Archive for April, 2008

4
Apr

स्कूल-डे

   Posted by: शुऐब    in खुदा से मिलो

[ ये ख़ुदा है - 64 ]

आज क्लास रूम मे ख़ुदा ने बच्चों पर भाषण झाडते हुए फरमायाः आप अपनी नन्नी मुन्नी खोपडीयों मे ये बात अभी से गांठलो कि हम ख़ुदा हैं और इस सारे जहां के एक अकेले और तनहा मालिक हैं। चूंकि हम ख़ुदा हैं इसलिए चीन और जापान, अमेरिका और बोस्निया, हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और क़बरिस्तान हर जगह की ख़बर रखते हैं। एक बच्चे ने खडे होकर ख़ुदा से पूछाः पाकिस्तान मे टाइम क्या हुआ है? ख़ुदा ने बच्चे को प्यार से पास बुलाया फिर उसके दोनों कान पकड उठाते हुए कहाः बदतमीज़! हम ख़ुदा हैं ना कि घडीसाज़! भला हमें क्या पता कि पाकिस्तान की औक़ात क्या है? बच्चे ने कपकपाते हुए ख़ुदा को बोलाः दरअसल कल शाम को मेरे पिताजी घर मे टीवी पर ख़बरें देखते हुए बडबडा रहे थे कि “पाकिस्तान का टाइम ख़राब चल रहा है।” ख़ुदा ने बच्चे को वापस उसकी जगह पटक़ने के बाद फरमायाः हर एक की किस्मत मे अच्छा और बुरा टाइम चलता रहते है और इसका ज़िम्मेदार ख़ुद इंसान ही है। जिसने भला किया उसका भला होता है और जिसने बुरा किया उसका टाइम ख़राब चलता है। ये सच है कि इंसान का दुश्मन शैतान नहीं बल्कि इंसान ही है।

ललू के रेल बजट पर लेक्चर देते हुऐ ख़ुदा ने क्लासरूम मे बच्चों से कहाः हालांकि आम बजट मे ग़रीबों को कुछ भी राहती नहीं मगर पूरी रेलगाडी ग़रीबों के नाम करदी। अब ट्रेनों मे ग़रीब को इतनी सहूलत मिल गई वो ड्राईवर के बाज़ो बैठकर बोले कि भैया दाएं मोडलो यहीं पास मे अपना घर है!! ख़ुदा ने बच्चों पर प्यार भरी नज़रें डालते हुए कहाः सच तो ये है कि ट्रेन यात्रा सबसे ज़्यादा बच्चों को पसंद है। एक बच्चे ने खडे होकर ख़ुदा से कहाः मेरे पिताजी कोहते है कि लालू के रेल बजट ने पूरे देश भर मे ख़ुशीयां बांटी हैं। मूंह बसौर कर ख़ुदा ने कहाः क्या ख़ाख़ ख़ुशीया! गेस सिलंडर महंगा, घास्लेट महंगा, पेट्रोल महंगा, रोटी सब्जी दाल चावल महंगा —- ज़िन्दा रहने के लिए जितनी भी ज़रूरी चीज़ें हैं सभी महमंगे और कुछ ससता है तो मोबाइल फोन, कार और रेल का टिक्ट —- ख़ुदा ने गुस्से मे कहाः ग़रीब को ज़िन्दा रहने के लिए सिर्फ मोबाइल फोन और रेल का टिक्ट क्या काफ़ी है?? अपना कॉलर चढाकर ख़ुदा ने बच्चों से कहाः हमें देखो - हम ख़ुदा हैं और जब कहीं जाना हो तो झटसे धुंवां बनकर ग़ायब होजाते हैं। ना बस मे धक्के खाना और ना ट्रेन मे बैठकर जमाहीयां मारना —- हम ख़ुदा हैं, इंसानों की तरह मुसीबतें बर्दाश्त करना हमसे नहीं होता।

