Archive for December, 2008
भारत और पाकिस्तान के उर्दू अख़बार बडे कमाल के हैं कि कभी मरने नहीं दिया फ़िलिस्तीनीयों को सिवाए शहीद होने के। बेचारे फ़िलिस्तीनीयों को घर बिठाए ही शहीद करवादेते हैं चाहे वो ताश खेल रहे हों, नहा रहे हों, हुक़्का और दारू पी रहे हों कि अचानक मौत आगई और उर्दू अख़बारों मे ये शहीद होगए।
दुःख की बात है, मरने वाले फ़िलिस्तीनीयों मे छोटे बच्चे भी होते हैं गली मुहल्ले मे खेल रहे होते हैं और इन्की किसी से दुश्मनी भी नहीं कि यूं हंसते खेलते शरीर के छेतड़े उड़जाते हैं। माताओं का बिलबिलाना, हर ओर चीख़वपुकार और इंतेक़ाम के जज़बात…. हात्थों मे क़ुरान लिए जलूस और जलसे। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिसदिन फ़िलिस्तीनीयों ने जलूस ना निकाला।
जज़बात मे शर्शार ये फ़िलिस्तीनी अपनी जेब मे बम रखे इज़राइलीयों पर कूद पड़ते हैं जिसे वो ‘इंतेक़ाम’ या फिर ‘जिहाद’ का नाम देते हैं। और इज़राइल अपनी जवाबी कार्वाई करे तो मरने वाले फ़िलिस्तीनीयों को उर्दू अख़बार ‘शहीद’ का नाम देते हैं…. सच है, अपने देश केलिए लड़ने मरने वाले शहीद ही कहलाते हैं। वैसे भी इज़राइल मुसल्मानों की आंखों मे कांटा है।
मेरे विचार मे फ़िलिस्तीन और इज़राइल मे कोई जंग जैसी बात नहीं सिवाए छेड़छाड़ के। क्योंकि अगर इज़राइल चाहे तो सिर्फ़ एक मिनट मे फ़िलिस्तीनी राज्य को हिलाकर रखदे मगर बाद मे दुनिया को जवाब देने के लिए उसके पास कोई जवाब नहीं सिवाए शर्मींदा होने के। वर्षों की इस आपसी छेड़छाड़ मे कई फ़िलिस्तीनी और इज़राइली मरचुके हैं या फिर शहीद होगए।
अगर फ़िलिस्तीनी हक़ पर होते तो आज इज़राइलीयों की टांगें तोड़ ख़ुद उन्ही के हात्थों मे थमा देते…. लेकिन ये इतने कमज़ोर और लाचार हैं कि बेचारों को आजतक मेहनत मज़दूरी करना नहीं पता। दुनिया भरसे ख़ैरात पर पलने वाले फ़िलिस्तीनी यहां तक कि इनकी सरकार और पुलिस को भी ख़ैरात मे मिलने वाले पैसों से तंखा मिलती है। ख़ुद भारत सरकार ने कई बार अनाज के साथ लाखों रूपय ख़ैरात मे दिए थे।
फ़िलिस्तीनीयों को अपने पैरों पर खड़े होने की ताक़त नहीं कि ताक़त्वर देश इज़राइल से ‘ऐलान-ए-जिहाद’ का नारा लगाकर दुनिया भरके मुस्लिम देशों से हमदर्दी हासिल करना चाहते हैं…. सच बात ये है कि सिर्फ़ मुसल्मान ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी ज़ात वाले फ़िलिस्तीनीयों से हमदर्दी रखते हैं क्योंकि ये एक लाचार क़ौम है, तभी तो ग़ैर मुस्लिम देश भी फ़िलिस्तीन को ख़ैरात भेजते हैं।
कमज़ोर को और ज़्यादा कमज़ोर बनाने के लिए दुनिया भर से ख़ैरात भेजी जारही है मगर किसी मे इज़राइल को रोकने की हिम्मत नहीं। सारी दुनिया जानती है कि फ़िलिस्तीन और इज़राइल के बेच क्या चक्कर है….. मेरी नज़र मे सच ये है कि फ़िलिस्तीनी अपने ही घरों से बेघर होगए, ऐशवआराम केलिए दुबई मे अपनी पत्नीयों बेटीयों को बेच खागए और आख़िर मे ख़ुद भी बिकाऊ होगए। अब इनके पास कुछ नहीं सिवाए ‘जिहाद’ का नारा लगाने और बाक़ी दुनिया सर हमदर्दी पाने।