होसकता है ठाकरेजी स्वर्गवास होगए, वरना अबतक आमना, सामना और दूसरे रोज़नामा का पहला पन्ना अपने बयानों से काला करडालते कि शुएब और सानिया की शादी मे अलक़ाईदा या तालीबान का पक्का हाथ है। इस होने वाली शादी को लेकर मीडिया वालों ने ऐसा भांगडा डाला कि अब तो उबामा को भी इस पोस्ट पर टिप्पणी देनी लाज़िम होजाए। वैसे भारतय जनता पार्टी ने इनकी शादी मे भांगडा डालने अर्ज़ी दाख़िल करदी।
बैठे बिठाए रात गहरी होती जारही है और मैं नैटगिरी करते समाचार वैबसाईट्स देख रहा हूं और सामने टीवी मे अकसर न्यूज़ चैनल पर ऐंकर्स सानीया और शुएब के गुण पढते अपना गला सूखा कर रहे हैं। बोलते हैं कि आईपीएल मे पाकिस्तानी खिलाडीयों को रिजक्ट करदिया तो सानीया ने पूरे भारतिय नौजवानों को रिजेक्ट करदिया। ये टीवी एंकर्स हांपते कांपते सानीया और शुएब के बारे मे ऐसे बोले जा रहे हैं जैसे सुनामी उबलने वाला है या फिर लोकसभा चुनाव का रिज़ल्ट बता रहे हैं।
होने वाली बहू का स्वागत बम धमाकों से करेंगे? कोई भी ताज़ा अख़बार ये ख़बर नहीं देता कि आज पाकिस्तान मे धमाकों की आवाज़ सुनाई नहीं दी!! हर दिन लोडशेदिंनग झेलने के साथ रोटी पकाने आटे केलिए लम्बी क़तार मे खडेगी। पडोस की महीलाओं को बालिवुड के किस्से कहानीयां सुनाकर उनको ख़ुश रखेगी वैसे भी पाकिस्तानीयों केलिए बालिवुड के किस्से ब्रेकफ़ास्ट, लंच और डिन्नर तो दूर की बात इबादत से भी ज़्यादा पवित्तर हैं।
दयोबंद के मुल्ला लोग भी ख़ामोश हैं वरना ऐसे मौक़े पर सबसे पहले इनही को खुजली शुरू होनी थी कि भारतय जनता पार्टी ने उनकी पीठ मुफ़्त मे खुजाडाली। सच्ची बात ये है कि उन दोनों की शादी मे किसी को भी दिलचस्पी नहीं लेकिन मीडिया वालों के। कुछ तो बताना है कुछ तो दिखाना है और बकवास बोलना है ख़ामव्ख़ा चौबीस घंटों का चैनल जो खोल रखा है। आम आदमी को खुदकी पडी है, ये कौनसा सानीया और शुएब मलिक की जोडी पर अपना सर खपाएं। महीने बीत गए अलक़ाईदा और तालीबान पर कोई पोस्ट लिखा नहीं। हर काम, बात, ख़बर, हादसा वगैरह मे इनकी टांग खींचना फ़ैशन है तो ये पोस्ट भी अलक़ाईदा और तालीबान के नाम है।
Note: याद रहे कि मेरा नाम शुऐब s h u a i b है ना की शुएब s h o a i b.
इसलिए कि बहुत दिनों बाद हमने अपना चिट्ठा देखा तो मुंह से यूंहि हा हा हा निकल आया। अगर किसी को पसंद ना आए तो ही ही ही करलें इजाज़त है। कई बार अपना चिट्ठा देखा मगर जी भरके आज ही देखा। पुरानी क़िस्तों पर नज़र डाले तो ख़ुदपे हंसी आगई, बकवास छापने मे कोई हमसे बड़ा नहीं क्योंकि हम ख़ुदा हैं। जारी
बाक़ी फिर कभी
[ ये ख़ुदा है - 83 ]
कैसी दुआ और प्रार्थना? अगर दुआ क़बूल होती तो आज हम भारत के प्रधानमंत्री होते। जारी
बाक़ी फिर कभी
[ ये ख़ुदा है - 82 ]
भाड़ मे जाएं वे लोग जो अपने ख़ुदा को भूल ओबामा पर नोबेल पुरस्कार चढ़ाया। भाड़ मे जाएं वे लोग भी जो भारत से दान मे ज़मीन ली और आजतक भी ख़ैरियत से नहीं। और भाड़ मे जाएं वे लोग भी जो बोलते हैं कि चीन देश ने भारत को चारों ओर से घेर रखा है हालंकि वो भारत के अंदर सभी घरों मे चैन से आ बैठा है। जारी
बाक़ी फिर कभी
[ ये ख़ुदा है - 81 ]