क्लासरूम मे सभी बच्चे ख़ुदा पर चढ गए, किसी ने कान काटा तो किसी ने नाक काट लिया। दरअसल ख़ुदा ने बच्चों से परश्न पूछा था कि सितारों की सही गिंती बताओ?!! किसी ने भी सही जवाब नहीं दिया तो ख़ुदा ने बतौर सज़ा क़यामत पर गज़ल लिखने को कहा। अब भला बच्चों का क़यामत से क्या लेना, सीधा स्कूल पर ही ग़ज़ल लिख मारे कि क़यामत और स्कूल दोनों बराबर है!! ख़ुदा ने सब बच्चों को लाइन मे खड़ा करके उनके नन्ने पिछाड़े लाल करदिया फिर बच्चे भी बदले मे ख़ुदा पर चढ़ गए जगह जगह काटकर ख़ुदा को दीवाना बना दिया। हालत नाज़ुक होगई ख़ुदा ने फौरन स्कूल से इस्तिफ़ा देदिया किः भइ ख़ुदा का काम सिर्फ अज़ाब उगलना है ना कि इन कमबख़्त बच्चों को पढाना। ख़ुदा ने ख़ुद अपने नाम की क़सम खाते हुए कहाः लानत है हमपे जो आजके बाद किसी बच्चे से एक पाई का भी सवाल पूछा। शाम को मीडिया के आगे ख़ुदा ने रोते हुए कहाः आजके बच्चों मे पहले जैसी बात ना रही, अपने टीचरों की ज़रा इज़्ज़त नहीं और अगर ज़िद पर आजाएं तो ख़ुदा की भी ख़ैर नहीं!!

टहर टहरकर बाहर बारिश हो रही है क्लासरूम मे बच्चे जमाहीयां मारने लगे, ख़ुदा ने मूड बनाने के लिए बच्चों के सामने अपनी चमत्कारी के जौहर बिखैरना शुरू करदिए। अपना रूप बदलकर ख़ुदा ने बच्चों से पूछाः पहचानो, मैं कौन? सब बच्चों ने आंखें फाडकर चिल्लायाः “उसमा बिन लादिन!” वापस अपनी असली शकल मे आकर ख़ुदा ने बच्चों से फिर पूछाः पहचानो अब मैं कौन? सब बच्चों ने एकसाथ कहाः “ख़ुदा”। ख़ौफनाक अंदाज़ मे मुसकुराते हुए ख़ुदा ने बच्चों से कहाः शाबाश! खूब पहचाना। ख़ुदा ने कहाः सच तो ये है कि उसामा और ख़ुदा दोनो भी हम हैं जो सारी दुनिया को परेशान करते फिर रहे हैं जिसके लिए अमेरिका से हमे पैसे भी मिलते हैं —- और बहुत बहुत ज्लदी हम अपना ताज़ा वीडियो रिलीज़ करने जा रहे हैं जिसमे उसामा ने डाइरेक्ट ख़ुदा पर ही धमकीयां मारी हैं —- दांत दिखाते हुए ख़ुदा ने कहाः ये राज़ की बात है मगर किसी को बताना नहीं!! सब बच्चे डर के मारे रोना शुरू करदिए तो ख़ुदा ने दहाडकर कहाः ख़ामोश!! वरना हम इस स्कूल की इमारत पर मिज़ाइल ठोक देंगे। सब बच्चों ने ख़ुशी मे तालीयां बजाना शुरू करदिया कि ये शुभ काम आज ही चार बजे स्कूल छुटने के फौरन बाद करदें।

आज स्कूल-डे के मौक़े पर सब बच्चों ने खडे होकर ख़ुदा की शान मे तराने गाए। दांत दिखाकर ख़ुश होने के बाद ख़ुदा ने माइक पर ज़ोर से कहाः शाबाश! बैठ जाओ और एक एक करके हमसे पूछलो कि क्या पूछना है। एक बच्चे ने अदब के साथ खडे होकर ख़ुदा से पूछाः मरने के बाद क्या होता है मिसालों के साथ बयान फरमादें। ख़ुदा ने गुस्से मे बच्चे को गोल घुमाकर दूर फेंकने के बाद कहाः बदतमीज़! ख़ुदा से बेहुदा सवाल करते हो? हानी कि हम मरकर ज़िन्दा हुए हैं! हम ख़ुदा हैं और अभी तक ज़िन्दा हैं, भला हमें क्या मालूम कि मरने के बाद क्या होता है। एक और बच्चे ने डरते हुए ख़ुदा से कहाः लेकिन हमारे धार्मिक पुसत्कों मे मरने के बाद बहुत ही डराओनी बातें लिखी हैं। ख़ुदा ने डांटते हुए कहाः अरे नालायक़ बच्चों! मरने के बाद के किस्से ज़िन्दा लोगों ने ही लिखे हैं ना। ख़ुद ज़िन्दा लोगों ने अनापशनाप पुसत्कें छापदीं कि मरने बाद ऐसा होता है वैसा होता उनके अम्मा की टांग होती है आदी! सब बच्चों ने खिलखिलाकर हंसना दिया तो ख़‌ुदा ने दहाडकर कहाः खामोश!! ज़िन्दा दिल लोग अपनी ज़िन्दी के बारे मे सोचते हैं और मुर्दा दिल वाले अपने मरने के बाद तक की सोच चोस कर पागल होजाते हैं।

