ख़ुदा ने सवाल माराः क्या किसी ने ख़ुदा को देखा?? राम देखने मे वैसा ही है जैसा ख़ुदा है अलबत्ता हमारी मूंछों मे १९-२० का फ़र्क़ है, राम किलीन शे्व जब्कि ख़ुदा की मूंछें ज़मीन झाडती हैं। ग़ज़बनाक होकर ख़ुदा ने चिंघाडाः मियां, मज़ाक की भी हद होती है, भला ख़ुदा का राम से क्या लेना? पहली बार हम इस धरती पे आए हैं फिर पता चला कि हमसे पहले कई तरह के ख़ुदा आकर चले गए कभी राम, कभी शाम, कभी ईसा और कभी मूसा। सबकी कहानीयां पढते हमारा दिमाग़ घूम गया कि इन ख़ुदाओं ने अमनवअमान की बातें बताकर चले गए या इंसानों को ज़ातों मे बांटने आए थे?? ख़ुदा ने कहाः शुक्र है उस ज़माने मे हम नहीं आए वरना आज बीजेपी के जलूस मे हाज़री लगाते। ख़ुदा ने बतायाः जैसे ही हम धरती पे पधारे, एकसाथ कई शकल के इंसान देख चकरा गए हालांकि इन्हे हमने ही बनाया था। चारों ओर से लोगों ने घेरलिया, हमसे हमारा धर्म पूछने लगे तो हम दुबारा चकराके बेहोश हो गए। फिर जब होश आया तो ख़ुद को अमेरिका मे पाया, शुक्र है यहां अभी तक किसी ने हमारा धर्म नहीं पूछा।

ख़ुदा ने फरमायाः ख़ुदा को अपने ख़ुदा होने की क़सम! हमने सोचा भी ना था कि लोग ख़ुदा को अजब तरीक़ों से पूजते हैं और स्वर्ग तक पहुंचने के लिए ऊटपटांग हरकतों मे जुटे रहते हैं। ख़ुदा ने कहाः हम सुनीता विल्यम्स को सलाम करते हैं, जिसको स्पेस से दुनिया मे कोई सर्हद नज़र ना आई। हमारा भी ये हाल था, यही समझ बैठे कि दुनिया को जैसा बनाया था उसी हाल मे होगी मगर जब धरती पे उतरे तो ख़ुद को शर्म आगई। अलग अलग देशों की सर्हदें बना लिए उसपर धर्म ज़ातों की दीवारें भी और ख़ुदा को पूजते भी ऐसे कि एकदूसरे की इबादत को ग़लत बताते हैं। ज़ालिम इंसानों ने ख़ुदा की शकलें तक बनवालिए, छे हाथ वाला ख़ुदा, लम्बी ज़बान का ख़ुदा, लम्बी नाक का ख़ुदा, सूली पर टंगा ख़ुदा, क़बर मे लेटा ख़ुदा, आग मे दहकता ख़ुदा, हवा मे झूमता ख़ूदा वगैरा वगैरा (हालांकि ख़ुदा की शकल और सूरत ही नहीं)… ख़ुदा ने दहाडकर रोते हुए कहाः अफ़सोस! हमारे पास ऐसा कोई मंत्र नहीं कि हम दुबारा पैदा होते, पूरे विश्व को दुबारा बनाते, दुनिया की हर चीज़ बना देते मगर ख़ुदा की क़सम - इंसान बनाने की ग़लती दुबारा ना करते।

ख़ुदा ने ग़मज़दा अंदाज़ मे बतायाः अब शायद ख़ुदा के वजूद की ज़रूरत ही नहीं। तुम इंसान ब्लाक होल तक झांक सकते हो, स्त्री को पुरुष और पुरुष को स्त्री बना सकते हो, इंसान जान्वर की क्लोंनिंग कर सकते हो, बनावटी तारों के साथ ख़ुद ही बारिश बरसालेते हो, एकदूसरे के देषों पर ख़ुद अज़ाब बन जाते हो, ख़ुदा के स्वर्ग तक मीज़ाइल मारने का होसला भी रखते हो। पूरे विश्व को मिंटों मे तबाह करने का पूरा सामान तुम इंसानों के पास मौजूद है तो फिर ख़ुदा को अपने ख़ुदा रहने की क्या ज़रूरत है?… इतना सब कुछ तुम इंसानों ने ख़ुद करलिए लेकिन ये क्यों मानते हो कि धर्म को ख़ुदा ने बनाया है??… ख़ुदा को अपने वजूद की क़सम! ये धर्म तुम इंसानों का ही बनाया है जिसमें ख़ुदा का एक भी हाथ नहीं। ख़ुद धर्म बनालिए और एकदूसरे के धर्म को झूटा कहकर अपने आपको स्वर्गवासी सम्झने लगे! पता नहीं किसको धोका दे रहे, ख़ुदा को या ख़ुदको? ख़ुदा ने फ़रमायाः इस सारे जहाँ का सिर्फ एक मालिक है, इस मालिक को ईश्वर या पर्मेश्वर बोलो, ईसा या मूसा बोलो, राम या रहीम बोलो। चाहो तो प्यार से ख़ुदा बोलो। आपकी मर्ज़ी और भी नाम लगालो मगर प्लीज़ इस मालिक को अपने ख़ास धर्म से जोडकर ख़ुश ना हो। जारी

बाक़ी फिर कभी