आजके हालात के बारे मे भाषण पढते हुए ख़ुदा ने बच्चों से कहाः आप वाकई बच्चे हैं मन के सच्चे हैं, शरारत तुम्हारे अंदर कूट कूटकर भरी है मगर तुम्हारा दिमाग़ बहुत ही मासूम है। तुम्हारा चेहरा इतना प्यारा कि हर कोई तुम्हे अपनी गोदी मे उठाकर चूमले मगर किसको क्या पता कि आधी रात को उठकर इंटरनेट पर तुम क्या देखते हो? बाप का क्रेडिट कार्ड चुराकर नंगी फिल्मों पर हज़ारों रूपये लुटाते हो? सिर्फ नंगा तमाशा देखने कि लिए महंगा मोबाइल ख़रीदते हो? टेकनॉलोजी का ग़लत फाईदा उठाते हुए बेहुदा चीज़ें एकदूसरे को एसएमएस करते हो? —- छाती पीटकर रोते हुए ख़ुदा ने कहाः मगर क़सूर तुम बच्चों का नहीं बल्कि क़सूर तो हालात का है जिसे तुम्हारे बडों ने जनम दिया, हर वर्ष एक नया ज़माना लाते हैं एक नया कल्चर पैदा करते हैं। कहीं बाप अपनी बेटी की मार रहा है और मां अपने बेटे से मरवा रही है। बाहर दुनिया मे अलग पेहचान है और घरों के दर्वाज़े के अंदर अजब तमाशा है। तुम लोग दूर दूर की ख़बरें जानते हो मगर अपने पडोसी का हाल नहीं पता! तुम मासूम बच्चे इसी को अपना कल्चर मानलेते हो, पुसत्कों मे लिखी अच्छी बातें तुम्हारी समझ नहीं आती, अब सिवाए गाली के तुम्हे डांट नहीं मिलती, बस मे कंडेक्टर से गाली सुनते हो, गली मे आईसक्रीम वाले से गाली सुनते हो और अब तो स्कूल मे टीचर भी तुम्हारी मां बेहन की गिंता है!!

दहाडकर रोते हुए ख़ुदा ने कहाः सारा का सारा क़सूर हमारा ही है कि हमने इंसान कव बनादिया, आज ये इंसान इतना तरक्की कर गया कि ख़ुदा पर भी मिज़ाइल ठोकने की सलाहियत रखता है। पहले ज़माने मे लोग बडे होकर बदमाश बनते थे मगर आजके बच्चे बचपन मे ही लोफ़र बन गए! तौबा क्या ज़माना आगया कि उसताद और शागिर्द साथ बैठकर शराब पीते हैं, अब गुणडों कि बजाए टीचर लोग बलात्कार की ख़बरों मे छाए रहते हैं पढाई के नाम पर सेक्स को मुद्दा बनाते हैं। पहले उसताद का मार फोलूं का हार समझा जाता था और आज स्कूलों मे मे पिटाई के नाम पर बच्चों के दांत तोडते हैं, हाथ तोडते हैं यहां तक कि मार मारकर बेहोश भी करडालते हैं। ख़ुदा ने तीन बार कहाः लानत है लानत है लानत है —- सक्कूलों हज़ारों की फ़ीस लोटते हो, पढाई के नाम पे धंदा चलाते हो, डॉकट्री पढने के बाद लुटेरे बंतो हो, इंज्नियर बनने के बाद लोगों को धोका देते हो और जो वकील बन गया उसने अपने बाप पर ही इलज़ाम ठोक दिया कि ये हमारी मां के साथ बैठा था —- आंसूं पूंछते हुए ख़ुदा ने बच्चों से कहाः मियां ताली तो बजाओ कि हमने इतना बढीया भाषण बोला। सब बच्चों ने ज़ोरदार तालीयां बजाकर ख़ुदा को ख़ुश करदिया।

मूड बनाने के लिए एक बच्चे ने ख़ुदा से पूछाः क्या आपने नई फ़िल्म “जोधा अकबर” देखी? तुरंत ख़ुदा ने कहाः मियां, हम इतने भी फ़ज़ूल नहीं कि फ़ज़ूल फ़िल्में देख पाते। अलबत्ता हमने इस फ़िल्म के ख़िलाफ़ जलूस मे शामिल होकर नारे लगाए। ख़ुद इस पिक्चर के निर्माताओं ने हमसे कहा कि मीडिया के आगे हमारी फ़िल्म के पोस्टर फाडो ताकि मुफ़्त मे नाम हो जाए और इस काम के लिए हमें सौ रूपये मिल गए। सब बच्चों ने ख़ुदा की चालाकी पर तालीयां बजाकर स्वागत किया। फिर अंत्राक्शरी खेलते जब ख़ुदा की बारी आई तो ‘ट’ पर अटक गया। ख़ुदा ने उस बच्चे को पास बुलाकर ख़ुब पिटाई करदी जिसने ‘ट’ पर गाना ख़तम किया। ख़ुदा ने गुस्से मे कहाः हालांकि ‘ट’ पर कोई गाना हमें याद नहीं और जब हमारी बारी आई तो ‘ट’ पर अटकादिया? एक बच्ची ने खडे होकर ख़ुदा से कहाः ‘ट’ से टन टन टन स्कूल की घंटी बजाओ और हमारी छुट्टी करो। ख़ुदा ने ग़‌ज़ब मे आकर कहाः बडी नालायक़ बच्ची है हमारे भाषण से बोर हो गई है। ख़ुदा ने बच्चों से कहाः वाकई ये किस्त काफ़ी लम्बी होचुकी है ना? एक बच्चे ने ख़ुदा से पूछाः ये आपकी किस्तें कौन पढे कि किसके पास इतना टाइम है? ख़ुदा ने ने जवाब दियाः मियां, हमारी किस्तें एक कडवा सच है जो हर किसी से हज़म नहीं होता, कई पढने वालों की ज़बान लडखडा जाती है और कई पढने वाले एक सांस मे पढ जाते हैं!!

ख़ुदा ने बच्चों से कहाः अब ज्यादा बोर होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि ये आख़िरी पेरग्राफ़ है। अपने सारे के सारे हाथ फैलाकर ख़ुदा ने बच्चों से कहाः दुनिया मे इंसानियत ख़तम होने को है, ख‌़ुद इंसानों को एक दूसरे पर पहले से ही भरोसा नहीं। तुम बच्चे भी बडे होकर ऐसे ही बनोगे, तुम चाहते हो कि ज्लदी से बडे होकर इन कमीने लोगों मे ख़ुदको कमीना मनवाएं? अच्छाई दिखाना चाहते हो मगर हर जगह रुसवाई मिलती है, भलाई करो तो पब्लिक तुम्हारी धुलाई करती है, तु्महारी नेक-नियती किसी को अच्छी नहीं लगती, तुम्हारे भोले-पन से दूसरे फाईदा उठाते हैं। पढाई मे धोका, पढ-लिखने के बाद भी धोका। नौकरी के लिए धक्के खाते हो नौकरी पालेने के बाद दूसरों को धक्के मारते हो? —- अच्छा है कि तुम बच्चे ही रहो, अपनी मासूमियत को बरक़रार रखो, अगर दुनिया मे कहीं इंसानियत है तो वो सिर्फ तुम बच्चों मे बाक़ी है। तुम भी बडे होजाओगे तो इंसानियत को छोडकर कोई हिन्दू बने कोई मुस्लमान फिर अपने बचपन की यारि भूलकर एकदूसरे की टांग खींचते रहोगे। पढ-लिखने के बाद ख़ुदा को तो बेवक़ूफ़ बनाते ही हो मगर शर्म की बात है कि तुम ख़ुद भी बेवकूफ़ बनते हो। दहाडकर रोते हुए ख़ुदा ने बच्चों से कहाः तुम नन्ने मुन्ने बच्चे हो, तुम्हारा कोई धर्म नहीं, ना तुम हिन्दू हो ना मुस्लमान - एकदम मासूम बच्चे हो और अपनी मासूमियत को हमेशा क़ायम रखो, ख़ुदा के नज़दीक सबसे महान तुम ही हो। सभी बच्चों ने ज़बर्दस्त तालीयां बजाया, ख़ुदा ने शुक्रिया के तौर पर बच्चों मे पांच पांच रूपये बांटे तो बच्चों ने ख़ुशी मे दुबारा तालीयां बजाया —- ख़ुदा ने बच्चों को डांटते हुए कहाः अरे कमबख़्तों! बस भी करो, हमारे पास और पैसे नहीं हैं!! जारी

बाक़ी फिर कभी